पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Business News
  • Local
  • Gujarat
  • 200 Families In Gujarat Drink Only Rain Water For 20 Years, One Verse Changed Their Thinking; 17 Thousand Wells Made Alive

यहां सिर्फ बारिश का पानी पीते हैं लोग:गुजरात में पालनपुर के 200 परिवार 20 साल से बारिश का पानी सहेज रहे, 17 हजार कुओं को जिंदा किया

पालनपुरएक महीने पहलेलेखक: गौरव तिवारी
  • कॉपी लिंक
पालनपुर के डॉक्टर, शिक्षक, बिल्डर्स सभी घरों में सहेजते हैं बरसाती पानी। - Money Bhaskar
पालनपुर के डॉक्टर, शिक्षक, बिल्डर्स सभी घरों में सहेजते हैं बरसाती पानी।

जलसंकट और सूखे जैसी स्थिति से जूझने वाला उत्तर गुजरात का एक शहर है पालनपुर। स्वाध्याय परिवार से जुड़े 200 परिवार यहां जो करते हैं, वो गुजरात ही नहीं, पूरे देश के लिए मिसाल है। पिछले 20-22 साल से ये परिवार सिर्फ बरसात में जमा किया गया पानी ही पीते हैं। इन 20 वर्षों में किसी ने न टैंकर मंगवाया और न ही कोई फ्रिज का पानी इस्तेमाल करता है।

हर घर ने बरसाती पानी संग्रह करने के लिए तलघर में टंकियां बना रखी हैं। इन टंकियों को साल में सिर्फ एक बार खोला और साफ किया जाता है। भास्कर ने पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए इसका लैब टेस्ट भी कराया। रिपोर्ट में पता चला कि यह पानी पूरी तरह से पीने योग्य है और इसमें PH वैल्यू व TDS भी आसपास के पानी से बेहतर है।

सालाना 30 लाख लीटर पानी जमा करते हैं
दो दशक से पानी सहेज रहे बीएएमएस डॉक्टर महेश अखानी बताते हैं कि पहले उनके पिता इसी तरह पानी संग्रह करते थे। उनका परिवार कई दशकों पहले राजकोट में रहता था। वहां भीषण जलसंकट था। जब उन्होंने गुरूमाता से इस समस्या पर चर्चा की, तो उन्होंने बताया कि गीता में ही इसका निदान छिपा है।

गुरूमाता ने उदाहरण देते हुए कहा कि ऊं कराग्रे वसते लक्ष्मी:, करमध्ये सरस्वती। करमूले च गोविंद: प्रभाते कुरुदर्शनम्। हम रोज सुबह यह श्लोक पढ़ते हैं और पृथ्वी को प्रणाम करते हैं। पृथ्वी हमारी माता है, आकाश लोक से पानी पृथ्वी के लिए आता है पर संरक्षण नहीं होने के कारण वे व्यर्थ हो जाता है।

उसका संरक्षण धरती माता की गोद में किया जाना चाहिए। राजकोट के आस पास के सभी परिवारों ने इस बात को समझा और शुरुआती दौर में करीब 17 हजार से ज्यादा कुएं और छोटे तालाबों को जोड़कर जल संरक्षण का कार्य शुरू किया।

गुरू प्रथा में जिम्मेदारी नई पीढ़ियों को सौंपी
अखानी ने बताया कि मात्र पालनपुर और उसके आस-पास की करीब 1200 परिवार इसी समुदाय के हैं, पर फ्लैट या छोटे घरों में रहने के कारण वे ऐसा नहीं कर पाते। पर जिनके पास जमीन से जुड़ा घर है वे जरूर पानी सहेजते हैं। अखानी इस समुदाय के मुखिया भी हैं, उनके मुताबिक करीब 200 से ज्यादा परिवार 30 लाख लीटर तक पानी सालाना संग्रहित कर लेते हैं।

तिथि देखकर करते हैं पानी का संग्रह
टीचर वसंत ठक्कर ने बताया कि नक्षत्र देखकर हम पानी संग्रह करने का काम करते हैं। बारिश शुरू होते ही हम तैयारी कर लेते हैं। सबसे अच्छा नक्षत्र आद्रा माना जाता है, इस दौरान बारिश नहीं हुई तो मघा, फिर श्लेषा और फिर रोहिणी में भी पानी रख सकते हैं। कोशिश रहती है कि मघा में सबसे ज्यादा पानी संरक्षण किया जाए, यह बढ़िया होता है।