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कोरोनाकाल में 600% बढ़ा साइबर क्राइम:NCRB के आंकड़े- बच्चों के खिलाफ 400%, यौन शोषण के 90% मामले

करनालएक महीने पहले
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हरियाणा के जिला करनाल में राजकीय कन्या महाविद्यालय में ‘सोशल मीडिया: समावेश, प्रतिनिधित्व एवं नारी सुरक्षा’ विषय पर कार्यक्रम आयोजित हुआ।

इसमें राजकीय कन्या महाविद्यालय चीका (कैथल) के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ. रवि शंकर ने बताया कि अकसर साइबर क्राइम को वित्तीय जोखिम के साथ जोड़ कर देखा जाता है, लेकिन राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े चौंकाने वाले हैं।

रिकॉर्ड के अनुसार, कोरोना काल में वैश्विक स्तर पर साइबर क्राइम में 600 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं भारतीय परिप्रेक्ष्य में ब्यूरो की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के खिलाफ साइबर क्राइम के मामलों में लगभग 400 फीसदी बढ़त हुई है।

लगभग 90 प्रतिशत मामले यौन कृत्यों से जुड़े हैं। साइबर मामलों के विशेषज्ञ एवं न्यायविद डॉ. शंकर ने बताया कि बच्चों के साथ साइबर क्राइम की घटनाएं बढ़ी हैं। NCRB के आंकड़ों के अनुसार गत वर्ष बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन अपराधों के कुल 842 मामले सामने आए।

कार्यक्रम में मौजूद छात्राएं।
कार्यक्रम में मौजूद छात्राएं।

साइबर क्राइम में UP प्रथम

डॉ. रवि शंकर ने बताया कि अधिकतर मामले बच्चों को यौन कृत्यों में चित्रित करने वाली सामग्री को प्रकाशित करने या प्रसारित करने से संबंधित रहे। इन हालात में नारी सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा होना स्वाभाविक है। हमारा पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश इन मामलों में प्रथम स्थान पर है, जबकि कर्नाटक, महाराष्ट्र और केरल दूसरे व तीसरे स्थान पर हैं।

इंटरनेट पर अधिक समय बिताने के कारण बच्चे विशेष रूप से ऑनलाइन यौन शोषण, अश्लील संदेशों का आदान-प्रदान, पोर्नोग्राफी के संपर्क में आना, यौन शोषण सामग्री, साइबर धमकी तथा ऑनलाइन उत्पीड़न जैसे कई गोपनीयता संबंधी जोखिमों का सामना कर रहे हैं। इन सब गतिविधियों के चलते ही बच्चों के खिलाफ सर्वाधिक अपराध हो रहे हैं।

कार्यक्रम में मौजूद स्टाफ।
कार्यक्रम में मौजूद स्टाफ।

ऐसे कार्यक्रमों से आएगी जागरुकता

आवश्यकता है कि माता-पिता और शिक्षण संस्थान मिलकर बच्चों को जागरूक करें। डॉ. शंकर ने छात्राओं को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की विभिन्न धाराओं से भी अवगत करवाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. सरिता कुमार ने की। उन्होंने बताया कि डॉ. शंकर पिछले दो दशक से साइबर अपराध के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं।

छात्राओं को होगा लाभ

महाविद्यालय की कानूनी साक्षरता प्रकोष्ठ की संयोजिका डॉ. शिवाली ने बताया कि इस प्रकार के आयोजनों से छात्राओं का सर्वांगीण विकास होता है।छात्राओं को साइबर अपराध के प्रति जागरूक करने के लिए ही इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। आगे भी इस तरह के व्याख्यान होते रहेंगे।