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कॉन्स्टेबल का बेटा बनेगा DSP:दीपक ने पहली बार में ही CGPSC किया क्रैक, दो साल पहले DGP से मुलाकात के बाद ही तय कर लिया था- अफसर बनना है

रायपुर/गरियांबदएक महीने पहले
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दीपक DSP रैंक के अफसर बनेंगे। - Money Bhaskar
दीपक DSP रैंक के अफसर बनेंगे।

गरियाबंद में कॉन्स्टेबल की पोस्ट पर काम करने वाले सुंदर सिंह ठाकुर को उनके अफसर बधाई दे रहे हैं। वजह है बेटे की कामयाबी। सुंदर सिंह के बेटे दीपक ठाकुर ने पहले ही प्रयास में CGPSC 2019 के एग्जाम को क्रैक कर लिया है। 367 रैंक की बदौलत दीपक को DSP की पोस्ट मिल सकती है। जल्द ही पोस्ट अलॉट होगी। अपनी इस कामयाबी की खबर शुक्रवार रात को रिजल्ट आने के बाद दीपक ने पिता को सुनाई। आधी जिंदगी पुलिस विभाग में बिता चुके पिता को बेटे की इस कामयाबी पर बेहद खुशी है। दीपक ने कहा कि मैंने रिजल्ट आने के बाद पिता को फोन किया था, वो मुझ से बोले- मुझे पता था तुम कर दिखाओगे।

दीपक के पिता गरियाबंद में पोस्टेड हैं।
दीपक के पिता गरियाबंद में पोस्टेड हैं।

DGP डीएम अवस्थी ने किया इंस्पायर

दीपक ने बताया कि बचपन से ही पिता को वर्दी में देखा है। पुलिस अधिकारियों को देखकर दीपक ने भी करियर में अफसर बनने की सोच रखी थी। 2 साल पहले DGP डीएम अवस्थी ने पुलिस परिवार के ऐसे बच्चों से मुलाकात की थी जो पढ़ाई में अच्छे हैं। इन बच्चों में दीपक भी शामिल थे। तब दीपक से DGP अवस्थी ने कहा था कि पढ़ाई में अच्छे हो तो सिविल सर्विसेज की तैयारी जरूर करो। इसका दीपक पर गहरा असर पड़ा और तभी से वह तैयारी में जुट गए।

पढ़ने में अच्छे थे, लिहाजा सरकार की योजना के तहत यूपीएससी की तैयारी करने के लिए दिल्ली जाने का मौका मिला। दीपक ने बताया कि दिल्ली में काफी राज्यों से होनहार स्टूडेंट पहुंचे हुए थे, जिन्हें देखकर दीपक इंस्पायर होते रहे। अपनी तैयारी में उनसे गाइडेंस भी लेते रहे। इस वजह से सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए खुद को मोटिवेट कर पाए और आखिरकार कामयाबी मिली।

परिवार के साथ दीपक।
परिवार के साथ दीपक।

वीकली टारगेट बनाकर की पढ़ाई

अपनी पढ़ाई के शेड्यूल को दीपक ने हफ्तों में बांट रखा था। दीपक ने बताया, 'हर हफ्ते मैं किसी टॉपिक या सबजेक्ट की तैयारी पूरी करता रहता था। दिमाग में इस बात का बोझ नहीं था कि 6 या 7 घंटे पढ़ाई करनी है, मैं बस ये ध्यान में रखता था कि इस सप्ताह तैयारी पूरी कर लूं। ऐसे में दो घंटे की पढ़ाई भी फोकस्ड तरीके से हो पाती थी। हर सब्जेक्ट को पूरा करने के बाद उसे रिवाइज करने और लगातार प्रेक्टिस करने पर जोर देते रहे, जिसकी वजह से CGPSC की तैयारी काफी मजबूत हुई। कांसेप्ट को समझते हुए मेंस को ध्यान में रखकर तैयारी की और पहले प्रयास में ही कामयाबी मिली'।

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