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सैकड़ों महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर:दूध उत्पादन के क्षेत्र में चतरा आत्मनिर्भरता होने की राह पर, जिले में इस साल 10% की हुई वृद्धि

चतरा2 महीने पहलेलेखक: जफर परवेज
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दुग्ध संग्रह केंद्र। - Money Bhaskar
दुग्ध संग्रह केंद्र।

जिले के किसान अब दूध उत्पादन उत्पादन के क्षेत्र में भी तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। किसानों के प्रयास से जिले में साल दर साल दूध उत्पादन में वृद्धि हो रही है। अगर यह कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी कि धीरे धीरे यह जिला दूध उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। जिले में पिछले साल की तुलना में इस साल दूध उत्पादन में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पिछले साल जिले में दूध का उत्पादन 105.53 मैट्रिक टन का हुआ था। जबकि इस साल दूध का उत्पादन 116.21 मीट्रिक टन हुआ, जो पिछले साल के तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है। उल्लेखनीय है कि सरकार किसानों की आमदनी दुगुनी करने के उद्देश्य से कई योजनाएं चला रही है।

इनमें एक अनुदानित दर पर किसानों को दुधारु जानवर उपलब्ध कराना भी है। इस योजना का लाभ उठाते हुए किसान खेती बारी के साथ डेयरी फार्म भी चला रहे हैं। अब तो महिलाएं भी डेयरी फार्म चला रही हैं। महिलाओं को सरकार की ओर से 90 प्रतिशत अनुदान पर दो दुधारु गाय देती है। इस योजना का प्रभाव जिले में अब दिखने लगा है।इससे जहां जिले में दूध की जरूरतें पूरी हो रही है, वहीं किसानों की आमदनी भी बढ़ी है।

किसानों के घर- घर जाकर खरीदा जाता है दूध

जिले के किसानों को दूध बेचने में कोई परेशानी ना हो, इसके लिए झारखंड मिल्क फैडरेशन की ओर से वाहन की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा दुग्ध संग्रहण एंव शीतलक केंद्र भी बनाए गए हैं। यह व्यवस्था जिले के दो प्रखंडों में की गई थी। इनमें हंटरगंज और सिमरिया। लेकिन किसी कारण से हंटरगंज में दूध क्रय केंद्र बंद है। इसके कारण उस क्षेत्र के गौ पालकों को दूध बेचने में परेशानी हो रही है ।जबकि सिमरिया केंद्र पर हर दिन 1600 से अधिक लीटर की खरीदारी होती है।

केरल, तमिलनाडु, बिहार, छत्तीसगढ़ की सरकार की तरह झारखंड में भी दुग्ध उत्पादकों को चार से छह रुपया प्रति लीटर बोनस मिले तो दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की हो सकती है। लेकिन झारखंड सरकार की ओर से अब तक ऐसी व्यवस्था नहीं की गई। चतरा के दुग्ध उत्पादक देवा सिंह ने बताया कि गाय को चारा खिलाने में दिक्कतें होती है।इसका असर दूध उत्पादन पर पड़ता है।उन्होंने बताया कि कई राज्य की सरकारें दुग्ध उत्पादकों को बोनस देती है। झारखंड में भी ऐसी व्यवस्था लागू होनी चाहिए।

डॉ शिकोह ​​​​​​​ ने कहा- खुशहाली के लिए किसानों को खेती का साथ अपनाना होगा डेयरी

प्रभारी जिला गव्य पदाधिकारी डॉ0 दाराशिकोह ने बताया कि किसानों का मुख्य स्रोत खेती है।डेयरी फसल उत्पादन के साथ के एक पूरक गतिविधि है,जो किसानों को अतिरिक्त प्रदान करती है। पशुओं के गोबर से खाद मिलती है,जो कृ षि की उत्पादकता को बढाती है। मांग और गैप को पूरा करने के लिए किसानों को पशुपालन अपनाना पड़ेगा। जिससे न केवल मांग की पूर्ति होगी, बल्कि किसान खुशहाल होंगे।

किस साल कितना हुआ दूध उत्पादन
जिला गव्य विकास विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015-16 में 86.88 मैट्रिक टन दूध उत्पादन हुआ था। इसके दूसरे साल दूध उत्पादन में कमी आई थी। वर्ष 2016-17 में घटकर 83.76 मैट्रिक टन हो गई थी। इसके बाद से लगातार जिले में दूध का उत्पादन बढ़ता रहा। वर्ष 2017-18 में 89.39 मैट्रिक टन ,वर्ष 2018-19 में 96.69 मैट्रिक टन, वर्ष 2019-20 में 100.86 मैट्रिक टन,वर्ष 2020-21 में 105.53 मैट्रिक टन एवं वर्ष 2021-22 में 116.21 मैट्रिक टन दूध का उत्पादन हुआ।

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