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आपातकाल की 47 साल पुरानी यादें:इमरजेंसी में जेल जा चुके उपासने बोले- उस दौर के बारे में स्कूल में पढ़ाना चाहिए

रायपुर3 महीने पहले
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सच्चिदानंद उपासने ने साझा की उस दौर की यादें। - Money Bhaskar
सच्चिदानंद उपासने ने साझा की उस दौर की यादें।

शनिवार को भाजपा आपातकाल की 47वीं बरसी मना रही है। रायपुर के भाजपा कार्यालय में पार्टी के नेता सच्चिदानंद उपासने ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस ली। उपासने तब जेल भी जा चुके हैं। उन्होंने कहा - आपातकाल इस देश में आजादी की दूसरी लड़ाई की तरह था। पहली लड़ाई तो अंग्रेजों के खिलाफ लड़ी गई, देश को स्वतंत्र किया गया। दूसरी लड़ाई आपातकाल लगाने वाली कांग्रेस और इंदिरा गांधी के खिलाफ थी।

उपासने ने आगे कहा कि सत्ता पर काबिज रहने के लिए देश में आपातकाल लगाया गया। मीडिया पर शिकंजा कसा गया। इंदिरागांधी के खिलाफ एक लाइन भी लिखी जाती तो उसे हटवा दिया जाता या पत्रकारों को जेल में डाल दिया जाता। उस काल की वजह से लाखों परिवार पीडित हैं, आज भी। हमारी मांग है कि आपातकाल का इतिहास पाठ्य पुस्तकों में शामिल होना चाहिए। स्कूल के बच्चों को पढ़ाना चाहिए जो कुछ उस वक्त हुआ था।

रायपुर में आपातकाल के वक्त कुछ ऐसा था माहौल
सच्चिदानंद ने बताया, ‘एमजी रोड में हमने एक कमरा ले रखा था। रात के वक्त यहां हम एक छोटी प्रिटिंग मशीन से पर्चा बनाते थे। इसमें इंदिरा सरकार की तानाशाही के बारे में लिखकर लोगों को जागरुक करते थे। रायपुर के अमरदीप टॉकिज, शारदा टॉकिज में रात के शो के वक्त हम बालकनी में शो देखने जाते थे और वहीं से पर्चा लोगों के बीच फेंककर भाग आते थे।

उपासने तब जेल जा चुके हैं। उन्हें जयस्तंभ चौक पर “इंदिरा तेरी तानाशाही नहीं चलेगी’ का नारा लगाने की वजह से हुए 19 दिसंबर 1975 से 21 मार्च 1977 तक के लिए जेल में बंद कर दिया गया था। उपासने का दावा है कि आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम (MISA) कानून देश में सन 1971 में बना था। हमें भी इसी कानून के तहत देशद्रोही बताकर जेल में डाला गया। हमारी पर्चे छापने की मशीन जब्त कर ली गई। जेल में हम पर लाठी चार्ज किया गया था।’

इस वजह से लगा था देश में आपातकाल
आपातकाल की जड़ें 1971 में हुए लोकसभा चुनाव से जुड़ी हुई हैं, जब इंदिरा गांधी ने रायबरेली सीट से राजनारायण को हराया था। लेकिन राजनारायण ने हार नहीं मानी और चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में फैसले को चैलेंज किया। 12 जून, 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने इंदिरा गांधी का चुनाव निरस्त कर 6 साल तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया। कुर्सी की खातिर देश में आपातकाल लगा दिया। 18 जनवरी 1977 को इंदिरा ने अचानक ही मार्च में लोकसभा चुनाव कराने का ऐलान कर दिया। 16 मार्च को हुए चुनाव में इंदिरा और संजय दोनों हार गए। 21 मार्च को आपातकाल खत्म हो गया और मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने।

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