पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

चिंताजनक:जनरल वार्ड में हो रहा है जले हुए मरीजों का इलाज

लोहरदगाएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक

लोहरदगा सदर अस्तपताल में जले हुए मरीजों के लिए इलाज की अलग व्यवस्था नहीं है। यानि यह कहा जा सकता है कि अस्तपताल में बर्न यूनिट नहीं है। ऐसे मरीजों को अस्पताल के जनरल वार्ड में रखकर इलाज किया जाता है। जबकि जले हुए मरीजों के लिए विशेष व्यवस्था की जरूरत होती है। जले मरीजों को इनफेक्शन का खतरा अधिक होता है। इसलिए बर्न मरीजों के लिए बर्न यूनिट आवश्यक है। ऐसे मरीजों के लिए एसी के साथ एंटी प्रोहिबिटेड होना चाहिए। जबकि सदर अस्पताल में पहुंचने वाले बर्न मरीजों का इलाज जनरल वार्ड में ही होता है। विशेष व्यवस्था के तहत ऐसे मरीजों को मच्छरदानी की व्यवस्था दी जाती है। इसके अलावा जिस जनरल वार्ड में मरीजों को रखा जाता है वहां अन्य मरीजों व उनसे संबंधित लोगों की आवाजाही जूता चप्पल के साथ लगी रहती है। इसपर लोगों के प्रवेश पर कोई प्रतिबंध नहीं रहती है। क्षेत्र के विभिन्न गांवों सहित शहर से भी बर्न मरीजों को सर्वप्रथम सदर अस्पताल ही लाया जाता है। जहां मरीज की स्थिति के अनुसार उन्हें बेहतर इलाज के लिए रिम्स रेफर किया जाता है। क्योंकि अबतक सदर अस्पताल में बर्न यूनिट की व्यवस्था नहीं बन पायी है। जले हुए मरीजों को सदर अस्पताल के जनरल वार्ड में रखा जाता है। इनका इलाज ड्यूटी पर तैनात रहने वाले चिकित्सक ही करते है। जब उनकी स्थिति गंभीर देखी जाती है तो उन्हें रिम्स रेफर कर दिया जाता है। संपन्न परिवार तो मरीजों को यहां से छुट्‌टी कराकर निजी अस्पतालों में ले जाते है। परंतु ज्यादातर मरीजों को रेफर करने के बाद रिम्स ले जाया जाता है। इस क्रम में रास्ते में मरीज की स्थिति गंभीर होने व अस्पताल ले जाने के बाद मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है। जिससे कई बार मरीज की मौत भी हो चुकी है। जबकि जले हुए मरीजों के लिए बर्न यूनिट होना अति आवश्यक है। जनरल वार्ड में भी मरीज को इंफेकशन से बचाने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग किया जाता है।

मामले पर सिविल सर्जन संजय कुमार सुबोध ने बताया कि लोहरदगा में बर्न यूनिट नहीं है। जिसका कारण अस्पताल में इस यूनिट के लिए जगह का नहीं होना है। कहा इससे जुड़े मरीजों का इलाज सामान्य स्थिति रहने पर अस्पताल में ही रखकर की जाती है। मरीज की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें रिम्स भेजा जाता है। गंभीरता मरीज के शरीर के जले हुए भाग के आधार पर तय की जाती है।

खबरें और भी हैं...