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दुर्गापूजा महोत्सव:487 साल पुराना है नाला का गड़ेर दुर्गा मंदिर राजघराने की विधि से की जाती है पूजा-अर्चना

नाला2 महीने पहले
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मुगल कालीन नाला का गड़ेर दुर्गा मंदिर। - Money Bhaskar
मुगल कालीन नाला का गड़ेर दुर्गा मंदिर।

487 साल पुराना है नाला का गड़ेर दुर्गापूजा महोत्सव के अवसर पर प्रखंड क्षेत्र के सियारकेटिया, देवली, देवजोड़, कुलडंगाल, मूर्गाबनी, सागजुड़िया समेत दर्जनाधिक गांव में भक्ति और उत्साह का वातावरण बनने लगा है। नवरात्र पूजा प्रारंभ होने में महज़ तीन का समय शेष रह गया है। ऐसे में क्षेत्र के सभी मंदिरों में साफ सफाई एवं रंग रोगन का कार्य तेज गति से चल रहा है। गौरतलब है कि प्रखंड मुख्यालय के नीचे पाड़ा स्थित गड़ेर दुर्गापूजा के लिए आवश्यक तैयारियां शुरू किया गया है । 1535 ई. में यानी मुगल काल में यहां राजघराने की विधि से पूजा-पाठ शुरुआत हुई है और अब भी जारी है।

सनद रहे कि शक्ति उपासक ठाकुर बुद्धदेव सिंह के द्वारा इस मंदिर का निर्माण कर पूजा-अर्चना वैदिक रीति रिवाज से प्रारंभ किया गया है। अब भी दूर दराज से महिला, पुरूष श्रद्धालु मन्नत लेकर नियमित मां के दरबार आते हैं। करीब पांच सौ साल पुराना यहां के देवी माता का दरबार क्षेत्र में प्रगाढ़ आस्था का केंद्र है। गड़ेर दुर्गा मंदिर में मां की अपार महिमा एवं कृपादृष्टि का क्षेत्र में अलग पहचान है। ऐसी मान्यता है कि मन्नते करने वाले कभी निराश नहीं होते है। कालांतर में बुद्धदेव राजा के वंशज के द्वारा इस पूजा संचालन होता आ रहा है। सजावट से लेकर रंगाई पोताई भी सिंह परिवार के देख रेख में संपन्न होता है जिससे नागरिक व श्रद्धालुओं में खुशी है।

मंदिर के सेवाइत सुकुमार सिंह, विजय कुमार सिंह एवं राम प्रसाद सिंह ने कहा कि लगातार दो साल तक कोरोना काल के कारण श्रद्धालुओं के मन में उत्साह का अभाव रहा। लेकिन इस बार आसपास क्षेत्र के लोगों में अपार खुशी है। इसबार मेला एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए तैयारी की जा रही है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। यहां के मंदिर को लेकर लोगों में अटूट आस्था है। यहां पूजा करने आसपास के इलाके से भी रोजना श्रद्धालु पहुंचते हैं।

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