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सिरका कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन:3 साल से बंद सिरका कोलियरी को आउटसोर्सिंग से खोलने की तैयारी, विरोध

सिरका2 महीने पहले
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संयुक्त ट्रेड यूनियन सिरका ऑफिस के समक्ष प्रदर्शन करते हुए। - Money Bhaskar
संयुक्त ट्रेड यूनियन सिरका ऑफिस के समक्ष प्रदर्शन करते हुए।

संयुक्त ट्रेड यूनियनों के द्वारा शनिवार को आउटसोर्सिंग से सिरका बचाओ समेत सात सूत्री मांगों को लेकर परियोजना सिरका कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। अवसर पर ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों और कामगारों ने बुलंद स्वर में प्रबंधन के षड्यंत्रकारी नीतियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इसकी अगुवाई सुखदेव महतो और संचालन सुशील कुमार सिन्हा ने की। ट्रेड यूनियन वक्ताओं में मुस्तफा खान, सुशील कुमार सिन्हा, लक्ष्मी चरण महतो, जगनारायण बेदिया, नागेश्वर महतो, समशूद खान, जगदीश चंद्र बेदिया, सत्येंद्र महतो, कुंवरa महतो, आदि ने एकजुट होकर अपनी बातें रखी।

सभी ने कहां कि सीसीएल सिरका चलते कोल्यारी को तीन सालों से प्रबंधन नीतियों के कारण बंदकर रखा हैं। एकाएक खदान खोलने को लेकर आउटसोर्सिंग के हवाले करने की साजिश की जा रही हैं। प्रबंधन अधिकारी मजदूरों को समझाने का भी प्रयास कर रही हैं। लेकिन कामगार अपने भविष्य को लेकर सचेत हैं। आउटसोर्सिंग होने से 370 मजदूरों का भविष्य अधर में लटक जाएगा। आउटसोर्सिंग कंपनी से निजीकरण को लगातार बढ़ावा मिलेगा।

जबकि विस्थापितों को भी अपने जमीन के बदले समुचित नौकरी- मुआवजा नहीं मिल पाएगी। प्रबंधन जमीन की समस्या निपटाने के लिए आउटसोर्सिंग को लाकर काफी एक्टिव हैं। सिरका खदानों में अपार कोयले का भंडार हैं। प्रबंधन की गलत नीतियों के कारण 3 वर्षों में लाखों टन कोयला जलकर राख हो गया।

प्रबंधन को अपने हाथों में लेकर डिपार्टमेंटल तरीके से शांवल मशीन, हॉलपैक एवं अन्य कलपुर्जे उपलब्ध कराकर कोलियरी को 100 वर्ष के भविष्य से अधिक देश के ऊर्जा पूर्ति के लिए चलाना चाहिए। जिससे क्षेत्र का माहौल शांतिपूर्ण बना रहे। श्रमिक नेताओं ने कहां कि 1973 के समय बर्ड कंपनी के चार मजदूरों के आंदोलन और आहूति से कोयला उद्योग राष्ट्रीयकरण हुआ था। जबकि पुनः निजीकरण का भूत फिर से आकर खड़ा हो गया। अब श्रमिक संगठनों, कामगारों, कर्मचारियों को आंदोलन का बिगुल बजाना होगा।

मांगें नहीं पूरी करने पर होगा आंदोलन

ट्रेड यूनियनों ने प्रबंधन को 7 सूत्री मांग पत्र सौंपा। जिसमें 15 दिनों का समय दिया गया हैं। इसके बाद आगे आंदोलन की बात कहीं। मांग पत्र में सिरका आउटसोर्सिंग प्रक्रिया को अविलंब निरस्त करने, कोलयरी सरकार को डिपार्टमेंटल चालू रखने, कोलियरी में शांवल मशीन देने, सीटीओ लागू करने, विस्थापितों को मुआवजा, नौकरी अविलंब भुगतान करने, सिरका डिस्पेंसरी में डॉक्टर के समय मुहैया कराने, प्रत्येक 3 तारीख को सिरका कामगारों को वेतन भुगतान करने आदि मांगे शामिल हैं। मौके पर रंजीत महतो, विष्णु राम, कल्लू राम, विश्वनाथ मांझी, जीतू लिंडा, नेपाल महतो, लालमोहन बेदिया, ललन यादव, कैलाश यादव समेत आदि कामगार उपस्थित थे।

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