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मधु कोड़ा ने कहा:झारखंड के एक भी आदिवासी मूलवासी को स्थानीयता के अधिकार से वंचित नहीं किया जाए

चाईबासा2 महीने पहले
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14 सितंबर को झारखंड सरकार ने मंत्रिपरिषद् द्वारा स्थानीय निवासी परिभाषा हेतु विधेयक की स्वीकृत प्रस्ताव में विसंगतियों के संदर्भ में सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। पत्र में ध्यानाकृष्ठ करते हुए कहा कि झारखण्ड राज्य सरकार मंत्रिमंडल ने राज्य के निवासियों को स्थानीयता परिभाषित करने के उद्देश्य से मंत्रिपरिषद् में कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ज्ञापांक-14 स्थानीय नीति के बावत प्रस्ताव मंत्रिपरिषद् की स्वीकृति प्राप्त करने के लिए प्रस्तुत किया गया और इस प्रस्ताव को झारखण्ड मंत्रिपरिषद् ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में स्वीकृति दे दी। इसमें भूमिहीन के मामलों में स्थानीय निवासी पहचान संबंधित ग्रामसभा की कृत्य शक्ति, कर्त्तव्य संबंधित विषय स्पष्ट नहीं है।

आगे पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने कहा कि झारखंड के एक भी आदिवासी मूलवासी को अपने स्थानीयता के अधिकार से वंचित नहीं होना पड़े, इसके लिए निम्नलिखित सुझाव हैं : 1. झारखण्ड मंत्रिपरिषद् द्वारा पारित स्थानीय नीति विधेयक प्रस्ताव में खतियान के कर्ट ऑफ वर्ष 1932 को माना गया है।

इस प्रस्ताव में खतियान के कार्ट ऑफ वर्ष को विलोपित कर केवल खातियान आधारित स्थानीयता को दर्ज किया जाए। 2. राज्य सरकार द्वारा लाए गए स्थानीय नीति विधेयक प्रस्ताव में ग्राम सभा को संवैधानिक, अधिनियमित, नियम रूप से ग्राम सभा की कृत्य शक्ति, कर्त्तव्यों एवं जिम्मेदारी को सुस्पष्ट परिभाषित किया जाए। इससे लोगों को प्रस्ताव के बारे में समझने में आसानी होगी।

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