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भास्कर एक्सक्लूसिव:खोखा में सोन नदी बालू घाट बंदोबस्ती मामले में राज्य खनन निदेशालय की बड़ी कार्रवाई, कई अफसरों-कर्मचारियों पर गिरेगी गाज

गढ़वाएक महीने पहले
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गढ़वा में अवैध बालू लदाई। - Money Bhaskar
गढ़वा में अवैध बालू लदाई।

खोखा सोन नदी बालू घाट की बंदोबस्ती मामले में बड़ी गड़बड़ी सामने आ रही है। जिस खोखा सोन नदी बालू घाट की पूर्वर्ती माइनिंग अधिकारी द्वारा कैंसिलेशन के लिए विभाग/संबंधित अथॉरिटी को पत्राचार कर दिया गया था। इसके बाद भी यह घाट कैसे पुनर्जीवित हो गई और विगत चार मई को आनन फानन में इसकी बंदोबस्ती कर दी गई।

हालांकि खान निदेशक ने खोखा बालू घाट में खनन पर 11 मई को रोक लगा दी है। साथ ही खोखा बालू घाट से संबंधित सारी संचिका राज खनन डिपार्टमेंट ने अपने पास मंगा लिया है। खान निदेशालय द्वारा भास्कर में प्रकाशित खबर पर त्वरित संज्ञान लेते हुए खोखा बालू घाट के संचालन से संबंधित सारी प्रक्रियाओं को स्थगित कर दिया गया है। साथ ही इस संबंध में गढ़वा डीसी से पूरी रिपोर्ट मांगी गई है।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर पर लिया गया संज्ञान, लघु खनिज नियमावली में किया गया था व्यापक संशोधन

पूरी प्रक्रिया जिला माइनिंग विभाग की बड़ी गड़बड़ी की ओर इशारा कर रहा है। जानकारी के अनुसार झारखंड लघु खनिज समानुदान नियमावली 2004 में संशोधन कर मार्च 2017 में झारखंड लघु खनिज नियमावाली 2017 बनाई गई थी। जिसके नियम 9 (1) ( ड०) अनुसार वैसे नदी बालू घाट जिसकी निविदा और एलवाई 2017 की इस नियमावली से पहले की है।

इन सारे पुराने एलवाई वाले बालू घाटों को 2017 की नियमावली के 180 दिनों के अंदर संबंधित अथॉरिटी से पर्यावरणीय क्लीयरेंस ले लेनी थी। वहीं उक्त अवधि के भीतर पूर्व के एलओवाई वाले बालू घाटों की पर्यावरण स्वीकृति नहीं लेने पर घाट का स्वतः कैंसिल हो जाने का प्रावधान है।

ऐसे में खोखा बालू घाट जिसकी 26 जून 2015 की बोली लगी थी और 2015 में एलओआई यानी आशय का प्रपत्र जारी थी। ऐसे में इसके पूर्व के एलवाई के आधार उक्त 180 दिन अवधि की शर्त के अधीन पर्यावरण स्वीकृति ले लेनी थी, जो कि नहीं ले सकी । 2017 के नियमावली के अनुसार उक्त अवधि में स्वीकृति नहीं ले पाने पर उक्त घाट स्वतः कैंसिल हो जानी थी।

ऐसे में उक्त के मद्देनजर पूर्ववर्ती डीएमओ द्वारा भी उक्त शर्त अवधि बीत जाने के बाद उक्त घाट के कैंसिलेशन के संबंध में संबंधित ऑथोरिटी को प्रत्राचार की गई थी। इसी 180 दिन अवधि की उपरोक्त शर्त के अनुसार पुराने एलवाई की करकोमा घाट की भी पर्यावरण स्वीकृति नहीं ले सकने पर घाट कैंसिल हो गई थी।

इधर खोखा सोन नदी घाट की बंदोबस्ती मामले पर विगत 8 मई को दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर पर राज्य माइनिंग विभाग ने संज्ञान लिया और तीन दिन बाद ही बालू घाट में खनन पर 11 मई को रोक लगा दी।

बालू घाट की 30 हेक्टेयर एरिया की लगी थी बोली

उल्लेखनीय है कि खोखा बालू घाट का कोई गंगा कावेरी कंस्ट्रक्शन को खनन पट्टा दिया गया है। विगत 4 मई को गंगा कावेरी कंस्ट्रक्शन के निदेशक प्रवीण कुमार के नाम से बंदोबस्ती रजिस्टर्ड की गई थी। इस घाट के लिए वर्ष 2015 में बोली लगी थी।

गंगा कावेरी कंस्ट्रक्शन द्वारा 26 जून 2015 को हुई ऑक्सन में सबसे अधिक 4 करोड़ 21 लाख रूपए की बोली लगाई गई थी। यहां गौर करने वाली बात है कि करकोमा घाट की भी बोली इसी दिन लगी थी।

2017 की नियमावली के अनुसार पुराने एलवाई के आधार पर 180 दिन की अवधि के भीतर पर्यावरण क्लीयरेंस नहीं प्राप्त कर सकने के कारण जब कोरकोमा घाट कैंसिल हो गई तो उसी प्रकार उपरोक्त नियमों के अधीन उसी दिन की बोली की खोखा सोन नदी बालू घाट भी 180 दिन की तय अवधि के भीतर पर्यावरण स्वीकृति नहीं ले पाने के कारण कैंसिल हो जानी थी। खोखा सोन नदी बालू घाट की 30 हेक्टेयर एरिया की बोली लगी थी।

जिसका पर्यावरण क्लीयरेंस केंद्र से मिलना था। घाट की अवस्थिति, कैमूर वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी, 10 किलोमीटर की परिधि में इको सेंसेटिव जोन, इंटर स्टेट इश्यू आदि को लेकर नियमों के फंस रहे मेजर पेंच के कारण पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिल पा रही थी। हालाकि बाद में इस घाट की एरिया रिवाइज कर 23 हेक्टेयर कर दी गई। अब उक्त घाट की एरिया रिवाइज पर 30 हेक्टेयर से 23 हेक्टेयर क्यों करनी पड़ी यह जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा।

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