पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

भास्कर एक्सक्लूसिव:मानसून के बाद डिजिटल सिस्टम से पानी का स्तर जांचेंगे, कंप्यूटर-मोबाइल में दिखेगा लेवल

रायपुरएक महीने पहलेलेखक: अमिताभ अरुण दुबे
  • कॉपी लिंक
रायपुर के ओसीएम चौक में भूजल स्तर की जांच करते वैज्ञानिक। - Money Bhaskar
रायपुर के ओसीएम चौक में भूजल स्तर की जांच करते वैज्ञानिक।

छत्तीसगढ़ में जलसंसाधन विभाग आखिरी बार परंपरागत तरीके से ग्राउंड वाटर का असेसमेंट कर रहा है। इसके बाद यानी मानसून के बाद होने वाला सर्वे हाईटेक तकनीक से किया जाएगा। इसमें जमीन में पानी के स्तर की जांच डिजिटल सिस्टम से की जाएगी। इस दौरान पानी का लेवल लाइव (कंप्यूटर-मोबाइल) देखा जा सकेगा।

दरअसल, प्रदेश में 92 पीजोमीटर और 612 ओपन कुएं हैं, जिनमें साल में दो बार यानी मानसून के पहले और बाद में भूजल के स्तर का आंकलन किया जाता है। कोरोनाकाल के दौरान प्रदेश में जल संसाधन विभाग ने 97 नए पीजोमीटर लगाए हैं। इन सभी में इस महीने पहली बार भूजल स्तर का आंकलन होने जा रहा है।

उधर, केंद्रीय भूजल बोर्ड के प्रदेश में 773 कुएं और 650 से ज्यादा पीजोमीटर हैं। अब हर ब्लॉक में पीजोमीटर लग गए हैं। इस साल प्रदेश में इनकी संख्या 189 हो जाएगी। मानसून के बाद डिजिटल रीडिंग के लिए सभी प्वाइंट पर सेंसर सिस्टम इंस्टाल किया जाएगा। इसके बाद भूजल स्तर को रीयल टाइम मोड पर देखा जा सकेगा।

वैज्ञानिक जमीन में भूजल स्तर कैसे मापते हैं, भास्कर में पहली बार लाइव
भास्कर ने पाठकों के लिए भूजल विभाग के वैज्ञानिकों के जरिए पानी के स्तर को मापने की प्रक्रिया को जाना। रायपुर के ओसीएम चौक में भूजल विभाग का पीजोमीटर लगा है। इसकी गहराई करीब 65 मीटर है। ओसीएम चौक के पीजोमीटर के जरिए इसके आसपास के इलाकों में पानी कितना नीचे गिरा, इसका पता लगाया जाता है।

भूजल स्तर की रीडिंग के परंपरागत तरीके में एक मीटर टेप बोरवेल में डाला जाता है। इस टेप के साथ साउंडर मशीन लगी होती है। बोरवेल में जब टेप डाला जाता है तो पानी की सतह से छूने के साथ ही साउंडर मशीन से बीप की आवाज आती है।

जिस गहराई पर बीप की आवाज आती है, उसकी रीडिंग ली जाती है। ये रीडिंग बताती है कि पानी कितना नीचे जा चुका है। ओसीएम चौक के पीजोमीटर के बोर वेल में 39.48 मीटर की गहराई पर बीप की आवाज आई, जिससे पानी के स्तर का पता चला। सब इंजीनियर पीयूष वर्मा ने बताया कि अप्रैल में जब रीडिंग ली गई थी, उस वक्त 34.43 मीटर की गहराई पर बीप की आवाज आई थी।

इस तरह देंखे तो अप्रैल से मई के बीच 5.05 मीटर पानी नीचे जा चुका है, जबकि जनवरी में इसकी रीडिंग 16 मीटर आई थी। यानी जनवरी की तुलना में मई में भूजल के स्तर में 23.48 मीटर की गिरावट आ गई है।

कोरोना काल में भी नहीं रुका सर्वे
कोरोनाकाल के दौरान भूजल संसाधन विभाग ने तालेबंदी और कोरोना के बीच भी विभिन्न जिलों में सर्वे के काम को नहीं रोका। इसी का नतीजा रहा कि 2020 और 2021 में जून के महीने में छत्तीसगढ़ की भूजल रिपोर्ट तैयार हुई थी।

रायपुर, राजनांदगांव, कांकेर समेत प्रदेश के कई क्षेत्रों में पीजोमीटर या आंकलन के लिए बनाए गए कुंए भी कंटेनमेंट जोन के दायरे में आ गए थे, लेकिन टीमों ने ऐसे इलाकों में जाकर भी काम किया। प्रदेश में 28 जिलों में 623 जगहों पर आंकलन करने की इस तरह की व्यवस्था है। इसमें अकेले भूजल सर्वेक्षण संभाग रायपुर 386 जगह आंकलन करता है।

पुराना सिस्टम: पहले बीप की आवाज से पता चलता था लेवल
पहले पीजोमीटर या कुएं में पानी के स्तर को जांचने के लिए टीम को खुद जाना पड़ता है। इसमें मीटर टेप के साथ साउंडर मशीन डाली जाती है। इसमें जितने स्तर पर बीप की आवाज आती है, वही भूजल स्तर माना जाता है। भूजल के आंकलन में तकरीबन 15 मिनट से आधा घंटा वक्त लगता है।

नया सिस्टम: डैशबोर्ड पर आएगी रीडिंग, मोबाइल पर भी दिखेगी
नए सिस्टम में सभी पीजोमीटर और कुओं में सेंसर लगाए जा रहे हैं, जो भूजल विभाग के कंट्रोल रूम से कनेक्ट रहेंगे। इसमें डैशबोर्ड पर सेंसर के जरिए कभी पानी का स्तर डिजिटल तरीके से रिकॉर्ड किया जाएगा। इसमें 24 घंटे मॉनिटरिंग की जाएगी। इस सिस्टम से भूजल स्तर तुरंत ही पता चल जाएगा।