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हाईकोर्ट से अशोक खेमका को राहत:वेयरहाउसिंग में नियुक्तियों में गड़बड़ी की जांच में सहयोग करने के निर्देश, सरकार से मांगा जवाब

चंडीगढ़एक महीने पहले
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हरियाणा के दो चर्चित आईएएस अफसरों अशोक खेमका और संजीव वर्मा के बीच चल रहा विवाद एक फिर ताजा हो गया है। खेमका अपने खिलाफ दर्ज की गई पुलिस एफआईआर के विरोध में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार और संजीव वर्मा से जवाब तलब किया है। साथ ही कोर्ट ने खेमका की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं।

अशोक ​खेमका पर हरियाणा वेयरहाउसिंग का एमडी रहते हुए दो मैनेजरों की नियुक्ति में अनियमितताएं बरतने का आरोप है। आईएएस अफसर और हरियाणा वेयरहाउसिंग के मौजूदा एमडी संजीव वर्मा ने इसी मामले में खेमका के खिलाफ ​​​​​पंचकूला सेक्टर-5 के पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है।

कमेटी रद्द कर चुकी खेमका की नियुक्ति

हरियाणा वेयर हाउसिंग के मौजूदा एमडी संजीव वर्मा ने वर्ष 2010 में अशोक खेमका पर विभाग में एमडी पद पर रहते हुए 2 मैनेजरों की नियुक्ति में अनियमितताएं बरतने के आरोप लगाए। मामले की जांच के बाद कमेटी ने दोनों मैनेजरों की नियुक्ति रद्द कर दी। एक हफ्ते पहले इसी मामले में संजीव वर्मा ने आईएएस अफसर अशोक खेमका के खिलाफ पंचकूला सेक्टर-5 थाने में एफआईआर दर्ज करने की शिकायत दी।

दूसरी ओर आईएएस अफसर अशोक खेमका ने आर्काइव डिपार्टमेंट में वाहन के मिसयूज की शिकायत से जुड़े पुराने मामले में संजीव वर्मा के खिलाफ शिकायत दे दी। हालांकि पंचकूला पुलिस ने खेमका की शिकायत पर कोई कारवाई नहीं की। इस पर ​​​​​​​अशोक खेमका ने हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज को SMS करके पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद विज खुद खेमका के साथ पंचकूला डीसीपी कार्यालय पहुंचे और डीसीपी को खेमका की शिकायत पर मामला दर्ज करने के आदेश दिए।

इस बीच आईएएस अफसर संजीव वर्मा की ओर से दर्ज करवाई गई FIR से जुड़े मामले में खेमका ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि स्क्रीनिंग कमेटी ने मैनेजर ग्रेड 1 के पात्रों को शॉर्टलिस्ट किया था। उन्होंने कमेटी की सिफारिश में कोई बदलाव नहीं किया। कमेटी की ओर से शार्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के इंटरव्यू कार्यकारी समिति ने लिए। उन नियुक्तियों में जनरल और अनारक्षित वर्ग के लिए कोटा नहीं बनता था इसलिए अंक ज्यादा होने पर सभी को जनरल वर्ग को रखा गया। यह फैसला भी कार्यकारी समिति ने लिया।

खेमका के अनुसार, इन्हीं नियुक्तियों में सिलेक्ट न होने वाले एक कैंडिडेट, रविंद्र के पिता के खिलाफ वह पहले एक मामले में जांच कर चुके थे इसलिए रविंद्र उनसे रंजिश रखता है।

इसी बीच संजीव वर्मा ने पंचकूला थाने में पहली शिकायत के संबंध में एक ओर शिकायत दे दी। मामला बढ़ता देखकर हरियाणा के होम मिनिस्टर अनिल विज खुद एक्टिव हुए और मामला खत्म कराने के लिए दोनों अधिकारियों को बारी-बारी अपने पास बुलाया। तब से अब तक इस प्रकरण पर खेमका ने चुप्पी साध रखी है।

रिकॉर्ड सरकार के कब्जे में

कुछ दिन पहले खेमका ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) सुमित्रा मिश्रा को पत्र लिखकर भर्ती से जुड़े रिकॉर्ड से छेड़छाड़ होने की आंशका जताई थी। उन्होंने मांग कि भर्ती से जुड़ा रिकॉर्ड ACS अपनी कस्टडी में लें। ACS सुमित्रा मिश्रा ने खेमका के इस पत्र के आधार पर हरियाणा वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन के एमडी संजीव वर्मा से रिकॉर्ड मांगा। एमडी संजीव वर्मा ने इस पत्र का जवाब देते हुए इस बात पर आपत्ति जताई कि आईएएस अफसर अशोक खेमका की ओर से रिकॉर्ड कस्टडी में लेने की मांग करना उचित नहीं है क्योंकि वह इस मामले में आरोपी हैं। अगर आरोपी की मांग पर रिकॉर्ड को ताले में लगाकर रख दिया गया तो मामले की जांच कैसे हो पाएगी। फिर भी वे पत्र के आधार पर पूरा रिकॉर्ड विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी को सौंप रहे हैं।

संजीव वर्मा ने 9 मई को इसी पत्र में ACS सुमित्रा मिश्रा से अनुरोध किया कि उन और अशोक खेमका पर दर्ज दोनों मामलों की जांच सीबीआई से करवाएं, ताकि पूरे मामले की सच्चाई का पता चल सके।