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रथ यात्रा महोत्सव:भगवान जगन्नाथ एक जुलाई को पहुंचेंगे मौसीबाड़ी

रामगढ़2 महीने पहले
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कैथा के भगवान जगन्नाथ मंदिर। - Money Bhaskar
कैथा के भगवान जगन्नाथ मंदिर।

रामगढ़ शहर से 3 किलोमीटर की दूरी पर कैथा में भगवान जगन्नाथ की मंदिर है। यहां,मंदिर पर शहर सहित 15 गांवों के लोगों की अटूट आस्था व विश्वास है, और भगवान की रथ यात्रा में शामिल होते है। 1 जुलाई को भगवान की रथ यात्रा महोत्सव धूमधाम से मनाने की तैयारी चल रही है। मंदिर व मौसी बाड़ी मंदिर का रंग रोगन किया गया है। वहीं,भक्त भगवान के रथ को सजाने में जुट हुए है। कोरोना संक्रमण महामारी के बाद इस वर्ष रथ यात्रा महोत्सव धूमधाम से मनाने की तैयारी है। धार्मिक अनुष्ठान,भक्ति जागरण, अटूट भंडारा के अलावा मेला का आयोजन किया गया है।

1 जुलाई की प्रातः पूजन के बाद 5 से 7 बजे तक प्रसाद का भोग लगाया जाएगा

मंदिर के मुख्य पुजारी डॉ बीएन चटर्जी ने बताया कि 30 जून को भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा व भाई बलराम की एकांतवास समाप्त होने के बाद 30 जून को चक्षुदान कर मंदिर के गद्दी पर विराजमान कराया जाएगा। 1 जुलाई की प्रातः पूजन के बाद 5 से 7 बजे तक प्रथम प्रसाद का भोग लगाया जाएगा। दोपहर 12.30 बजे खिचड़ी का भोग,1.30 बजे खीर,4 बजे मलपुआ का भोग लगाया जाएगा। वहीं, संध्या 6 बजे आरती के बाद 6.30 बजे भगवान के विग्रहों का रुथारुढ़ कराया जाएगा। 6.55 बजे भगवान के रथ को भक्त खींच कर मौसीबाड़ी ले जाएंगे। यहां, रात्रि 8 बजे भगवान की आरती होगी। इसके बाद 9 जुलाई को धुरती रथ के साथ भगवान मंदिर आएंगे। महोत्सव तैयारी में पूजा समिति के अध्यक्ष वार्ड पार्षद देवधारी महतो,सचिव राजेश कुमार महतो,कोषाध्यक्ष आशुतोष चटर्जी,मुख्य संरक्षक डॉ भागवत नारायण चटर्जी, कार्यकारिणी सदस्य राजू कुमार महतो,देवदयाल महतो,संजय कुमार,अमित कुमार सहित अनेक भक्त जुटे हुए हैं।

ओडिशा की पुरी जगन्नाथ धाम से जुड़ा है यह मंदिर

पुजारी डॉ बीएन चटर्जी बताते है कि ओडिशा के पुरी जगन्नाथ धाम से इस मंदिर का सीधा जुड़ाव है। यहां,भगवान से सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें पूरी होती है। उन्होंने बताया कि 1950 में स्थापित भगवान के विग्रहों को 59 वर्ष बाद त्रिवेणी संगम में प्रवाहित किया गया। वहीं, 2009 में ओड़िशा के पुरी जगन्नाथ धाम की लकड़ी से भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम व बहन सुभद्रा के विग्रह बनाकर मंदिर में स्थापित किया गया है।

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