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राजभवन से सद्भाव का संदेश:बालोद विवाद के बाद पहली बार राजभवन पहुंचा था आदिवासी समाज, राज्यपाल बोलीं - सभी धर्मों का आदर जरूरी

रायपुरएक महीने पहले
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राज्यपाल अनुसूईया उइके ने सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल के करीब 100 लोगों को बिठाकर देर तक बातचीत की। - Money Bhaskar
राज्यपाल अनुसूईया उइके ने सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल के करीब 100 लोगों को बिठाकर देर तक बातचीत की।

बालोद में पाटेश्वर धाम में हुई मारपीट के बाद से बढ़ते विवाद के बीच राजभवन से सद्भाव का संदेश देने की कोशिश शुरू हुई है। सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष सिंह परते की अगुवाई में एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल शनिवार को राजभवन पहुंचा। राज्यपाल अनुसूईया उइके ने उन्हें बिठाकर करीब एक घंटे तक बात की। इस दौरान उन्होंने कहा, अपने समाज के अधिकारों के प्रति जागरुक रहते हुए भी सभी धर्मों का आदर करना चाहिए।

राज्यपाल अनुसूईया उइके ने कहा, आदिवासी समुदाय को अपने अधिकारों के बारे में जागरुक रहना चाहिए। इसके साथ ही आपसी सद्भाव, प्रेम और भाईचारे के साथ रहते हुए सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में सभी से सामंजस्य रखना चाहिए। सभी धर्मों का समान आदर करना चाहिए। उन्होंने कहस, भारत के महान संविधान में आदिवासियों के संरक्षण के लिए समुचित प्रावधान किए गए हैं। लेकिन कई बार जागरुकता के अभाव में अज्ञानता के कारण आदिवासी समुदाय को इन प्रावधानों का लाभ नहीं मिल पाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षित आदिवासी युवाओं को इसके लिए आगे आना चाहिए। उन्हें अपनी संस्कृति और धर्म पर गर्व करते हुए रचनात्मक दिशा में देश और प्रदेश की प्रगति में भागीदार बनना चाहिए। राज्यपाल ने कहा, सबके साथ से ही सबका विकास संभव होगा। आदिवासी समाज के युवाओं का यह प्रतिनिधिमंडल अलग-अलग जिलाें की समस्याएं लेकर राज्यपाल के पास पहुंचा था। राज्यपाल ने उन मामलों में भी कार्यवाही का भरोसा दिलाया है। आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमण्डल ने राज्यपाल को गमछा और स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित भी किया।

सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन के बाहर बातचीत में उठे मुद्दों की जानकारी दी।
सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन के बाहर बातचीत में उठे मुद्दों की जानकारी दी।

प्रतिनिधिमंडल ने यह मांगे रखीं

सर्व आदिवासी समाज के विनोद नागवंशी ने बताया, संगठन के लगभग सभी जिलों के पदाधिकारी राजभवन पहुंच गए थे। सब अपने क्षेत्र की समस्याओं से जुड़े मांगपत्र भी ले आए थे। इनमें प्रमुख रूप से पेसा कानून, पांचवी अनुसूची के क्षेत्रों में अधिकार, अधिसूचित क्षेत्रों में नगर पालिकाओं से ग्राम पंचायतों को वापस देने की मांग, परसा कोल ब्लॉक क्षेत्र में बिना ग्राम सभा की सहमति के खनन की मंजूरी और जबरन भूमि-अधिग्रहण का मामला शामिल था। राज्यपाल ने सभी मांगों पर कार्यवाही का भरोसा दिलाया है।

बालोद का यह विवाद क्या था

मई महीने की शुरुआत में बालोद जिले के पाटेश्वर धाम में बलि चढ़ाने के बाद दो पक्षों में विवाद हो गया था। दोनों पक्षों में ईंट-पत्थर और लाठी-डंडे चले। इसके बाद माहौल तनावपूर्ण है। मारपीट के विरोध में दो-तीन दिन पहले आदिवासी समाज, छत्तीसगढ़ क्रांति सेना, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा जैसे संगठनों ने बालोद बंद का आह्वान किया था। बंद कराने के दौरान बंद समर्थकों और व्यापारियों के बीच मारपीट हो गई। इसी मामले में छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के अध्यक्ष ने एक धर्म के बारे में आपत्तिजनक बातें कहीं और विवाद प्रदेश भर में फैल गया। शनिवार को जैन समाज का एक प्रतिनिधिमंडल भी राज्यपाल से मिलने पहुंचा था।