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कॉलेज की दुर्दशा से शिक्षा व्यवस्था पर लगा प्रश्नचिह्न:सिर्फ नामांकन और परीक्षा में ही सिमट गया गिरिडीह कॉलेज, 9500 छात्र पर19 शिक्षक

गिरिडीह2 महीने पहलेलेखक: प्रवीण राय
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गिरिडीह कॉलेज गिरिडीह। - Money Bhaskar
गिरिडीह कॉलेज गिरिडीह।

सरकारी शिक्षा को मजबूत करने को ले सरकार लाख दावे कर ले, लेकिन इसकी हकीकत किसी से छुपी नहीं है। प्राइमरी एजुकेशन हो या फिर हायर एजुकेशन सब की स्थिति खस्ताहाल है। हायर एजुकेशन का हाल ये है कि सिर्फ नामांकन और परीक्षा तक ही छात्र सीमित रह हो गए है। हम बात कर रहे हैं गिरिडीह जिले के सबसे पुराने हायर शिक्षण संस्थान गिरिडीह महाविद्यालय गिरिडीह की। जिसकी स्थापना देश के महान स्वतंत्रता सेनानी सह एकीकृत बिहार के मुख्यमंत्री कृष्ण वल्लभ सहाय ने की थी।

1952 में गिरिडीह के पहले विधायक रहे केबी सहाय ने 1955 में गिरिडीह कॉलेज की स्थापना की थी। लेकिन वर्तमान सरकारी व्यवस्था ने उनके सपनों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। स्थापना के वक्त यहां के लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब उनके बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन वर्तमान में शिक्षकों के अभाव में यह कॉलेज दम तोड़ने लगा है।

आलम ये है कि यहां बच्चे सिर्फ तीन बार कॉलेज जाते हैं, जिसमें एक बार कॉलेज में नामांकन कराने, दूसरी बार परीक्षा फार्म भरने व तीसरी बार परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड लेने के लिए पहुंचते हैं। क्योंकि काॅलेज में शिक्षक नहीं के बराबर हैं, और पढ़ाई होती नहीं है। लिहाजा विद्यार्थी इस कॉलेज में दाखिला लेने के पहले ही माइंड सेट कर लेते हैं कि कोचिंग अथवा ट्यूशन के सहारे ही उन्हें पढ़ाई करनी है।

फिर कॉलेज के माध्यम से परीक्षा देकर डिग्री हासिल कर लेना है। गिरिडीह कॉलेज में वर्तमान में करीब 9500 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन यहां केवल 19 प्रोफेसर हैं। यानि एक शिक्षक पर 500 छात्र-छात्राओं को पढ़ाने की जिम्मेवारी है। जिन बच्चों को जिस विषय की पढ़ाई करनी है उस विषय के शिक्षक ही नहीं हैं। सबसे बुरा हाल गणित व कॉमर्स विषय के बच्चों की है, क्योंकि गणित में यहां 2500 व कॉमर्स में 1500 से अधिक विद्यार्थी हैं, लेकिन दोनों में सिर्फ एक-एक शिक्षक हैं।

इस कॉलेज से पढ़े छात्र बन चुके हैं मुख्यमंत्री व मंत्री

गौरतलब है कि इस कॉलेज से पढ़ाई कर कई छात्र-छात्राएं उच्च पदों पर आसीन हो चुके हैं। कई छात्रों ने राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई, तो कई प्रशासनिक सेवा में उच्च पदों को संभाल रहे हैं। झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, प्रथम शिक्षा मंत्री चंद्रमोहन प्रसाद, प्रथम उद्योग मंत्री डाॅ. रवीन्द्र राय भी गिरिडीह कॉलेज के ही छात्र रहे हैं। लेकिन इधर पिछले ढाई दशक से कॉलेज में छात्रों की संख्या बढ़ने लगी और शिक्षकों की संख्या घटने लगी। अब इस कॉलेज में सिर्फ 19 शिक्षक हैं, जबकि छात्र-छात्राओं की संख्या 9500 के करीब है।

प्रोफेसर की कमी से कॉलेज के छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकार में जा रहा है। लेकिन इस कमी को दूर करने के लिए कॉलेज और विश्वविद्यालय प्रशासन थोड़ी भी गंभीर नहीं है। लंबे संघर्ष के बाद इस कॉलेज में कॉमर्स, अंग्रेजी और गणित में पीजी की पढ़ाई शुरू हुई, लेकिन इसके लिए प्रोफेसर की नियुक्ति नहीं हुई। हाल में ही कई प्रोफेसर सेवानिवृत हुए, लेकिन उनकी जगह किसी की नियुक्ति नहीं हुई।

गणित व कॉमर्स विभाग का सबसे बुरा हाल
इस कॉलेज में गणित और कॉमर्स विभाग का सबसे बुरा हाल है। गणित में कुल 2500 छात्र हैं, लेकिन प्रोफेसर मात्र एक हैं। यही हाल कॉमर्स विषय की है, जिसमें छात्रों की संख्या 1500 है, जबकि प्रोफेसर सिर्फ एक हैं। अभी कॉलेज में सिर्फ 19 प्रोफेसर ही कार्यरत हैं। जबकि पुराने सृजित पदों पर गौर करें तो उसके हिसाब से भी न्यूनतम 48 शिक्षक होनी चाहिए।

डाॅ. समीर सरकार ने कहा- प्रोफेसर के अभाव में नहीं हो पा रही समुचित पढ़ाई
इस बाबत गिरिडीह कॉलेज के प्राचार्य डॉ. समीर सरकार ने बताया कि अधिकांश विभागों में स्वीकृत पद अभी रिक्त है। प्रोफेसर की कमी के कारण बच्चों की समुचित पढ़ाई संभव नहीं हो पा रही है। इस मसले से कई बार विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग को इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है।

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