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लखीमपुर हत्याकांड बरसी पर किसानों का प्रदर्शन:मिनी सचिवालय के बाहर फूंका केंद्रीय गृह राज्य मंत्री का पुतला; बोले- दर्ज केसों को वापस लें

पानीपत2 महीने पहले
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केंद्रीय राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी का पुतला फूंकते किसान। - Money Bhaskar
केंद्रीय राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी का पुतला फूंकते किसान।

हरियाणा के पानीपत शहर में लघु सचिवालय के सामने पुल के नीचे लखीमपुर हत्याकांड की पहली बरसी पर किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन, संयुक्त किसान मोर्चा, तालमेल कमेटी से जुड़े किसानों ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी का पुतला फूंका।

किसानों ने यहां नारेबाजी करते हुए DC पानीपत सुशील सारवान के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। किसानों ने मांग रखी है कि लखीमपुर खीरी हत्याकांड के मुख्य आरोपी अजय मिश्र टेनी को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के पद से बर्खास्त किया जाए।

साथ ही उस पर आपराधिक मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किया जाए। किसानों की जेल से रिहाई करवाई जाए। उनके ऊपर लगाए गए झूठे केस वापस हो।

डीसी सुशील सारवान को ज्ञापन सौंपते किसान।
डीसी सुशील सारवान को ज्ञापन सौंपते किसान।

पिछले साल आज ही के दिन हुई थी घटना

गौरतलब है कि पिछले साल आज ही के दिन तिकोनिया, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश में शांतिपूर्ण आंदोलन कर वापस लौट रहे किसानों पर गाड़ी चढ़ा दी थी। इस घटना में चार किसान और एक पत्रकार की मौत हो गई थी। 13 से अधिक किसान जख्मी हुए थे।

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा कि किसानों के अंतिम संस्कार के दौरान किसान नेताओं के साथ सरकार का कुछ मांगों पर समझौता हुआ था, लेकिन उन मांगों पर न तो केंद्र सरकार ने और न ही राज्य सरकार ने कोई ध्यान दिया।

केंद्रीय राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी का पुतला ले जाते किसान।
केंद्रीय राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी का पुतला ले जाते किसान।

आजादी के 75 साल पूरे होने पर लखीमपुर महापड़ाव में भी इन मांगों को दोहराया गया, तब जिला प्रशासन ने अगस्त के अंत तक राज्य सरकार से बैठक कराने का वादा भी किया था, लेकिन आज तक मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार को या उस समझौते में शामिल अधिकारियों को किसान नेताओं के साथ मीटिंग करने की फुर्सत नहीं मिली।

ये रखी मुख्य मांगें

- अजय मिश्र टेनी को मंत्रिमंडल से तत्काल बर्खास्त किया जाए। उसे तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए।

- जेल में बंद किसानों की तत्काल रिहाई और दर्ज केसों की वापसी हो।

- उस घटना के दौरान मारे गए 5 किसानों के अंतिम संस्कार के दौरान पुलिस अधिकारियों की बातचीत हुई थी कि मामले में पुलिस किसानों को गिरफ्तार नहीं करेगी। जिन किसानों का नाम हमलावरों ने हत्या करने में लिखवाया है, उन्हें धारा 304 ए के तहत आरोपी बनाकर उन्हें तुरंत जमानत देगी। आश्वासनों के विपरीत उनके चार साथियों को धारा 302 के तहत जेल में डाला हुआ है। उन्हें दिए गए आश्वासन के दौरान कार्रवाई की जाए।

- मृतक किसानों और घायलों के परिवारों को आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी दी जाने का वायदा पूरा किया जाए।