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भास्कर पड़ताल:देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल की बढ़ रही डिमांड, ई-कार तीन साल में 6 गुना और बैटरी नौ साल में 90% सस्ती

नई दिल्ली4 महीने पहलेलेखक: धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया
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वर्तमान समय में ई-वाहनों में बैटरी की कीमत 35 फीसदी है। तकनीकी सुधार और वाहनों की संख्या बढ़ने पर घटकर 16 फीसदी तक आ जाएगी। - Money Bhaskar
वर्तमान समय में ई-वाहनों में बैटरी की कीमत 35 फीसदी है। तकनीकी सुधार और वाहनों की संख्या बढ़ने पर घटकर 16 फीसदी तक आ जाएगी।
  • अभी वाहन की लागत में बैटरी की कीमत 35%, दो साल में 20% तक होगी

प्रदूषण रोकने और वाहनों की प्रति किमी लागत घटाने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल बढ़ रहे हैं। सोसायटी ऑफ मैन्युफेक्चरर्स ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (एसएमईवी) के मुताबिक बीते 3 सालों में ई-कार करीब छह गुना और ई-टू व्हीलर करीब नौ गुना बढ़े हैं। अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बैटरी की लागत है, जो गाड़ी की कीमत का करीब 35% है। हालांकि बीते नौ साल में इसकी लागत 90% तक घटी है। अगले दो से तीन साल में 50% और घट जाएगी। दो साल में देश में बैटरियों का निर्माण भी शुरू हो जाएगा।

2030 में देश में इलेक्ट्रिक बैटरी का मार्केट 300 अरब डॉलर का होगा

नीति आयोग और रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट की स्टडी के अनुसार 2030 में देश में इलेक्ट्रिक बैटरी का मार्केट 300 अरब डॉलर का होगा। अभी ई-वाहनों में बैटरी की कीमत 35% है। तकनीकी सुधार और वाहनों की संख्या बढ़ने पर यह घटकर 16% तक आ जाएगी। देश में 2030 तक 60 हजार मीट्रिक टन लीथियम की जरूरत होगी। नीति आयोग को उम्मीद है कि 2025 तक देश में बिकने वाले नए दो पहिया वाहन इलेक्ट्रिक होंगे। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने बताया, बैटरी की कीमतें 9-10 साल में 90% तक कम हुई हैं।

2030 तक देश के कुल वाहनों में 30% इलेक्ट्रिक होंगे

कुछ वाहनों में लगने वाली बैटरी सौ डॉलर प्रति किलोवॉट ऑवर (केडब्ल्यूएच) तक आ गई है, वैसे औसत कीमत करीब 139 डॉलर प्रति केडब्ल्यूएच है। वहीं, ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने कहा कि 2010 में 1100 डॉलर प्रति केडब्ल्यूएच बैटरी की लागत आती थी। अब घटकर करीब सौ डॉलर के आसपास है। साल 2030 तक देश के कुल वाहनों में 30% इलेक्ट्रिक होंगे। देश में प्रयोग होने वाले कुल पेट्रोलियम प्रोडक्ट का 18% वाहनों में होता है।

ई-वाहन बढ़ेंगे तो देश का इंपोर्ट बिल कम होगा। आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 में कहा गया है कि देश में 2030 तक निजी कारों में ई-व्हीकल की हिस्सेदारी 38%, कमर्शियल कारों में 70%, बसों में 40%, टू-व्हीलर्स और थ्री-व्हीलर्स में 80% हो जाए तो कार्बन उत्सर्जन में 84.6 करोड़ टन और 47.4 करोड़ टन तेल बचत की जा सकती है।

मर्सडीज बेंज के वीपी और सेल्स मार्केटिंग हेड संतोष अय्यर ने कहा, वाहनों की संख्या बढ़ने पर लागत कम होगी। देश में डीजल और पेट्रोल से चलने वाली कारों की लागत करीब पांच से छह रुपए प्रति किलोमीटर की पड़ती है। जबकि ई-व्हीकल की लागत करीब एक रुपए किलोमीटर आती है।

ई-व्हीकल के लिए बैंकों से लोन मिलना भी चुनौती

एसएमईवी निदेशक मानू शर्मा ने कहा, देश में ई-व्हीकल, उसके कंपोनेंट बनाने वाली 150 से ज्यादा कंपनियां हैं। कुल वाहनों की बिक्री में 1% हिस्सा ही ई-व्हीकल का है। वहीं, ई-वाहन के लिए बैंकों से लोन आसानी से नहीं मिलता।

9.6 लाख से 1.03 करोड़ रुपए तक है अभी देश में ई-कार की कीमत

देश में फिलहाल मर्सडीज बेंज, टाटा मोटर्स, एमजी मोटर्स, हुंडई और महिंद्रा इलेक्ट्रिक कार बना रही हैं। मर्सडीज की ईक्यूसी को छोड़ बाकी के कार मॉडलों की कीमत 9.6 लाख से 24.2 लाख रुपए तक है। मर्सडीज की ईक्यूसी करीब 1.03 करोड़ की है।

सरकार प्रमोट कर रही ई-व्हीकल

  • बैटरी निर्माण के लिए 2022 से 2030 तक विभिन्न प्रोग्राम के तहत 31,600 करोड़ रुपए का फंड देंगे। एडवांस्ड सेल केमिस्ट्री बैटरी के लिए 2022-2026 तक 18,100 करोड़ की स्कीम मंजूर हो चुकी है।
  • भारी उद्योग मंत्रालय ने हाईवे पर 1,544 चार्जिंग स्टेशन के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट जारी किए हैं। शहरों में 2,636 चार्जिंग स्टेशन बनाने को मंजूरी।
  • ई-व्हीकल मार्च 2023 से पहले खरीदने पर कर्ज के ब्याज पर 1.5 लाख रुपये तक आयकर छूट
  • हैदराबाद की बैटरी निर्माता कंपनी रोशन एनर्जी का अमेरिकी बैटरी कंपनी बेरल एनर्जी से करार हुआ है। दो साल में बैटरी बनने लगेगी। गुजरात, तमिलनाडु सहित कुछ अन्य राज्यों में भी बैटरी बनेगी। सरकार की प्रोडक्शन लिंक स्कीम से कंपनियों को फायदा।

बैटरी, चार्जिंग नेटवर्क, कीमत ई-व्हीकल बाजार की बड़ी चुनौती

बैटरी: अभी आयात होती हैं। लेड आधारित बैटरी भारी होती हैं और दो-तीन साल ही चलती हैं।

चार्जिंग नेटवर्क: ई-व्हीकल्स के लिए चार्जिंग सुविधा नहीं है। बेंगलुरू और दिल्ली जैसे शहरों में भी चार्जिंग स्टेशन अपर्याप्त हैं, जबकि पेट्रोल पंप की तरह चार्जिंग स्टेशन होने चाहिए।

कीमत: अभी देश में चार पहिया ई- व्हीकल्स की कीमत डीजल या पेट्रोल वाहन की तुलना में करीब दोगुनी है।