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भास्‍कर एक्सक्लूसिव:छत्तीसगढ़ में बिजली संकट नहीं, फिर भी छोटे उद्योगों की सोलर एनर्जी में रुचि, महीने में 500 रजिस्ट्रेशन

रायपुर2 महीने पहलेलेखक: संदीप राजवाड़े
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बिजली बोर्ड के सोलर रूफटॉप वेब पोर्टल में सिर्फ अक्टूबर के 20 दिन में 500 लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया। - Money Bhaskar
बिजली बोर्ड के सोलर रूफटॉप वेब पोर्टल में सिर्फ अक्टूबर के 20 दिन में 500 लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया।

कोयले संकट की वजह से बिजली आपूर्ति को लेकर आशंकित छोटे उद्योगों ने अक्टूबर में एहतियातन सोलर एनर्जी पर फोकस किया है। हालांकि छत्तीसगढ़ में बिजली संकट नहीं है, फिर भी पिछले एक माह में सोलर बिजली को लेकर पूछताछ, सब्सिडी, योजनाओं की लोगों ने जमकर जानकारी ली है। भास्कर की पड़ताल के मुताबिक बिजली बोर्ड के सोलर रूफटॉप वेब पोर्टल में सिर्फ अक्टूबर के 20 दिन में 500 लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया, जबकि पिछले दो साल (24 माह) में केवल 1100 लोग ही इस पोर्टल पर रजिस्टर्ड हुए थे।

यही नहीं, सिर्फ एक माह में घरेलू तथा छोटे उद्योगों ने छतों पर सोलर पैनल लगवाने के लिए 28 एग्रीमेंट कर डाले हैं। अफसरों का कहना है कि पिछले एक माह में छोटे उद्योगों से डिमांड भी ज्यादा आई है और सोलर ग्रिड रूफटॉप प्लांट को लेकर काफी पूछताछ होने लगी है। छत्तीसगढ़ में बिजली संकट नहीं है, फिर भी पिछले एक माह में लोगों ने एहतियातन सोलर की तरफ रुख किया है।

छत्तीसगढ़ पावर वितरण कंपनी के अफसरों ने बताया कि अक्टूबर 2019 में सोलर ग्रिड रूफटॉप पैनल लगाने को योजना आई थी। तब से जुलाई 2021 तक इसके कुल 33 एग्रीमेंट हुए थे। इसमें घरेलू ग्राहकों के साथ छोटे उद्योग वाले भी शामिल थे। अगस्त में यह आंकड़ा 55 एग्रीमेंट तक पहुंच पहुंचा, फिर तेजी से बढ़ा। सितंबर से 4 अक्टूबर तक, जब देश में कोयला और बिजली संकट की चर्चा सबसे ज्यादा थी, एग्रीमेंट की संख्या बढ़कर 83 एग्रीमेंट हो गई है। सभी एग्रीमेंट मध्यम और बड़े बिजली उत्पादक सोलर ग्रिड पैनल लगाने के हैं।

इसलिए एग्रीमेंट, एन्क्वायरी बढ़ी
क्रेडा के ईई संजीव जैन ने बताया कि 2019 के पहले सोलर एनर्जी प्लांट को लेकर कुछ बंधन थे, लेकिन अब घरों के लिए एक किलोवॉट क्षमता का सोलर एनर्जी प्लांट लगवा सकते हैं। यही नहीं, 10 किलोवॉट तक सिस्टम में केंद्र-राज्य सरकारें सब्सिडी दे रही हैं। अभी घरों के लिए एक से 3 किलोवॉट के सोलर ग्रिड प्लांट लगवाने पर 40 फीसदी और तीन से 10 किलोवॉट तक के सिस्टम लगाने पर 20 फीसदी छूट मिल रही है। कामर्शियल प्लांट पर छूट नहीं है, लेकिन बिजली का रेट एक-तिहाई पड़ता है, इसलिए डिमांड बढ़ी है।

अक्टूबर में तेज रजिस्ट्रेशन
सीएसपीडीसीएल में सोलर रूफटॉप सेल के प्रभारी एसई आलोक कुमार अम्बष्ट के मुताबिक सोलर बिजली की डिमांड बढ़ने का एक कारण इसका सस्ती होना है। हमारे यहां कमर्शियल बिजली का रेट औसतन 8 रुपए यूनिट तक जाता है, जबकि सोलर बिजली 2.5 रुपए ही पड़ रही है। यही नहीं, एक बार पैनल लगाने से 25 साल की फुर्सत है। सोलर बिजली की मांग बढ़ने को ऐसे समझ सकते हैं कि मार्च 2019 में प्रदेश में सोलहर बिजली उत्पादन क्षमता सिर्फ 11 मेगावॉट थी। यह एक साल यानी मार्च 20 में यह बढ़कर 16 मेगावॉट और मार्च 21 में 29 मेगावॉट हो गई।

सिर्फ सितंबर-अक्टूबर में यह 32 मेगावॉट पहुंच गई है। इसके अलावा, घरेलू व छोटे उद्योग वाले सीएसपीडीसीएल की ऑफिशियल वेबसाइट cspc.co.in/sp पर काफी रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं। इस साइट पर अक्टूबर 2019 में 300 लोगों ने विजिट की थी। इस साल सितंबर में ही 1100 पंजीयन हो गए। अक्टूबर में यह आंकड़ा इतनी तेजी से बढ़ा कि सिर्फ 15 दिन में 500 लोगों ने सोलर पैनल लगाने तथा इसकी जानकारी लेने के लिए साइट पर रजिस्ट्रेशन किया।