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शरद संपात दिवस:नवनीत ने कहा- 23 सितंबर को दिन व रात लगभग बराबर मात्र 6 मिनट का रहता है अंतर

लोहरदगा2 महीने पहले
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कार्यक्रम को संबोधित करते एसोसिएशन के संयुक्त सचिव। - Money Bhaskar
कार्यक्रम को संबोधित करते एसोसिएशन के संयुक्त सचिव।

भास्कर एस्ट्रो एसोसिएशन के बैनर तले राजकीयकृत उत्क्रमित उच्च विद्यालय चितरी में शरद संपात दिवस मनाया गया। एसोसिएशन के संयुक्त सचिव नवनीत कुमार गौड़ ने बच्चों को बताया कि सूर्यादि ग्रह नक्षत्रों के विषय में हमारे ऋषि-मुनियों ने प्राचीन काल में ही कई जानकारी विभिन्न ग्रंथों के माध्यम से हमें दी है। ऋषि-मुनियों के द्वारा की गई कालगणना बहुत ही सटीक हुआ करती थी। महाभारत काल से ही हम सबों को सूर्य ग्रहण आदि की जानकारी थी। उन्होंने कहा कि आज का दिन इसलिए और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आज के दिन और रात लगभग बराबर होते हैं। केवल मात्र 6 मिनट का अंतर रहता है।

वस्तुतः यह अंतर इसलिए होता है कि पृथ्वी के वायुमंडल के अपवर्तत के कारण सूर्य समय से पूर्व उगते एवं समय के पश्चात डुबते हुए प्रतीत होते है। इसे संपात दिवस भी कहा जाता है। पूरे वर्ष में यह दो बार होता है। पहला 21 मार्च को वसंत ऋतु में वसंत विषुव तथा दूसरा 23 सितंबर को शरद विषुव के नाम से जाना जाता है। इस दिन सूरज की किरणें भूमध्य रेखा पर सीधे पड़ती है अर्थात सूर्योदय एवं सूर्यास्त भूमध्य रेखा पर ही आज के दिन होता है।

वास्तविक अक्षांश 14 मिनट कम पाया
विद्यालय में एक कार्यशाला आयोजित की गई जिसमें अक्षांश ज्ञात करना विद्यार्थियों को सिखाया गया। उन्हें 5 ग्रुपों में बांटा गया और प्रत्येक ग्रुप को एक निश्चित लंबाई की छड़ी दे दी गई। उन्हें समतल स्थान पर गाड़ने के लिए कहा गया और 11:00 बजे से उसको प्रत्येक 10:10 मिनट पर उसकी छाया को नापने के लिए कहा गया। सबसे छोटी छाया 11: 46 बजे प्राप्त हुई। वस्तु की ऊंचाई और प्राप्त छाया का अनुपात ज्ञात किया गया। अनुपात को त्रिकोणमितीय सारणी से कोण को मापा गया। इसे 90 में से घटाया गया। सभी ग्रुपों का औसत 23 डिग्री 10 मिनट आया जो वास्तविक अक्षांश उससे मात्र 14 मिनट कम पाया गया

हाई स्कूल के छात्र-छात्राओं को अक्षांश ज्ञात करने की प्रायौगिक विधि भी बताई गई

ज्योतिष आचार्यों के अनुसार यह समय पृथ्वी पर देवी शक्ति के आने का संकेत माना जाता है। अतः उस समय हम सभी शक्ति स्वरूपा दुर्गा माता की आराधना करते हैं। मौके पर बच्चों को अक्षांश ज्ञात करने की प्रायौगिक विधि बताई गई। आज के दिन अक्षांश ज्ञात करने का उत्तम दिन होता है। वसंत विषुव के समय उत्तरी गोलार्ध में मौसम एवं प्रकृति में अद्भुत बदलाव देखने को मिलता है।

वृक्ष नए नए पत्ते फूलों से लद जाते हैं, जिससे पृथ्वी सुरभित हो जाती है। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षक प्रमेंद्र कुमार, बंदे उरांव, संदीप कुमार, रविंद्र कुमार सिंह, सुधा सिंह, ज्योति किरण बाखला, कुंती रानी आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विद्यालय के प्रधानाध्यापक सुनील भगत ने बच्चों को शरद संपात दिवस की शुभकामना देते हुए कहा कि आप सभी के परिवार एवं जीवन में खुशहाली खेतों में हरियाली हो आपके घर अन्न एवं धन संपदा से भरा रहे।

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