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तिनका-तिनका बुनकर बनाया घरौंदा:हाफ नदी के किनारे में बबूल के पेड़ पर बया पक्षियों ने बनाया अपना आशियाना

पंडरियाएक महीने पहले
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ये तस्वीर नगर से लगे कुबा के पास हाफ नदी किनारे बबूल पेड़ की है। पेड़ की टहनियों पर बया पक्षियों ने अपनी बस्ती बसाई हुई है। घास के तिनकों से लालटेन की तरह लटकता हुआ अनोखा घोंसला बनाया है। ताकि मादा इसमें अपने बच्चों को सुरक्षित रख सके। घास के तिनकों को बुन कर बस्तियों की तरह बड़ी संख्या में घोंसला बनाने की अपनी इसी कला के चलते इन पक्षियों को बुनकर पक्षी भी कहते हैं। क्षेत्र में इन दिनों गन्ने के खेत के ऊपर गुजर रहे बिजली के तार पर भी इस तरह बया पक्षियां घोसला बनाकर रह रहीं है।

मानसून बया पक्षियों के प्रजनन का समय होता है
भोरमदेव अभयारण्य के रेंजर देवेन्द्र गोंड बताते हैं कि बया एक सामाजिक पक्षी है। ये बस्तियों की तरह घोंसला बनाते हैं। जुलाई से सितंबर माह बया पक्षियों के प्रजनन का समय होता है। मादा बया पक्षी का रंग व कद लगभग गौरैया जैसे होती है। वन्यजीव अधिनियम 1972 की अनुसूची 4 में बया पक्षी को संरक्षित किया गया है। इन पक्षियों के शिकार पर प्रतिबंध है।

कीट-पतंगे इनका आहार, किसान मित्र होती है बया
पर्यावरण संरक्षण समिति के सदस्य मोहन राजपूत बताते हैं कि बया प्रजनन काल में अपने बच्चों को कीट-पतंगे आहार रूप में खिलाते हैं। इससे कीटों की संख्या नियंत्रित होती है। इसलिए ये किसान मित्र होते हैं।

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