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खदानों में अवैध ब्लास्टिंग पर्यावरण क्लियरेंस खत्म:जिन 81 खदानों की क्लियरेंस अप्रैल और मई में खत्म हो गई है वे अब अप्रैल-मई 2023 तक खदानों में ब्लास्टिंग कर सकेंगे

रायपुरएक महीने पहले
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जिले की 185 गिट्टी खदानों में 81 खदानों की पर्यावरण क्लियरेंस (ईसी) खत्म हो गई है। लेकिन इन सभी खदान संचालकों को राहत देने के लिए बेहद खामोशी के साथ सभी की ईसी एक साल के लिए बढ़ा दी है। तर्क दिया गया है कि कोरोना काल में सभी तरह के काम और सरकारी दफ्तर बंद होने की वजह से पर्यावरण क्लियरेंस का काम पूरा नहीं पाया है।

इस वजह से जिन 81 खदानों की क्लियरेंस अप्रैल और मई में खत्म हो गई है वे अब अप्रैल-मई 2023 तक खदानों में ब्लास्टिंग कर सकेंगे। इसके अलावा जिनका क्लियरेंस 2023 में खत्म हो रहा है उन्हें 2024 में पर्यावरण क्लियरेंस लेना होगा। पर्यावरण क्लियरेंस एक साल आगे बढ़ाने के लिए खदान संचालकों ने प्रशासन पर जबर्दस्त दबाव बनाया था।

जिन खदान संचालकों की ईसी खत्म हो गई थी, उनमें कई बड़े राजनेता भी शामिल हैं। खदान संचालकों ने राज्य सरकार पर दबाव बनाया कि लॉकडाउन में सभी काम पूरी तरह से बंद थे, इस वजह से खदानों में भी काम नहीं हुआ। ऐसे में उन्हें पर्यावरण क्लियरेंस एक साल अतिरिक्त दिया जाए, जिससे वे खदानों में हुए नुकसान को पूरा कर सकें।

हैवी ब्लास्टिंग की शिकायत करने वाले सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने बताया कि संचालकों को विस्फोटक अधिनियम 2008 के नियम 113 के तहत आवेदन कर हैवी ब्लास्टिंग के लिए लाइसेंस लेना जरूरी है। खदान में हर साल उत्पादन क्षमता के अनुसार ही खान सुरक्षा निदेशालय (डीजीएमएस) के प्रतिवेदन पर ब्लास्टिंग करने की अनुमति दी जाती है। ब्लास्टिंग के लिए लाइसेंसधारी कंपनी से ही बारूद लिया जा सकता है। इसी में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है।

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