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एचओडी ने कहा:कोरोना काल की बहाली में विसंगतियां, रामबाबू की कार्यशैली पर हमेशा होता था संदेह

हजारीबागएक महीने पहले
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एचओडी और डिपार्टमेंट के स्टॉप से जानकारी लेते सब इंस्पेक्टर - Money Bhaskar
एचओडी और डिपार्टमेंट के स्टॉप से जानकारी लेते सब इंस्पेक्टर

हजारीबाग मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल से पकड़े गए फर्जी डॉक्टर जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर रामबाबू प्रसाद मामले में सदर थाना के सब इंस्पेक्टर नसीम अंसारी ने जांच शुरू कर दी है। वे फर्जी डॉक्टर की गिरफ्तारी के दूसरे दिन अनुसंधानक ऑर्थो सर्जरी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉक्टर ओपी श्रीवास्तव से फर्जी डॉक्टर के बारे में डिटेल जानकारी ली।

एचओडी का बयान अपनी डायरी के 5 पन्नों में दर्ज किया। इस दौरान एक दर्जन से अधिक सवालों का जवाब एचओडी से मांगा। जितने भी सवाल सामने आए उससे संबंधित दस्तावेज भी मांगा। डिपार्टमेंट में काम करने वाले कर्मियों की सूची कांटेक्ट नंबर भी लिया। हर एक बयानों की क्रॉस चेकिंग को लेकर अलग-अलग पूछताछ की तैयारी शुरू हो गई है।

अनुसंधानक के सवाल से पूरा डिपार्टमेंट घिरता हुआ नजर आ रहा है। प्रमुख रूप से उन पर सवाल उठना तय हो गया है जिन्होंने उसे योगदान कराया था। तब तत्कालीन सुपरिटेंडेंट डॉ एसके सिन्हा थे। डॉक्टरों के दस्तावेज के साथ-साथ सबसे महत्वपूर्ण चीज होता है उनका रजिस्ट्रेशन नंबर। डॉक्टर को 8 जनवरी 2021 को योगदान कराया गया था।

उस समय उसने जो भी दस्तावेज दिए थे उसके रजिस्ट्रेशन नंबर से गूगल में एमसीआई के वेबसाइट पर जाकर महज 5 से 7 मिनट के भीतर सर्च किया जा सकता था लेकिन यह जांच नहीं की गई।

जिनके भी योगदान कराए गए उनके प्रमाण पत्रों की वेरिफिकेशन के लिए संबंधित मेडिकल काउंसिल को भेजा जाता है लेकिन यहां से एक भी चिकित्सकों का प्रमाण पत्र वेरिफिकेशन के लिए नहीं भेजा गया आखिर क्यों? जब मामला सामने आया तो फर्जी डॉक्टर का प्रमाण पत्र जांच के लिए बिहार मेडिकल काउंसिल भेजा गया था ऐसा क्यों हुआ?

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एचओडी डॉक्टर ओपी श्रीवास्तव ने कहा कि जैसे ही मुझे जानकारी मिली मैंने 5 मार्च 2022 को लिखित रूप से उसका हस्ताक्षर लेते हुए यहां से हटा दिया था और इसकी सूचना सुपरिटेंडेंट को दे दी थी। कहा कि शुरू से ही उसके कार्यशैली को लेकर और अज्ञानता को लेकर मुझे संदेह था कुछ भी लिखने पढ़ने उसे नहीं आता है लेकिन जूनियर रेजिडेंट सीखने के लिए होते हैं यह मानकर उन्हें हम लोग सिखा रहे थे।

कहा कि इस तरह की कई गड़बड़ियां हैं। कोरोना काल में चिकित्सक की जरूरत थी जिसको लेकर लोगों को बगैर जांचे परखे बहाल कर दिया गया। सब इंस्पेक्टर ने कहा कि आप के अधीन वह काम कर रहा था।

आपके मुताबिक उसमें चिकित्सक का कोई गुण नहीं दिख रहा था फिर भी पूर्व में जांच की कार्रवाई क्यों नहीं हुई? एचओडी ने कहा कि मैंने अपनी ओर से कार्रवाई में कोई कोताही नहीं बरती है। मैंने जब प्रभार लिया तो मुझे एक पन्ना कागज भी प्रभार में नहीं प्राप्त हुआ मतलब समझ सकते हैं यहां की व्यवस्था क्या थी।

अटेंडेंस रजिस्टर भी है तो मेरे कार्यकाल से है उसके पूर्व का अटेंडेंस लोगों का कहां बनता था कैसे बनाते थे यह मैं नहीं बता सकता। मुझे कुछ भी प्रभार में नहीं मिला।यह भी बताया कि एक और ऐसा डॉक्टर है जो जूनियर रेजिडेंट के तौर पर यहां जनवरी महीने से कार्यरत है।

उसने जो प्रमाण पत्र जमा किए हैं उसमें उसका इंटर्नशिप अक्टूबर 2022 में पूरा हो रहा है। जबकि उसने प्रमाण पत्र 2 जनवरी 2021 को ही निर्गत करा लिया है। इस संबंध में भी मैंने सुपरिटेंडेंट को और उक्त चिकित्सक को जानकारी दिया है। कहा कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है कि पहले डिग्री मिल जाए उसके बाद पढ़ाई पूरी हो।

फर्जी डाॅक्टर रामबाबू ने आउटसोर्स से हटकर डेसिंग वार्ड में एक लड़की कराया था बहाल
रामबाबू के गिरफ्तारी के बाद खुलने लगे हैं कई राज: हॉस्पिटल में वार्ड बॉय ड्रेसर व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की बहाली के लिए आउट सोर्स एजेंसी का टेंडर हुआ है। आउट सोर्स के माध्यम से ही किसी को बहाल किया जाना है। लेकिन जेल भेजा गया फर्जी डॉक्टर ने आउट सोर्स से हटकर एक लड़की को ड्रेसिंग वार्ड में बहाल करा दिया था।

वह किस आधार पर बहाल थी किसके आदेश पर काम कर रही थी और उसे मानदेय कहां से और कितना मिलता था किसी को पता नहीं है। जैसे ही दैनिक भास्कर ने इस मामले को उजागर किया डॉक्टर के साथ उस लड़की ने भी काम छोड़ दिया।

ट्रामा सेंटर के सर्जरी वार्ड में उस लड़की को अवैध तरीके से रखवाने के पीछे उस फर्जी डॉक्टर का क्या मक़सद था यह भी जांच का विषय है। पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है। संबंधित पदाधिकारियों का लिस्ट भी तैयार किया है जिससे बारी-बारी से पूछताछ करने की तैयारी है।​​​​​​​

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