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पक्षियों का प्राकृतिक पर्यवास:उत्तरी कर्णपुरा घाटी में कोयला खनन से पक्षियों का हो रहा पलायन कटकमसांडी के चोपे जंगल में 35 प्रजाति की पक्षियां देती हैं दिखाई

हजारीबागएक महीने पहले
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चोपे जंगल में दिखा पैराडाइज फ्लाईकैचर। - Money Bhaskar
चोपे जंगल में दिखा पैराडाइज फ्लाईकैचर।

हजारीबाग और चतरा जिले के बॉर्डर पर स्थित चोपे जंगल बर्ड वाचर के लिए सबसे बेहतर जगह बन रहा है। चोपे जंगल हजारीबाग शहर से मात्र 15 किलोमीटर की दूरी पर कटकमसांडी प्रखंड के सीमा पर स्थित है। इस जंगल में एक वर्ग किलोमीटर में पक्षियों की 30 से 35 प्रजाति आसानी से दिखती हैं।

वन्य जीव संरक्षण पर काम करने वाली संस्था नियो ह्यूमन फाउंडेशन के बर्ड वाचर्स की टीम ने 34 प्रजाति के पक्षियों की लिस्टिंग समर बर्ड वाचिंग में किया है। बर्ड वाचर अमित जैन ने कहा कि यह काफी सुखद है कि एक ही स्थान पर प्राकृतिक परिवेश में इतनी अधिक चिड़िया एक जगह मिल रही है।

उत्तरी करणपुरा घाटी के बड़कागांव, केरेडारी, टंडवा सहित अन्य कोल माइंस में कोयला खनन का असर जैव विविधता पर पड़ रहा है। उत्तरी कर्णपुरा घाटी इंपोर्टेंट बर्ड एरिया घोषित है। खनन के कारण चिड़ियों के प्राकृतिक पर्यवास नष्ट हो रहे हैं।

क्षेत्र में निवास करने वाली चिड़िया अगल-बगल के जंगल में पलायन कर रही है। इंडियन बोर्ड कंजर्वेशन नेटवर्क के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ सत्यप्रकाश बताते हैं कि चोपे का जंगल बड़कागांव के जंगल से जुड़ा हुआ है। इस वजह से भी चोपे जंगल में चिड़ियों का पलायन संभव है।

चोपे जंगल में मिले पक्षी
छोटे जंगल के बर्ड सर्वे में मिले 34 प्रजाति के पक्षियों में कई दुर्लभ प्रजाति के हैं। इनमे एशियन पैराडाइज फ्लाई कैचर, इंडियन पित्ता या नवरंग, इंडियन गोल्डन ओरियल, मोर, ब्लैक नेप्ड मोनार्क, जंगल बैबलर, कॉमन मैना, कोपरस्मिथ बारबेट, वाइट ब्रेस्टेड किंगफिशर, पराकीट, लाफिंग डॉव, ओरिएंटल टर्टल डॉव, स्पॉटेड डॉव, फैंटेल, ओरिएंटल व्हाइट आई, रेड वेंटेड बुलबुल, ब्लैक काइट, रोफोस ट्रीपाई, ब्लैक हेडेड ओरियोल, कुकू श्राइक, स्मॉल मिनीविट, इंडियन कुकू, कोकुल, जंगल क्रो, टिकल्स ब्लू फ्लाई कैचर, कार्मोरेंट, एग्रेट, पौंड हेरोन, रेड जंगल फॉल, ओरिएंटल मैगपी रोबिन, मैगपी रोबिन मिले हैं।

दुनिया भर में पक्षियों को संरक्षित करता है आईबीए
बर्ड लाइफ इंटरनेशनल सर्वेक्षण के बाद इंपॉर्टेंट बर्ड एरिया घोषित करता है। आईबीए का उद्देश्य दुनिया के पक्षियों और संबंधित जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में काम करना है।

पक्षियों की निगरानी और सुरक्षा देने के साथ उनके प्राकृतिक पर्यावास को भी बचाना है। आईबीए वैश्विक, क्षेत्रीय स्तर पर पक्षियों के संरक्षक की तरह कार्य करता है।

झारखंड में सात इंपाेर्टेंट बर्ड एरिया घाेषित

झारखंड में सात इंपॉर्टेंट बर्ड एरिया घोषित है। इनमें हजारीबाग वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी सिंहभूम, नॉर्थ करणपुरा वैली हजारीबाग चतरा, उधवा लेक बर्ड सेंचुरी साहिबगंज, पलामू टाइगर रिजर्व, तिलैया डैम कोडरमा हजारीबाग और तोपचांची डैम धनबाद शामिल है।

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