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शिकायत:सूखत की राशि वसूली से लैंपस नाराज, नहीं करेंगे धान खरीदी

कांकेरएक महीने पहले
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कांकेर। बैठक में उपस्थित जिलेभर के लेम्पस पदाधिकारी। - Money Bhaskar
कांकेर। बैठक में उपस्थित जिलेभर के लेम्पस पदाधिकारी।
  • पदाधिकारी बोले- घाटे में है लैंपस, कर्मचारियों को वेतन तक नहीं दे पा रहे

जिले के लैंपसों में धान का परिवहन समय पर नहीं होने के कारण आए सूखत की राशि लैंपसों से वसूले जाने को लेकर लैंपस पदाधिकारियों ने विरोध जताया है। लैपस संघ ने नाथियानवागांव में जिला स्तरीय बैठक आयोजित कर इस बार शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर की जाने वाली धान खरीदी नहीं करने का फैसला लिया।

रविवार को हुई बैठक में जिले के सभी ब्लॉकों के लैम्पस पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में इस साल धान खरीदी की जिम्मेदारी लैंपस द्वारा नहीं लिए जाने का प्रस्ताव रखा। इस पर सभी लैम्पस पदाधिकारियों ने अपनी सहमित दी। इसको लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपने का फैसला लिया गया।

संघ पदाधिकारियों ने कहा कि शासन द्वारा सूखत को लेकर सारी जिम्मेदारी लैंपस पर ही डाल दी गई है। अनुबंध के तहत शासन को खरीदी केंद्र से 72 घंटे में धान का परिवहन करना है, लेकिन ऐसा नहीं किया जाता। कई दिनों तक धान का परिवहन नहीं होता है और इससे सूखत आती है। इसका भुगतान लैम्पसों से लेना अनुचित है।

बैठक में दो वर्षों से सूखत आने से लाखों रूपए की वसूली के लिए नोटिस भेजे जाने की बात भी रखी गई। पदाधिकारियों ने कहा कि दो सालों से सूखत ज्यादा आ रही है। इसके पहले इतनी ज्यादा परेशानी नहीं थी। सूखत से लैंपस पर आर्थिक भार बढ़ रहा है। लैंपस फायदा में नहीं चल कर नुकसान में हैं।

इसके चलते कर्मचारियों को भी वेतन नहीं दे पा रहे हैं। फिर भी शासन को लाखों रुपए का भुगतान कैसे करें। जिला विपणन कार्यालय से लैंपस के पास 500 क्विंटल न्यूनतम से लेकर अधिकतम 3200 क्विंटल का भुगतान करने के लिए कहा गया है। इसमें सूखत का 20 लाख से 60 लाख तक का भुगतान करने के लिए दबाव डाला जा रहा है।

राशि जमा नहीं करने पर एफआईआर की धमकी

लैंपस के पदाधिकारियों ने कहा कि उन्हें सूखत राशि जमा करने नोटिस पहुंचा है। इसमें राशि जमा करने के लिए पांच दिन का समय दिया गया है। राशि जमा नहीं करने पर एफआईआर करवाए जाने की धमकी दी जा रही है। लैंपस के पदाधिकारियों की शिकायत है कि खरीदी केंद्र में काम करने वाले हमालों को धान लोडिंग की भी मजदूरी राशि नहीं दी जा रही है। सिर्फ धान छल्ली करने का ही पैसा दिया गया है। हमालों को पैसा नहीं मिल पाया है और हमाल लैंपस समिति को परेशान कर रहे है।

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