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केंद्र की चिट्ठी के बाद 28 जिलों का जवाब भेजा:केंद्र ने पूछा-राज्य में ऑक्सीजन की कमी से कितनी मौतें, मंत्री सिंहदेव बोले-एक भी नहीं

रायपुर2 महीने पहले
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ऑक्सीजन की कमी से मौत की कुछ शिकायतें तो जरूर आईं, पर साबित नहीं हो सकीं: स्वास्थ्य मंत्री। - Money Bhaskar
ऑक्सीजन की कमी से मौत की कुछ शिकायतें तो जरूर आईं, पर साबित नहीं हो सकीं: स्वास्थ्य मंत्री।

संसद में पिछले हफ्ते केंद्र सरकार के इस दावे के बाद कि देश में ऑक्सीजन की कमी से किसी कोरोना मरीज की मौत नहीं हुई, हंगामा खड़ा हो गया था। केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग ने अपने जवाब में कहा था कि राज्यों की ओर से उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं भेजी गई है।

भास्कर की पड़ताल में यह बात सामने आई कि केंद्र ने इस साल प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग से यह जानकारी मांगी ही नहीं है। यह बात जरूर है कि सोमवार को भोपाल में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने बयान दिया था कि छत्तीसगढ़ में एक भी कोरोना मरीज की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई, क्योंकि यहां ऑक्सीजन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थी। यहां तक कि कोरोना के पीक यानी 26-27 अप्रैल को राज्य में 180 टन ऑक्सीजन की रोज जरूरत पड़ रही थी, तब भी यहां उत्पादन रोजाना 410 टन था। इस बीच, केंद्र से गुरुवार को चिट्ठी आने के तुरंत बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी 28 जिलों के सीएमएचओ से पूछ लिया है कि उनके यहां ऑक्सीजन की कमी से कितनी मौतें हुई हैं?

संसद में विपक्ष ने इस मुद्दे पर भी केंद्र सरकार को घेरा था कि केंद्र ने इस बारे में राज्यों से भी कोई जानकारी नहीं मांगी है। यही वजह है कि हंगामे के तत्काल बाद केंद्र की तरफ से ऑक्सीजन की कमी से मौत की जानकारी मांगी गई है। केंद्र का पत्र मिलते ही हेल्थ डायरेक्टर ने सभी जिलों के सीएमएचओ को पत्र लिखा है कि ऑक्सीजन से कमी से मौत की जानकारी तत्काल भेजी जाए। जिलों से इसका ब्योरा आने में दो-तीन दिन लगेंगे, लेकिन इस बारे में गुरुवार को प्रदेश के महामारी नियंत्रक डा. सुभाष मिश्र ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी जानकारी में अब तक प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत नहीं हुई है।

पीक में ऑक्सीजन बेड के लिए ही ज्यादा मारामारी
प्रदेश में अप्रैल में पीक था, जब सबसे ज्यादा मरीज मिले और मौतें भी सर्वाधिक हुईं। उस वक्त निजी और सरकारी को मिलाकर राज्य के अस्पतालों में 21 हजार बेड उपलब्ध थे, जिसमें 5400 से ज्यादा बेड ऑक्सीजन और आईसीयू वाले थे। फिर भी, राजधानी में आईसीयू के साथ-साथ ऑक्सीजन बेड की ऐसी मारामारी थी कि मरीजों को बेंचों पर लिटाकर और व्हीलचेयर पर बिठाकर भी सिलेंडर लगाए गए थे। पूरे अप्रैल माह और मई के दूसरे हफ्ते तक लगभग हर अस्पताल के बेड फुल थे। इस दौरान कई मरीजों की मृत्यु अस्पताल के बाहर भी हुई। हालांकि किसी अस्पताल प्रबंधन या स्वास्थ्य अफसरों ने स्वीकार नहीं किया कि मौतें ऑक्सीजन की कमी से हुई थीं।

अप्रैल में 1501 मरीजों की मौत
राजधानी में अप्रैल में 1501 मरीजों की मौत कोरोना से हुई थी। इनमें केवल रायपुर और आउटर के लोग थे। अगर बाहर से आए रेफर केस में हुई मौतों को मिलाया जाए तो यह संख्या दोगुनी थी और ऑक्सीजन या आईसीयू बेड की सबसे ज्यादा दिक्कत राजधानी में ही थी। अप्रैल के बाद राजधानी में बेड कुछ-कुछ खाली होने लगे थे। और कोरोना केस में कमी आने लगी थी। उस माह 695 मरीजों की मृत्यु हुई, हालांकि रिकार्ड में किसी की भी मृत्यु की वजह ऑक्सीजन की कमी दर्ज नहीं है।

अभी विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं
मैंने 1 मार्च से हुई मौतों की जानकारी मांगी है। इस दौरान कोरोना से लगभग 10 हजार मौतें हुईं। ऑक्सीजन की कमी से कुछ मौतों की शिकायत थी, लेकिन जांच में यह साबित नहीं हुआ, इसलिए अभी यह कह सकते हैं कि एक भी मौत नहीं हुई। विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
-टीएस सिंहदेव, स्वास्थ्य मंत्री

इस साल 26 व 27 अप्रैल को सबसे ज्यादा 180 टन ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी। तब प्रदेश में 410 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा था और प्रदेश हमेशा सरप्लस रहा।
डॉ. अयाज तंबोली, नोडल अफसर ऑक्सीजन

प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत की जानकारी नहीं है। केंद्र के पत्र के बाद सभी 28 जिलों से इस बारे में जानकारी मांगी है। जवाब मिलते ही केंद्र को भेज दिया जाएगा।
-डॉ. सुभाष मिश्रा, डायरेक्टर महामारी नियंत्रण