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स्पाेर्ट्स-मार्टम:विभाग के पास न क्रिकेट ग्राउंड न कोच, रणजी ट्रॉफी तो दूर स्टेट तक नहीं खेल पा रहे खिलाड़ी

अम्बाला2 महीने पहले
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खताैली में प्राइवेट एकेडमी का क्रिकेट ग्राउंड, जहां पिच को बरसात से बचाने के लिए तिरपाल भी रखी है। - Money Bhaskar
खताैली में प्राइवेट एकेडमी का क्रिकेट ग्राउंड, जहां पिच को बरसात से बचाने के लिए तिरपाल भी रखी है।

{कैंट में फुटबाॅल ग्राउंड बनाया तो सिटी स्टेडियम के ग्राउंड का भी फुटबाॅल के लिए हो रहा इस्तेमाल अम्बाला का खेल विभाग कुछेक खेलों तक ही सीमित हो गया है। क्रिकेट सबसे लोकप्रिय खेल है लेकिन इसके लिए विभाग के पास न तो कोच है और न ही ग्राउंड। कैंट के वार हीरोज मेमोरियल स्टेडियम में फुटबाॅल ग्राउंड बनाया जा रहा है और दूसरी तरफ सिटी के सेक्टर-10 स्थित राजीव गांधी के ग्राउंड का इस्तेमाल भी फुटबाॅल के लिए ही हो रहा है। खेल विभाग ने क्रिकेट खेलने वालों के लिए दरवाजे पूरी तरह से बंद कर दिए हैं। जो कसर बची थी वह हुडा के ग्राउंड व कैंट के रेसकोर्स के नजदीक मिलिट्री ग्राउंड में कंस्ट्रक्शन होने से निकल गई।

इन दोनों ग्राउंड का इस्तेमाल क्रिकेट के खिलाड़ी इस्तेमाल कर लिया करते थे। इसी प्रकार दुधला गुलाब मंडी में एक ग्राउंड पर क्रिकेटर खेलने जाते थे लेकिन वहां भी मिलिट्री ने अपनी जमीन पर खुदाई कर दी है। इसके बाद जो विकल्प बचते हैं उसके लिए खिलाड़ियाें को खेलने का पैसा चुकाना पड़ रहा है। पुलिस लाइन के ग्राउंड व डीएवी कॉलेज अम्बाला सिटी के ग्राउंड को इस्तेमाल करने के लिए मैच फीस चुकानी पड़ती है।

दूसरी तरफ कैंट में एसडी कॉलेज का ग्राउंड का इस्तेमाल कॉलेज के खिलाड़ी करते हैं। खेल विभाग से रिटायर हो चुकी क्रिकेट कोच एसडी कॉलेज के मैदान पर बच्चों को प्रशिक्षण दिया करती थीं। इसी प्रकार एमएम यूनिवर्सिटी के ग्राउंड का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी के छात्र करते हैं। किक्रेट की इस स्थिति का असर यह है कि अम्बाला से क्रिकेट के खिलाड़ी रणजी ट्रॉफी तो दूर स्टेट लेवल तक बामुश्किल खेल पाते हैं। पिछले साल डीएवी कॉलेज अम्बाला सिटी के छात्र पार्थ रणजी ट्रॉफी कैंप के लिए सिलेक्ट हुए थे लेकिन टीम में उनका सिलेक्शन नहीं हो पाया। कॉलेज के कई खिलाड़ी इंटर यूनिवर्सिटी खेले हैं लेकिन इसमें खेल विभाग का रत्तीभर भी योगदान नहीं है।

दूसरी तरफ साल 2006 से अम्बाला में बीसीसीआई के सचिव सुरजीत सिंह पंजोखरा का कहना है कि वे बीसीसीआई के शेड्यूल के मुताबिक सिलेक्टर ट्रॉयल लेने के लिए आते हैं। ओपन टूर्नामेंट में सिलेक्शन की जाती है। उनका काम डॉक्यूमेंट देखना है। सुरजीत सिंह का कहना है कि उनके बच्चे इंटर डिस्ट्रिक्ट टूर्नामेंट तक खेले हैं। अब काफी बच्चे दिलचस्पी ले रहे हैं। स्टेट लेवल पर कोई बच्चा काफी समय से नहीं खेला है।

वैभव अरोड़ा हिमाचल की तरफ से रणजी खेल रहे
पहली बार आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर में सिलेक्ट हुए व इस साल पंजाब किंग्स की तरफ से खेले अम्बाला के वैभव अरोड़ा हिमाचल प्रदेश की तरफ से रणजी प्लेयर हैं। अम्बाला में क्रिकेट के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं होने से खेलने के इच्छुक बच्चे ज्यादातर चंडीगढ़ में ही प्रैक्टिस करते हैं।

पूर्व रणजी प्लेयर बोले- मैदान न होना बड़ी दिक्कत

डीएवी कॉलेज के क्रिकेट कोच एवं पूर्व रणजी प्लेयर राजीव राणा के मुताबिक उनके कॉलेज से पढ़ा करनाल का एक अंशुल अंडर-19 क्रिकेट खेला था। स्टेट के लिए भी रमन व राजन आदि कई लड़के खेले हैं। अभी अक्टूबर में कॉलेज में सरकार की तरफ से इंटर कॉलेज क्रिकेट टूर्नामेंट कराया जाएगा। अम्बाला में खेलने के ग्राउंड व कोच की सुविधा मिले तो बच्चे काफी आगे जा सकते हैं।

अम्बाला में क्लब स्तर पर भी काफी खेला जा रहा क्रिकेट, कई प्राइवेट एकेडमी भी चल रहीं
अम्बाला में क्रिकेट के कई क्लब हैं। अम्बाला क्रिकेट क्लब, स्ट्राइकर क्लब, ब्लास्टर क्लब, एवरग्रीन क्लब आदि क्लब क्रिकेट खेलते हैं लेकिन अब इन क्लब के लिए भी ग्राउंड न होने की सूरत में मैच खेलना मुश्किल हो चुका है। खेल विभाग के पास अपना ग्राउंड व कोच नहीं होने से क्रिकेट की प्राइवेट अकेडमी भी चल रही हैं। एक अकेडमी मिशन अस्पताल कांप्लेक्स, एक खतौली व एक मनमोहन नगर में है।

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