पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX59037.18-0.72 %
  • NIFTY17617.15-0.79 %
  • GOLD(MCX 10 GM)48458-0.16 %
  • SILVER(MCX 1 KG)646560.47 %

जींद में मनाई चौधरी घासीराम नैन की चौथी पुण्यतिथि:श्रद्धांजलि देने बद्दोवाल टोल पर चल रहे धरने में पहुंचे नरेश टिकैत समेत अन्य बड़े किसान नेता

रोहतक4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
चौधरी घासीराम नैन (फाइल फोटो) - Money Bhaskar
चौधरी घासीराम नैन (फाइल फोटो)

हरियाणा के जींद जिले के नरवाना में सोमवार को चौधरी घासीराम नैन की चौथी पुण्यतिथि मनाई गई। उनकी पुण्यतिथि पर बद्दोवाल टोल पर चल रहे किसानों के धरना स्थल पर श्रद्धांजलि सभा की गई। इसमें नरेश टिकैत समेत बड़े किसान नेता शामिल हुए।

गौरतलब है कि हरियाणा के बड़े किसान नेता रहे चौधरी घासीराम नैन ने हरियाणा के तीनों लाल यानी भजन लाल, बंसी लाल और देवीलाल की सरकार में फसलों के सही रेट दिलाने और बिजली बिलों को लेकर आंदोलन किए। अपने आंदोलनों के माध्यम से नैन ने कई बार सरकारों को किसानों की मांगे मानने पर मजबूर किया।

घासीराम नैन के संघर्ष के साथी रहे कैथल जिले के दुदवा गांव के जियालाल ने बताया कि घासीराम नैन नरम स्वभाव के व्यक्ति थे और कभी गुस्सा नहीं होते थे। वह किसानो की हक की लड़ाई लड़ते हुए कई बार जेल भी गए। ओमप्रकाश चौटाला की सरकार में हुए आंदोलन में किसानों के बिजली बिल माफ कराने के लिए नैन काफी सक्रिय रहे थे। बिजली बिलों को लेकर ही साल 2002 में कंडेला कांड हुआ जिसमें कई किसान मारे गए।

तहसीलदार की नौकरी छोड़ करने लगे थे खेती-बाड़ी

जियालाल बताते हैं कि घासीराम पढ़े- लिखे थे और पढ़ाई पूरी करने के बाद वह हसीलदार लग गए थे। हालांकि कुछ ही समय बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और गांव में आकर खेती करने लगे। नरवाना में उनकी पशुओं की डेयरी भी थी। 1975 में बंसीलाल सरकार में किसानों को गेहूं घर में रखने के बजाय सरकार को देना होता था। घासीराम ने गेहूं बेचने से इनकार कर दिया। प्रशासन ने बार-बार गेहूं बेचने के लिए दबाव बनाया तो नैन मंडी में गेहूं बेचने गए। वहां उनके गेहूं को रिजेक्ट कर दिया गया। यह देखकर उन्हें महसूस हुआ कि अकेला व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता इसलिए किसानों को एकजुट कर यूनियन बनानी चाहिए जो किसानों की आवाज उठाए। 1980 में उनके प्रयासों से हैदराबाद में एक कार्यक्रम हुआ, जिसमें देशभर के किसान संगठनों को बुलाया गया और भारतीय किसान यूनियन का गठन किया गया। 1985 में नैन भारतीय किसान यूनियन के हरियाणा के अध्यक्ष बने।

स्वामीनाथन आयोग रिपोर्ट लागू कराने के लिए भी किया आंदोलन

स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करवाने और किसानों को फसलों की लागत मूल्य के साथ 50 फीसदी लाभ की मांग को लेकर घासीराम ने हुड्डा सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान भी आंदोलन किया। वह अनशन पर बैठ गए तो रोहतक के तत्कालीन कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा और नवीन जिंदल के साथ साथ हरियाणा के तत्कालीन मंत्री रणदीप सुरजेवाला उनसे मिले। तीनों ने संसद में किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए आवाज उठाने का आश्वासन देते हुए अनशन समाप्त करवाया। बाद में दीपेंद्र हुड्डा ने संसद में यह मांग उठाई भी। हालंकि यह बात अलग है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू नहीं किया गया। फसलों पर लाभकारी मूल्य देने की मांग किसानों की अब भी जारी है।

खबरें और भी हैं...