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विपक्ष ने किया वॉकआउट:चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण विधेयक पर वोटिंग, सरकार को मिले 56 वोट

रायपुर2 महीने पहले
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लंबी बहस के बाद अधिग्रहण विधेयक ध्वनिमत से पारित। - Money Bhaskar
लंबी बहस के बाद अधिग्रहण विधेयक ध्वनिमत से पारित।

चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण विधेयक पर चर्चा के दौरान गुरुवार को वोटिंग करानी पड़ी। इसमें 56 वोटों के साथ सरकार की जीत हुई। इसमें जोगी कांग्रेस के विधायक देवव्रत सिंह और प्रमोद शर्मा भी शामिल हैं। भाजपा को जोगी कांग्रेस के धर्मजीत सिंह व रेणु जोगी को मिलाकर 16 वोट मिले। इसके बाद विधेयक ध्वनि मत से पारित हुआ, लेकिन विपक्ष ने इसे संविधान के विरुद्ध बताते हुए वॉकआउट कर दिया।

अधिग्रहण विधेयक पर लंबी बहस के बाद भाजपा के बृजमोहन अग्रवाल की ओर से दिए गए संशोधन प्रस्तावों पर चर्चा हुई। बृजमोहन ने विधेयक में मेडिकल कॉलेज में पदस्थ डॉक्टर व अधिकारी-कर्मचारियों का भी शासकीयकरण करने और कॉलेज चलाने में जिन लोगों ने कर्ज दिया है, उनकी देनदारियों का शासन की ओर से भुगतान करने का संशोधन करने की मांग रखी। इस पर जब आसंदी ने तीन बार अभिमत लिया। तीनों बार बृजमोहन ने मत विभाजन की मांग रखी। आखिरकार स्पीकर डाॅ. चरणदास महंत ने मत विभाजन कराया, जिसमें संशोधन के पक्ष में 16 और संशोधन के विरोध में 56 वोट मिले। संशोधन अग्राह्य होने के बाद विधेयक ध्वनि मत से पारित हो गया, लेकिन विपक्ष के सदस्य खड़े होकर नारेबाजी करने लगे और विरोध में वॉकआउट कर दिया।

दुर्ग में मेडिकल कॉलेज सरकार की प्राथमिकता, ढाई साल से चल रही थी कोशिश: सिंहदेव
स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि सरकार ने जनहित में मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण का निर्णय लिया है। दुर्ग में सरकारी मेडिकल कॉलेज खोलना सरकार की प्राथमिकता में रहा है। नई सरकार के गठन के बाद सीएम भूपेश बघेल ने सभी लोकसभा क्षेत्रों में एक-एक मेडिकल कॉलेज खोलने के प्रस्ताव पर सहमति देते हुए इसके लिए प्रयास करने को कहा था।

दो साल पहले केंद्र सरकार ने देश में 75 मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रावधान बजट में किया था। छत्तीसगढ़ में तीन मेडिकल कॉलेज कांकेर, कोरबा और महासमुंद में खोलने का प्रस्ताव भेजा था, जिनकी सहमति केंद्र से मिली। दुर्ग में मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रस्ताव केंद्र को इसलिए नहीं भेजा जा सका, क्योंकि केंद्र ने यह शर्त रखी थी कि जहां पूर्व में सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज हों, वहां के लिए प्रस्ताव नहीं भेजा जाना चाहिए।

कॉलेज चलाने में हर साल 140 करोड़ का भार
कांग्रेस विधायक मोहन मरकाम ने कहा कि एक मेडिकल कॉलेज के संचालन में लगभग 200 करोड़ का वित्तीय भार हर साल आता है। चंदूलाल चन्द्राकर स्मृति मेडिकल कॉलेज के संचालन में साल में 140 करोड़ का भार आएगा। देवेंद्र यादव ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज के छात्र लगातार यह मांग करते थे कि इस मेडिकल कॉलेज का अधिग्रहण किया जाना चाहिए था।

दूसरी लहर के समय चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज की अधोसंरचना का उपयोग कर 5000 लोगों की जान बचाई जा सकी थी। इस अस्पताल के अधिग्रहण से 186 छात्रों का भविष्य खराब होने से बच जाएगा। विधायक अरूण वोरा ने कहा कि इस अधिग्रहण से 750 बेड बढ़ जाएंगे और प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़कर 1370 हो जाएगी। विधायक डॉ. लक्ष्मी ध्रुव ने कहा कि लोक कल्याणकारी भावना और छात्र हितकारी भावना को ध्यान में रखकर यह अधिग्रहण किया जा रहा है। विधायक देवव्रत सिंह ने कहा कि इस निर्णय में छत्तीसगढ़ की अस्मिता और स्वाभिमान का ध्यान रखा गया है।

राज्य की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि कर्ज में डूबे मेडिकल कॉलेज का अधिग्रहण करें
पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि कर्ज में डूबे हुए मेडिकल कॉलेज का अधिग्रहण किया जाए। दुर्ग में 700 बिस्तर क्षमता का जिला अस्पताल है, जिसे मेडिकल कॉलेज के रूप में डेवलप किया सकता है। सरकार यह गलत परंपरा डाल रही है। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि सरकार जल्दबाजी में यह विधेयक ला रही है। इसकी देनदारियों का मूल्यांकन नहीं हुआ है। भुगतान योग्य राशि के निर्धारण हेतु विशेष अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।

उसको वेतन-भत्ता भी सरकार देगी। वास्तव में यह कार्य किसी न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा किया जाना चाहिए। कई तरह की शंकाएं हैं, इसलिए विधेयक को रोक दिया जाना चाहिए। बृजमोहन अग्रवाल ने संपत्तियों के बदले दोगुनी कीमत पर आपत्ति की। सौरभ सिंह ने सवाल किया कि अधिग्रहण के बाद यदि कोर्ट ने देनदारी तय की तो कौन जिम्मेदार होगा? उन्होंने सदन में बैलेंस शीट प्रस्तुत करने कहा। शिवरतन शर्मा ने कहा कि अधिग्रहण का सबसे पहले स्व. चंदूलाल चंद्राकर के पोते ने ही विरोध किया है।

लेमरू अभयारण्य 1995 वर्ग किमी का ही
वनमंत्री मोहम्मद अकबर ने नियम 139 के अधीन चर्चा के दौरान कहा कि लेमरू अभयारण्य का क्षेत्र 1995 वर्ग किलोमीटर ही बना रहेगा। इसे 452 वर्ग किलोमीटर करने का प्रस्ताव कैबिनेट ने रद्द कर दिया है। जोगी कांग्रेस विधायक धर्मजीत सिंह ने हसदेव व मांड नदी के जलग्रहण क्षेत्र के वनों में कोयला खनन की अनुमति देने से बनी स्थिति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कोयला खनन करने से बड़ी संख्या में जीव-जंतु नष्ट हो जाएंगे। सबसे बड़े हसदेव बांध और उसका कैचमेंट एरिया खतरे में आ जाएगा।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी जिस मदनपुर गांव के लोगों से वादा किए थे कि उनका विस्थापन नहीं होगा, वहां ग्रामीणों को नोटिस दिया गया है। कांग्रेस के विधायक पत्र लिखते हैं कि लेमरू अभयारण्य का क्षेत्र घटाकर 452 वर्ग किलोमीटर किया जाना चाहिए, जबकि सरकार पहले यह दावा करती रही है कि उस क्षेत्र में कोयला खनन करने नहीं दिया जाएगा। अपने जवाब में वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से 452 वर्ग किलोमीटर करने का प्रस्ताव आया था, लेकिन कैबिनेट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है।

उठाव नहीं होने से धान खराब, वाकआउट
विधानसभा में विपक्ष ने एक के बाद एक लगातार तीन अलग-अलग मुद्दों पर बहिर्गमन किया। संग्रहण केंद्रोें में रखे गए धान के खराब होने औैर समय पर उठाव नहीं होने पर विपक्ष ने हंगामा किया। लगभग 8000 करोड़ के धान का उठाव नहीं होने के आरोप लगाते हुए विपक्ष ने जमकर नारेबाजी की औैर खाद्यमंत्री अमरजीत भगत के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से वाकआउट कर दिया। ध्यानाकर्षण में धरमलाल कौशिक ने पूछा कि अव्यवस्था के कारण खरीदी केन्द्रों में धान जाम हो गया है। धमतरी जिले के 89 केन्द्रों में 42 लाख क्विंटल धान का उठाव नहीं हो पाया है। जिससे 5213 टन धान सूख गया है।

अन्य केन्द्रों में भी यही हालात हैं। अजय चंद्राकर ने कहा कि इससे राज्य को 8000 करोड़ का नुकसान होगा। शिवरतन ने पूछा कि परिवहन का आदेश कब दिया औैर निरस्त क्यों किया गया। खाद्यमंत्री भगत ने बताया कि खरीदी के 72 घंटे के भीतर धान का उठाव हो जाता है। यदि नियत समय में उठाव न हो तो समिति उसका परिवहन करवा सकती है। शेष धान का निराकरण किया जा रहा है। लेकिन विपक्ष ने कहा कि विभाग की लापरवाही के कारण धान सूख गया औैर मंत्री गोलमोल जवाब दे रहे हैं। इसके बाद नारेबाजी करते हुए वॉकआउट कर दिया।

जय-वीरू और कालिया-सांभा की चर्चा; भूपेश के पास पहुंचे सिंहदेव तो विपक्ष बोला: जय-वीरू एक हो गए क्या?

चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज अधिग्रहण विधेयक प्रस्तुत होने के पहले सदन के भीतर सीएम भूपेश के पास स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव पहुंचे। बीच में कांच का पार्टीशन होने के कारण दोनों नेता खड़े होकर एक-दूसरे से बात करने लगे तभी अजय चंद्राकर ने चुटकी लेते हुए कहा कि जय-वीरू फिर एक हो गए क्या? वो सिक्का जिसके दोनों ओर एक ही निशान था वो आपके पास है क्या? इस पर सीएम औैर सिंहदेव दोनों मुस्कुराने लगे लेकिन तभी सीएम भूपेश ने पलटकर कहा कि हम लोग तो ठीक हैं पर ये बताओ कि गब्बर, सांभा और कालिया कौन है। इस पर सदन में ठहाके गूंजे। बाद में शिवरतन शर्मा ने ठाकुर और गब्बर कौन है।

गोबर खरीदी ओर गौठान समितियों की नियुक्ति में अनियमितता पर हंगामा
गोबर खरीदी ओर गौठान समितियों में होने वाली नियुक्ति को लेकर जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी सदस्यों ने सत्तापक्ष के जवाब से असंतुष्ट होकर पहले हंगामा मचाया फिर सदन से वाकआउट कर दिया। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने पूछा कि गोबर खरीदी केंद्रों से कितनी मात्रा में गोबर की चोरी हुई, कितना बहा और कितने रुपए का भुगतान किया गया है। कौशिक ने गोबर घोटाला होने के आरोप भी लगाए। कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने बताया कि प्रदेश भर में चार खरीदी केंद्रों से गोबर चोरी होने और पानी में बह जाने की शिकायत मिली है। दुर्ग में अगस्त 2020 में भारी बरसात से गोबर बह जाने की शिकायत मिली थी, इसकी वसूली के लिए नोटिस जारी हुआ है।

सत्ता पक्ष के विधायक ने मंत्री को घेरा; दिव्यांग और तीन अन्य को मिलेगी नौकरी, अधिकारी को देंगे नोटिस
कांग्रेस विधायक संतराम नेताम ने पूछा कि ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी के 348 पदों के लिए भर्ती विज्ञापन कब जारी किए गए थे। परीक्षा कब हुई थी ओर परिणाम कब घोषित हुए थे। उन्होंने कहा कि समय खत्म हाेने के बाद भी नियुक्तियां की गईं, जबकि दिव्यांग और अन्य जरूरतमंदाें को नौकरी नहीं दी गई। कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने बताया कि भर्ती विज्ञापन जुलाई 2017 में निकाला गया था, 13 अगस्त को परीक्षा हुई थी और परिणाम 28 अक्टूबर को आया था। अधिकारी को कारण बताओं नोटिस जारी किया जा रहा है। बच्चों की नियुक्ति भी की जाएगी। इस चर्चा में धर्मजीत सिंह और अजय चंद्राकर ने भी भाग लिया।

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