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हिमाचल प्रदेश में तूफान से बर्बाद हुआ सेब:बागवानी विभाग ने बुलाई बैठक; इश्योरेंस कंपनियों से पूरा मुआवजा दिलाने की तैयारी

शिमला2 महीने पहले
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शिला के देहा-बसलन में तूफान से झड़ गए सेब के दानें। - Money Bhaskar
शिला के देहा-बसलन में तूफान से झड़ गए सेब के दानें।

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिला में तूफान ने सेब बागवानों पर कहर बरपाया है। तूफान से कई क्षेत्रों में बागवानों को लाखों रुपए का नुकसान पहुंचा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बागवानों को उचित मुआवजा दिलाने के मकसद से बागवानी विभाग ने 22 जून को प्रदेशभर के बागवानों और बीमा कंपनियों की बैठक बुलाई है।

इस बैठक में बीमा कंपनियों को निर्देश दिए जाएंगे कि बागवानों को नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए, क्योंकि प्रदेश में अब तक फसल बीमा योजना के नाम पर बागवानों के साथ धोखाधड़ी होती रही है। बीमा कंपनियों की मनमानी पर बागवानी महकमा भी अंकुश नहीं लगा पाया है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

तूफान के बाद पौधे के नीचे झड़े हुए सेब के दाने
तूफान के बाद पौधे के नीचे झड़े हुए सेब के दाने

अब तक योजना का लाभ बागवानों को कम और बीमा कंपनियों को ज्यादा हो रहा है। इस मसले को विपक्षी विधायक भी विधानसभा में कई बार जोरदार ढंग से उठा चुके हैं। इसे देखते हुए ही बागवानों और विभिन्न बागवानी संघों के पदाधिकारियों की मांग पर विभाग ने यह विशेष बैठक बुलाई है।

इन क्षेत्रों में तूफान से हुआ नुकसान

सेब बाहुल क्षेत्र ठियोग, देहा बलसन, जुब्बल कोटखाई, नारकंडा, रोहड़ू की 12 से अधिक पंचायतों में रविवार देर शाम आए तूफान ने खूब तबाही मचाई है। इससे सेब झड़कर जमींदोज हो गया है। प्रदेश का बागवान पहले ही सूखे की मार झेल रहा है। अब तूफान ने रही सही कसर पूरी कर दी है।

सेब झड़ने के बागवानों को हुआ लाखों रुपए का नुकसान।
सेब झड़ने के बागवानों को हुआ लाखों रुपए का नुकसान।

बागवानों को उचित मुआवजा देने का बनाया जाएगा दबाव: सिंघा

ठियोग के विधायक राकेश सिंघा ने बताया कि 22 जून की बैठक में बागवानों को उचित मुआवजा दिलाने को दबाव बनाया जाएगा। जिन क्षेत्रों में तूफान ने तबाही मचाई है, बीमा कंपनियों को उन क्षेत्रों में जाकर नुकसान का आंकलन करना होगा। जिन बागवानों ने फसल का बीमा नहीं करवा रखा, उनके लिए सरकार से उचित मुआवजे की मांग की जाएगी।

जिन्होंने करवा रखा बीमा, वह मुआवजे के पात्र

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिन बागवानों ने अपनी फसल को पहले ही बीमित करवा रखा है, वह किसान मुआवजे के लिए पात्र हैं। इसके लिए 50 प्रतिशत प्रीमियम राशि बागवान खुद भरता है, जबकि 25 प्रतिशत केंद्र सरकार और 25 प्रतिशत प्रीमियम राज्य सरकार देती है।