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पुलिसवालों के बच्चाें को NO ADMISSION:हरियाणा पुलिस और DAV पुलिस पब्लिक स्कूल में ठनी, DGP ने मांगी रिपोर्ट

अमन वर्मा/ पानीपत3 महीने पहले
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डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल। - Money Bhaskar
डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल।

हरियाणा पुलिस और DAV पुलिस पब्लिक स्कूल के बीच इन दिनों किसी बात को लेकर ठनी हुई है। जो स्कूल स्पेशल पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए बनाए गए हैं, उनमें आज स्थिति यह है कि इन्हीं स्कूलों में पुलिसकर्मियों के बच्चों को एडमिशन नहीं दिया जा रहा है। कारण फिलहाल अज्ञात है।

प्रदेश भर से लगातार यह समस्या सामने आने के बाद डीजीपी हरकत में आ गए। उन्होंने सभी जिलों के एसपी को आदेश दिए हैं कि अगले एक सप्ताह के भीतर उन पुलिसकर्मियों की कारण सहित रिपोर्ट दी जाए, जिनके बच्चों को स्कूल में एडमिशन नहीं दिया जा रहा है।

एसपी पानीपत द्वारा जारी आदेश।
एसपी पानीपत द्वारा जारी आदेश।

डीजीपी ने 22 को व एसपी ने 24 को जारी किए आदेश

पानीपत एसपी शशांक कुमार सावन द्वारा जारी आदेश पत्र में लिखा गया है कि 22 जून 2022 को DGP कार्यालय से एक पत्र जारी हुआ है, जिसमें DAV पुलिस पब्लिक स्कूलों के द्वारा पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बच्चों को दाखिला देने से मना करने के बारे में सूचना मांगी गई है।

एसपी ने आदेश दिए कि उपरोक्त विषय के संबंध में सभी को निर्देश दिए जाते हैं कि सभी अपने कार्य क्षेत्र में तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अवगत कराएं कि यदि स्थानीय डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल के द्वारा किसी भी पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी के बच्चों को दाखिला देने से मना किया जाता है तो संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी एक सप्ताह के भीतर-भीतर इस कार्यालय में तैनात भलाई निरीक्षण को लिखित में कारण सहित अपनी रिपोर्ट देंगे, ताकि रिपोर्ट DGP को समय पर भेजकर सूचना उपलब्ध करवाई जा सके।

रिटायर्ड डीजीपी बीएस संधू।
रिटायर्ड डीजीपी बीएस संधू।

रिटायर्ड डीजीपी संधू ने स्कूल बनाने का किया था प्लान

करीब 2 माह पहले दैनिक भास्कर को दिए इंटव्यू में रिटायर्ड डीजीपी बीएस संधू ने बताया था कि बात 1994-95 की है, जब मैं रोहतक से एसपी पद से ट्रांसफर होकर अंबाला आया था। बेटे का दूसरी कक्षा में एडमिशन करवाना था। मैं कैंट में कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल गया। उसी साल इस स्कूल में लड़कों के दाखिले बंद करके सिर्फ लड़कियों को दिए गए थे।

मुझे महसूस हुआ कि जब आईपीएस अफसर होते हुए मेरे बच्चे को एडमिशन नहीं मिला तो हमारे सिपाही-थानेदार को अपने बच्चों को एडमिशन करवाने में कितनी मुश्किल होती होगी। तब पुलिस कर्मचारियों के बच्चों के लिए पुलिस लाइन में ही स्कूल बनाने का प्लान किया, ताकि पुलिस कर्मचारियों की टेंशन खत्म हो सके। उस समय प्रदेश के डीजीपी लक्ष्मण दास थे और डीआईजी आरएस दलाल हुआ करते थे। उस दौरान डीजीपी लेवल पर ही स्कूल बनाने की परमिशन मिल गई थी।

डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल की खासियतें

1995-1996 में 116 विद्यार्थियों, 10 टीचर व 12 कमरों के साथ स्कूल शुरू किया गया। पुलिस व पब्लिक के संयुक्त सहयोग से 30 लाख खर्च करक स्कूल शुरू हुआ। मैं अंबाला में 2 साल से ज्यादा रहा। इसके बाद धीरे-धीरे प्रदेश के अन्य जिलों में भी डीएवी स्कूल बनने लगे। सरकार ने फैसला लिया तो 2017 तक प्रदेश के 20 जिलों में डीएवी स्कूल बन गए थे।

डीएवी स्कूल की खास बात यह है कि प्रदेशभर के सभी जिलों में एक ही यूनिफार्म, किताबें व फीस स्ट्रक्चर है। पुलिस कर्मचारियों के बच्चों को 50 प्रतिशत छूट भी है। पुलिस कर्मचारी ट्रांसफर होकर प्रदेश के किसी भी जिले में चला जाए, बच्चे को एडमिशन दिलाने में कोई दिक्कत नहीं होती। क्योंकि वह किसी भी महीने में वहां जाएगा तो उसके बच्चे का दाखिला स्कूल में होगा।

सिलेब्स भी वहीं से शुरू होगा। डीएवी संस्थान की प्रधान पूनम सूरी हैं। अभी मैं उनके एडवाइजर के तौर पर बिना किसी चार्जिस पुलिस व स्कूलों के साथ कॉर्डिनेशन का काम देखता हूं।