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जहरीले पानी का कहर:सायनाइड के डर से 15 साल में उजाड़ हो गया था गांव प्लांट हटते ही बसने लगे लोग, 10 गुना होगी आबादी

सूरत2 महीने पहले
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50 गांव वालों ने सायनाइड प्लांट हटवाने के लिए 10 साल लड़ाई लड़ी, आखिर उनकी जीत हुई। - Money Bhaskar
50 गांव वालों ने सायनाइड प्लांट हटवाने के लिए 10 साल लड़ाई लड़ी, आखिर उनकी जीत हुई।

सूरत शहर से मात्र 13 किमी दूर ओलपाड तालुका के मासमा गाम में सायनाइड का प्लांट बंद होते ही विकास शुरू हो गया है। इस समय यहां रियल एस्टेट के 27 से ज्यादा प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इसमें से एक दर्जन के काम पूरे हो चुके हैं। 2022 में 10 हजार से ज्यादा घर बनकर तैयार हो जाएंगे और आबादी 3 हजार से बढ़कर 30 हजार हो जाएगी। तीन महीने पहले ही इस क्षेत्र में रियल एस्टेट के कारोबार में प्रगति हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण ओलपाड में हिंदुस्तान केमिकल्स नामक कंपनी का सायनाइड प्लांट बंद होना है।

सायनाइट प्लांट के कारण यहां का विकास नहीं हो रहा था। इसे बंद करवाने के लिए यहां के किसानों ने वर्षों तक आंदोलन किया। गुजरात खेडूत समाज, जिसमें 50 से अधिक गांव के लोग शामिल थे। उनके लगातार विरोध के बाद हिन्दुस्तान केमिकल्स कंपनी लिमिटेड ने अपने सायनाइड बनाने वाले प्लांट को बंद कर दिया। हालांकि कंपनी का अन्य प्रोडक्शन चल रहा है।

प्लांट के वेस्ट वाटर से खाड़ी का पानी विषैला हो गया था
सायनाइड कंपनी के वेस्ट वाटर से ग्रामीणों में डर व्याप्त था। प्लांट को बंद करवाने को लेकर एक्टिव रहे ओलपाड के समीर मलेक ने बताया कि कंपनी का वेस्ट वाटर यहां की खाड़ी में जाता था, जिससे खाड़ी की मछलियां मर जाती थीं, पानी पीने वाले जानवर भी मर जाते थे। जमीन खेती के लायक नहीं थी। किसान न तो खेती कर पा रहे थे और न ही पशुपालन। हमारा जीवन दुश्वार हो गया था।

कोई भी गांव आना नहीं चाहता था, यहां के लोग दूसरी जगह बस गए
स्थानीय किसानों का कहना है कि हमने सायनाइड प्लांट बंद कराने के लिए करीब एक दशक तक लड़ाई लड़ी और लगातार विरोध करते रहे। प्रदूषित पानी से स्थानीय निवासियों का स्वास्थ्य भी बिगड़ने लगा था। कोई यहां नहीं आना चाहता था। यहां के कुछ लोग भी दूसरी जगह बस गए। इसलिए यहां की आबादी बढ़ी ही नहीं। लोगों में सायनाइड को लेकर जो भय था, वो अब लगभग खत्म हो गया है।

गांव की 3000 की आबादी अगले एक साल में 30 हजार से ज्यादा हो सकती है
997.19 हैक्टेयर में बसे मासमा गांव के 40 फीसदी एरिया में निर्माण कार्य चल रहा है। कुछ जगह पूरा भी हो चुका है। वर्तमान में गांव की आबादी करीब 3 हजार है। इंडियन विलेज डायरेटरी के अनुसार 2019 में गांव में मात्र 653 घर ही थे। अगले साल के अंत तक मासमा और आसपास के इलाकों में 10 हजार से अधिक घर, बंगले, फार्म हॉउस आदि तैयार हो जाएंगे। जिनमें करीब 30 हजार से ज्याद लोग रह सकेंगे।

हजारों-लाखों रुपए कीमत की जमीन अब करोड़ों की हुई
समीर मलेक ने बताया कि 2005 में मैंने अपनी जमीन दो से ढाई लाख में बेची थी, अब उसकी कीमत एक से डेढ़ करोड़ हो गई है। रियल एस्टेट का काम बहुत तेजी से चल रहा है। जल्द ही पूरा इलाका घनी आबादी में बदल जाएगा। जमीन के दाम तेजी से बढ़े हैं।

कनेक्टिविटी से बढ़ा विकास, बस सेवा से शहर हुआ नजदीक
मासमा और आसपास के इलाके में हाल ही में 5 से ज्यादा स्कूल, 4 कॉलेज, 4 पेट्रोल पंप, 3 सुपर मार्केट, 4 प्राइवेट अस्पताल बनकर तैयार हुए हैं। सूरत शहर से ओलपाड-मासमा की दूसरी महज 13 किमी है। यहां के लिए सीधी पब्लिक बस सेवा उपलब्ध है। यहां से रेलवे स्टेशन की दूरी भी 10 किमी ही है। सूरत शहर से गांव की अच्छी कनेक्टिविटी है।

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