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मुख्यमंत्री ने भाजपा की विचारधारा को विभाजन का जिम्मेदार बताया:कहा-ये तो चाहते थे कि अंग्रेज जाएं ही नहीं, अब गांधी की आलोचना करते हैं

रायपुर6 महीने पहले
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सीएम भूपेश बघेल।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देश के विभाजन के लिए भाजपा की विचारधारा को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा, ये लोग चाहते ही नहीं थे कि अंग्रेज देश से बाहर जाएं। वे कभी भी अंग्रेजों की आलोचना नहीं करते। आज भी गांधी की आलोचना करते हैं।

मुख्यमंत्री पाटन रवाना होने से पहले रायपुर में प्रेस से चर्चा कर रहे थे। विभाजन विभिषिका स्मृति दिवस को लेकर पूछे गए एक सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा, देश के विभाजन का बीज सावरकर ने बोया था। उन्होंने हिंदू-मुसलमान दो राष्ट्र हैं जैसी बात स्वीकार की। मुहम्मद अली जिन्ना ने 1937 में उसे स्वीकार किया। दो राष्ट्र का सिद्धांत सावरकर ने प्रस्तावित किया और जिन्ना ने उसका समर्थन किया। विभाजनकारी तो ये लोग हैं। देश की आजादी में इनकी भूमिका क्या थी? 1925 में तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बन गया था। उनके सारे नेताओं के उस समय के बयान देखिए। 1942 में इनके श्यामाप्रसाद मुखर्जी कहते हैं कि भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल नहीं होना है। कैसे इसे दबाया जाए इसके लिए मुखर्जी, वायसराय को चिट्‌ठी लिखते हैं। ये तो इस कोशिश में थे कि अंग्रेज जाएं ही मत। ये कभी अंग्रेजों की आलोचना नहीं करते। ये गांधी की आलोचना करते हैं। अंग्रेजों के खिलाफ एक शब्द में ये बयान दिए हों तो बताएं।

अखंड भारत की बात को बताया गुमराही का षड्यंत्र

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, भाजपा से मेरा एक सवाल है। संघ के कार्यालय में हिंदू राष्ट्र का जो नक्शा है उसमें कौन-कौन से देश शामिल हैं। पाकिस्तान है, अफगानिस्तान है। पड़ोसी देश हैं। एक तरफ वे नक्शा लगाते हैं अखंड भारत का। दूसरी तरफ कहते हैं कि मुसलमानों को पाकिस्तान भेज दो। एक तरफ मुसलमानों को कहते हैं कि पाकिस्तान चले जाओ। दूसरी तरफ कहते हैं कि उसको अखंड भारत में मिला लिया जाए। ये गोरखधंधा क्यों कर रहे हैं ये लोग? अब अखंड भारत बनाओगे ताे वे फिर यहीं आ जाएंगे। आज जितनी जनसंख्या है मुसलमानों की उससे कई गुना बढ़ जाएगी। फिर अखंड भारत का क्या होगा? यह सब षड्यंत्र और गुमराह करने का काम है।

भाजपा के लिए पूछा - उनका आंतरिक लोकतंत्र कहां है

भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष के बाद नेता प्रतिपक्ष बदले जाने की चर्चा पर मुख्यमंत्री ने पूछा कि उनका आतंरिक लोकतंत्र कहां है। अभी जो नेता प्रतिपक्ष हैं उनको भी विधायक दल पर भरोसा नहीं है। जो बनाए जाने वाले हैं, उनको भी नहीं है। ऐसे में उनका आंतरिक लोकतंत्र कहा हैं, जिसकी ये लोग दुहाई देते हैं।

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