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जल कृषि के भविष्य पर किया गया सेमिनार:छात्रों को बताया खेती की नई विधि हाइड्रोपोनिक्स में पैदावार के लिए मिट्टी की नहीं होती है आवश्यकता

महुआडांड़2 महीने पहले
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नेतरहाट स्कूल में बच्चे। - Money Bhaskar
नेतरहाट स्कूल में बच्चे।

झारखंड प्रदेश का ख्याति प्राप्त आवासीय विद्यालय नेतरहाट विद्यालय अपने बहुआयामी क्रियाकलाप में शनिवार को एक और आयाम, कृषि की आधुनिक तकनीक “जल कृषि हाइड्रोपोनिक्स” को अपने में जोड़ लिया है। इंटर विज्ञान द्वितीय वर्ष की छात्रा नैका नंदिनी ने पर्वांत के विशेष सम्मेलन में “जल कृषि-कृषि का भविष्य” विषय पर मॉडल तैयार कर सेमिनार में प्रस्तुत किया। कृषि के इस विधि को मिट्टी रहित खेती भी कहते हैं।

इस पद्धति में मिट्टी की आवश्यकता नहीं होती है। पौधों को जरूरी पोषण पानी के माध्यम से दिया जाता है। यह तकनीकी विशेष रूप से पत्तेदार पौधों यथा पालक, धनिया, लाल साग, लेट्यूस आदि के लिए बहुत ही सफल पाया गया है। छात्रा नैका नंदिनी ने बताया कि अंतरिक्ष में भी इस तकनीक से पौधों को उगाया गया, जो मिट्टी में उगाए गए पौधों की तुलना में ज्यादा अच्छा पाया गया है। नेतरहाट विद्यालय के कृषि विभाग द्वारा पारंपरिक कृषि के साथ-साथ बच्चों को मशरूम उत्पादन का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। धातु एवं काष्ठ कला की शिक्षा छात्रों को स्थापना काल से ही दी जा रही है।

वर्तमान में कृषि विज्ञान प्रशिक्षिका ममता कुमारी के निर्देशन में कृषि विज्ञान की छात्रा नैका नंदिनी ने इस पद्धति को अपनाते हुए खीरा, मिर्च, पालक साग, लाल साग के पौधों को लगाया। बहुत ही कम समय में जल में पोषण प्रवाहित करते हुए पौधों की अच्छी बढ़त देखी गई।। खेलकूद एवं व्यायाम योग के सफल टीमों एवं प्रतिभागियों के बीच प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।

कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन रसायनशास्त्र विभाग अध्यक्ष सह सम्मेलन प्रभारी रवि प्रकाश द्वारा किया गया। मौके पर पूर्व प्राचार्य विंध्याचल पांडेय, सम्मेलन प्रभारी अंशुमन चटर्जी, कृषि प्रभारी प्रसाद पासवान, खेल प्रभारी विधु शेखर देव, व्यायाम प्रभारी रवि प्रकाश सिंह सहित सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक, शिक्षिकाएं समेत छात्र उपस्थित थे।

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