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रायपुर-जगदलपुर हाईवे पर 7 जगह चक्काजाम:सड़क पर उतरा आदिवासी समाज, कई शहरों में कारोबार बंद कराने की कोशिश; एडसमेटा कांड में जुर्म दर्ज करने समेत 13 मांगों पर अड़े

रायपुरएक महीने पहले
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सर्व आदिवासी समाज ने धमतरी के आम्बेडकर चौक पर चक्काजाम कर देर तक प्रदर्शन किया।

अपनी 13 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलित सर्व आदिवासी समाज सोमवार को फिर सड़कों पर उतर आया। प्रदेश के कई शहरों में यातायात और कारोबार बंद कराने की कोशिश हुई। कई जिलों में चक्काजाम हुआ। रायपुर-जगदलपुर हाईवे पर 7 जगह चक्काजाम हुआ था। इसकी वजह से यातायात प्रभावित रहा।

छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज का सोहन पोटाई धड़ा पिछले जुलाई महीने से ही राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहा है। आंदोलन के बाद भी सरकार की ओर से समाधान की पेशकश नहीं होने से नाराज समाज ने 30 अगस्त को आर्थिक नाकेबंदी की थी। बात नहीं बनी तो सोमवार को प्रदेश बंद के नारे के साथ आदिवासी समाज फिर सड़कों पर उतर आया। धमतरी, कुरूद, मगरलोड, बालोद, कांकेर, गरियाबंद, डौंडी लोहारा, कोरबा और कोण्डागांव में राजमार्गों पर प्रदर्शन हुए।

सर्व आदिवासी समाज के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बीएस रावटे ने कहा, एडसमेटा, सारकेगुड़ा और ताडमेटला कांड की न्यायिक जांच रिपोर्ट से साफ हो चुका है कि मारे गए लोग निर्दोष आदिवासी थे। ऐसे में तत्कालीन SP, IG, DGP, गृह मंत्री और मुख्यमंत्री के खिलाफ हत्या की धाराओं में अपराध दर्ज होना चाहिए। पीड़ितों को पर्याप्त और उचित मुआवजा मिलना चाहिए। इन घटनाओं के बाद जिस पुलिस अधिकारी को पदोन्नति और बहादुरी का मेडल आदि मिला है उसे वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा, सिलगेर के मामले में भी ऐसा ही हुआ। आदिवासी वहां चार दिन से आंदोलन कर रहे थे। पुलिस ने गोली चला दी, चार लोग मर गए तो कह दिया वे नक्सली थे। पुलिस वाले महाभारत काल के एकलव्य हो गए हैं जो शब्दभेदी गोली चला रहे हैं कि भरी भीड़ में केवल नक्सलियों को मारती है। रावटे ने कहा, सरकार गोली मारने के बाद आदिवासियों को नक्सली कहना बंद करे।

कोरबा की सड़कों पर रैली निकालकर दुकान बंद करने को कहते प्रदर्शनकारी।
कोरबा की सड़कों पर रैली निकालकर दुकान बंद करने को कहते प्रदर्शनकारी।

धमतरी में कांग्रेस विधायक का पुतला जलाया

सर्व आदिवासी समाज ने धमतरी के आम्बेडकर चौक पर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस विधायक लक्ष्मी ध्रुव का पुतला जलाया। राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान शहर का यातायात ठप रहा। चौराहे से लगी सड़कों पर जाम की स्थिति बनी रही।

इन मांगों को लेकर भी आंदोलन

समाज ने पंडो जनजाति के लोगों की खून की कमी से हो रही मौत की रिपोर्ट पर भी कार्रवाई की मांग की है। आदिवासी समाज के कार्यकारी अध्यक्ष बीएस रावटे ने कहा, सिलगेर गोली कांड में मृतकों के परिजनों को 50 लाख रुपए का मुआवजा, परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी की मांग कायम है। वे नक्सल समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं, उसके अलावा आरक्षण, पेसा कानून को लेकर उनका आंदोलन जारी रहेगा।

लोहारा में सड़क जाम कर प्रदर्शन करते आदिवासी समाज के लोग।
लोहारा में सड़क जाम कर प्रदर्शन करते आदिवासी समाज के लोग।

दूसरे धड़े ने कहा, सरकार पूरी कर रही है मांग, आंदोलन नहीं

सर्व आदिवासी समाज के बीपीएस नेताम धड़े ने सोमवार को हुए बंद का विरोध किया है। समाज के प्रदेश अध्यक्ष भारत सिंह ने कहा, इस महाबंद और आर्थिक नाकेबंदी से उनके संगठन का कोई संबंध नहीं है। आदिवासी समाज की मांगों के संदर्भ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से उन लोगों ने चर्चा की है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है जो इन समस्याओं को सुलझाएगी।

मगरलोड में बाजार बंद करने का आग्रह करने के लिए रैली निकाली। वहां एक सभा भी हुई।
मगरलोड में बाजार बंद करने का आग्रह करने के लिए रैली निकाली। वहां एक सभा भी हुई।

एडसमेटा, सारकेगुड़ा और ताडमेटला में क्या हुआ था

17 मई 2013 की रात बीजापुर के एडसमेटा गांव में सुरक्षा बलों के एक अभियान दल ने गोलीबारी की थी। इसमें एक सुरक्षाकर्मी सहित 11 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 4 बच्चे भी शामिल थे। पुलिस ने इसे मुठभेड़ बताया। 8 सितंबर को जस्टिस वीके अग्रवाल की अध्यक्षता वाले न्यायिक जांच आयोग ने सरकार को रिपोर्ट दी है। इसमें मुठभेड़ के दावे को खारिज कर दिया गया है। सारकेगुड़ा गांव में जून 2012 में बीज पंडुम मनाने इकट्‌ठा हुए ग्रामीणों पर ऐसी ही फायरिंग हुई थी, जिसे पुलिस ने मुठभेड़ बताया। इसमें 17 ग्रामीण मारे गए थे। 6 अप्रैल 2010 को सुकमा के ताडमेटला गांव के पास सीआरपीएफ पर सबसे बड़ा हमला हुआ था। इसमें 76 जवान शहीद हुए। अगले वर्ष 11 से 16 अप्रैल के बीच सुरक्षा बलों ने ताड़मेटला, मोरपल्ली और तिम्मापुर गांवों में घुसकर आगजनी की। जुलाई 2011 को यह मामला सीबीआई को दिया गया। 2016 में सीबीआई की चार्जशीट आई जिसमें सुरक्षा बलों को जिम्मेदार ठहराया गया।

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