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फिल्म महोत्सव:आदिवासी संस्कृति केंद्र में पहले दिन फिल्म ‘चेन्टेई खियमियुगन’ में दिखी नागालैंड की लुप्त होती पारंपरिक फसलों की चिंता

जमशेदपुर2 महीने पहले
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फिल्म महोत्सव का शुभारंभ करते अतिथि। - Money Bhaskar
फिल्म महोत्सव का शुभारंभ करते अतिथि।

टाटा स्टील फाउंडेशन (टीएसएफ) द्वारा संचालित एक राष्ट्रीय स्तर के फिल्म महोत्सव समुदाय के साथ का पहला दिन सिनेमा, स्वदेशी संस्कृति के प्रसारण और संरक्षण का प्रतिबिंब विषय पर विचार-विमर्श के साथ शुरू हुआl ट्राइबल कल्चर सोसाइटी, सोनारी में रविवार को विभिन्न फिल्मों का प्रदर्शन किया गयाl

फिल्म स्ट्रेंथ इन डायवर्सिटी- स्ट्रेस रेसिस्टेंट क्रॉप्स ऑफ नागालैंड द्वारा बनायी गयी चेन्टेई खियमियुगन अपने नाम के अनुरूप हैl फिल्म में नागालैंड की तेजी से खत्म हो रही पारंपरिक फसल पद्धतियों को दिखाया गया हैl जहां लेंस फिल्म निर्माता की दादी की रोजमर्रा की फसल गतिविधियों के साथ चलता हैl

वहीं जैविक खेती पर ध्यान केंद्रित किया जाता हैl आदिवासी समुदायों के भीतर, जबकि लिखित दस्तावेज विरल हैं, वीडियो और रील सबसे उपयुक्त रूप हैंl दो अन्य फिल्में भी दिखाई गयी. वॉयस ऑफ तीस्ता- सिक्किम की मिंकेट लेप्चा की फिल्म हाइड्रो टेक्नोलॉजी के उभरते रुझानों और स्रोत से निहित मिनी और मेगा हाइडल परियोजनाओं के रूप में उनकी अभिव्यक्तियों के साथ मानव स्वयं और समुदायों के गुस्से, अनुकूलन और सामंजस्य की आवाजों को पकड़ती है और दर्शाती हैl

इसके अलावे अन्य फिल्मों का भी प्रदर्शन किया गयाl फेस्टिवल 9 तक चलेगाl इस अवसर टाटा स्टील फाउंडेशन के सीईओ सौरव रॉय ने कार्यक्रम को पारंपरिक प्रथाओं के संरक्षण और समुदायों को प्रभावित करने वाले विषयों के बारे में बोलने के सबसे अनुकूल साधनों में से एक के रूप में पेश कियाl

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