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बसताड़ा टोल पर किसानों का जश्न:संसद में खेती कानून वापस लेने का बिल पास होने से खुशी, आंदोलन में जान गंवाने वालों को देंगे श्रद्धांजलि

करनाल2 महीने पहले
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कार्यक्रम में प्रस्तुति देते ही कलाकार। - Money Bhaskar
कार्यक्रम में प्रस्तुति देते ही कलाकार।

हरियाणा के जिले करनाल के बसताड़ा टोल पर सोमवार शाम को किसान इकट्‌ठा हुए हैं। संसद के दोनों सदनों में खेती कानून वापस लेने का बिल पास होने पर कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। रागिनी के साथ रंगारंग कार्यक्रम का आगाज हुआ। 4 लड़कियां रागिनी के साथ नाच-गाने की प्रस्तुत दी। जिन्होंने हिंदी, पंजाबी व हरियाणवी गीतों पर नाचते हुए किसानों का मनोरंजन किया। हालांकि चर्चा है कि आंदोलन में किसानों की भीड़ को बढ़ाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। एक तरफ तो मृतक आंदोलनकारियों को श्रद्धांजली देने की बात की जा रही है वहीं दूसरी तरफ महिलाओं से ठुमके लगवाकर ठहाके लगाए जा रहे हैं। दोनों सदन में कानून वापस लिए जाने पर मिठाई बांटी।

किसानों ने कहा कि एक साल से 3 कृषि काले कानून की लड़ाई में आज असली जीत हुई है। दिल्ली सीमा पर एक साल से किसानों का आंदोलन चल रहा है। उसी समय से बसताडा टोल पर भी आंदोलन जारी है। टोल को फ्री करवा रखा है। किसी भी प्रकार की गतिविधि होने पर यहां पर किसान अपनी उपस्थिति जरूर दर्ज करवाते हैं। 27 नवंबर को पराली जलाने पर बने एक्ट को हटाने पर भी बसताड़ा टोल पर किसानों ने इकट्ठे होकर कार्यक्रम आयोजित किया था।

कार्यक्रम में मौजूद किसान प्रस्तुति का आनंद लेते हुए।
कार्यक्रम में मौजूद किसान प्रस्तुति का आनंद लेते हुए।

कलाकार हरियाणवी संस्कृति को दे रहे बढ़ावा

चढुनी भाकियू के आईटी सैल जिला प्रधान बहादुर सिंह मैहला का कहना है कि ये डांस नहीं है। ये संस्कृतिक कार्यक्रम है। ये कलाकार शुरू से ही हमारा सहयोग कर रहे हैं। शुरूआत में कलाकार उनके पास आए थे और उन्होंने पूछा था कि वो किस प्रकार से सहयोग कर सकते हैं तो जवाब में बुजुर्ग किसानों ने कहा कि वो अपना रंगारंग कार्यक्रम को समय समय पर यहां पर करें। ताकि आंदोलन में उनका सहयोग हो और बुजुर्गों का टाइम पास हो जाए। इसको नाच-गाना नहीं कह सकते। ये हरियाणा के कल्चर को दर्शाता है। ज्यादातर हरियाणवी संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं।

सीएम के कार्यक्रम में हुआ था लाठीचार्ज
28 अगस्त को करनाल में सीएम मनोहर लाल की अध्यक्षता में भाजपा की समीक्षा बैठक थी। इस दौरान बसताड़ा टोल पर बैठे किसानों ने प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड़ को काले झंडे दिखाकर विरोध किया। कुछ समय के बाद किसान भाजपा की बैठक का विरोध जताने के लिए शहर के तरफ बढ़ने लगे। इस दौरान पुलिस के साथ तकरार हो गई। पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज शुरू कर दिया। अगले दिन 29 को रायपुर जाटान निवासी एक किसान सुशील काजल की मौत हो गई।

किसानों ने सुशील की मौत का कारण लाठीचार्ज की चोटों को बताया। घरौंडा की अनाज मंडी में महापंचायत का आयोजन कर निर्णय लिया कि वे 7 सितंबर से सचिवालय का घेराव करेंगे। 11 सितंबर को एसीएस के नेतृत्व में किसानों की बातचीत पर समझौता हुआ। मृतक के परिवार से दो सदस्याें को नाैकरी दी जाएगी। मामले की जांच रिटायर्ड जज से होगी। 22 सितंबर को दो नौकरी सुशील काजल के बेटे और पुत्रवधू को दी जा चुकी है। 25 सितंबर को रिटायर्ड जज सोमनाथ अग्रवाल की अध्यक्षता आयोग का गठन किया गया।