पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX60821.62-0.17 %
  • NIFTY18114.9-0.35 %
  • GOLD(MCX 10 GM)476040.47 %
  • SILVER(MCX 1 KG)650340.55 %

दो माह में 350 गांवों में चलाया अभियान:बीमारियों से बचाने गंदे पानी के टेस्ट का बीड़ा उठाया 1769 महिलाओं ने, घर-घर में जांच

रायपुरएक महीने पहलेलेखक: संदीप राजवाड़े
  • कॉपी लिंक
  • किट लेकर निकली महिला टीमों ने किए 4704 टेस्ट, दूषित मिले 20 से ज्यादा स्त्रोत भी किए सील

राजधानी के सभी ब्लॉक और गांवों में दूषित पानी पीने से होने वाली बीमारियों को रोकने और पानी गुणवत्ता सुधारने का जिम्मा अब महिलाएं संभाल रही हैं। राजधानी के आउटर समेत रायपुर जिले के 350 से ज्यादा गांव की 1769 महिलाएं इस अभियान से जुड़ चुकी हैं। हर गांव-पंचायत में 2 से 5 महिला सदस्यों की टीम खुद अपने गांव में घर-घर जाकर पानी के सोर्स से सैंपल लेकर जांच कर रही है। दो महीने में 4000 से ज्यादा सैंपल की जांच हो चुकी है।

जहां का पानी अमानक मिला, उसका उपयोग करने को मना कर दिया गया और तकरीबन 20 स्त्रोत महिलाओं ने सील करवा दिए हैं। इसका बड़ा लाभ यह हो रहा है कि ग्रामीण इलाकों में भी लोग दूषित पानी को लेकर जागरुक हो रहे हैं। केंद्र सरकार ने इस बजट में पानी की गुणवत्ता को सुधारने के लिए गांव-गांव में अभियान चलाने की घोषणा की थी। जुलाई से इसे लागू कर दिया गया। इसमें रायपुर समेत प्रदेश के हर जिले से महिलाओं को वॉलेंटियर के तौर पर जोड़कर अभियान चलाया जा रहा है। ट्रेनिंग के बाद ये महिलाएं अपने गांव में पानी के सोर्स की जांच कर रही हैं। इसके लिए उन्हें टेस्ट किट में सभी जांच के मानक व रिजेंट दिए गए हैं। जिस व्यक्ति को अपनेे पीने के पानी के सोर्स या हैंडपंप के वाटर सैंपल की जांच करानी हो, वे इनसे संपर्क कर सकते हैं।

ये महिलाएं मौके पर ही हैंडपंप से पानी का सैंपल लेती हैं और तत्काल जांच कर बता देती हैं कि यह पानी पीने लायक है या नहीं। फिर सैंपल रिपोर्ट को विभाग को भेज देती हैं। अगर कहीं कोई पानी अमानक मिला तो उस स्रोत का सैंपल की जांच करने दोबारा पीएचई विभाग के लैब की टीम आती है। आयरन, क्लोराइड, नाइट्रेट या अन्य कोई केमिकल की मात्रा पानी में बहुत ज्यादा होने पर उसका उपयोग करने को मना कर दिया जाता है। हैंडपंप पर लाल रंग से निशान लगा दिया जाता है, ताकि लोग पीने में इसका इस्तेमाल न करें।

अत्याधुनिक टेस्ट किट उपलब्ध कराए गए
पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए महिलाओं को दिए गए फील्ड टेस्ट किट में क्लोराइड रिएजेंट, हार्डनेस रिएजेंट, आयरन, नाइट्रेट, हाइड्रोक्लोरिन, फ्लोराइड, क्लोरिन, पीएच स्ट्रिप के साथ टर्बिडिटी के लिए तीन अलग-अलग सैंपल कलेक्ट करने के बोतल दी हैं। इसके माध्यम से हर गांव में बनी महिलाओं की टीम खुद जांचती है अौर रिपोर्ट देती है।

सबसे ज्यादा तिल्दा और धरसींवा में जुड़ीं
जानकारी के अनुसार इस मिशन में अब तक रायपुर जिले के तिल्दा में करीबन 120 गांव में 550 से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं। इसके बाद धरसींवा के 100 गांव की 450, आरंग के 95 गांव की 400 और अभनपुर के 90 गांव की 369 से ज्यादा महिलाएं जुड़ चुकी हैं। इसमें और गांव व महिलाओं की संख्या हर दिन बढ़ती जा रही है। इनकी तरफ से अब तक 4704 सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं। 20 जगह ऐसे पानी के सोर्स मिले, जिसका पानी पीने के लायक नहीं था। इसका उपयोग पीने के लिए तत्काल बंद कर दिया गया है।

केंद्र सरकार के इस अभियान से गांवों की महिलाओं को जोड़ा गया है, वे वॉलेंटियर बनकर ट्रेनिंग ली हैं और खुद अपने गांव में पानी के सैंपल जांच रही हैं। उनके जुड़ने से यह फायदा हुआ कि हर जगह के पानी की जांच हो पा रही है।
-बीएन भोयर, ईई, पीएचई रायपुर

खबरें और भी हैं...