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वर्ल्ड टाइगर डे:बीजापुर के गांवों में सुनाई देती है दहाड़, ITR में 5 बाघ हुए कैमरे में कैद; अफसर बोले- लोकेशन नहीं बताएंगे, शिकारियों से खतरा है

जगदलपुर/बीजापुर3 महीने पहले
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इंद्रावती टाइगर रिजर्व (ITR) में पिछले डेढ़ सालों में अलग-अलग लोकेशन में 5 टाइगर की तस्वीर कैमरे में कैद हुई है। - Money Bhaskar
इंद्रावती टाइगर रिजर्व (ITR) में पिछले डेढ़ सालों में अलग-अलग लोकेशन में 5 टाइगर की तस्वीर कैमरे में कैद हुई है।

बस्तर संभाग के इंद्रावती टाइगर रिजर्व (ITR) में कुछ साल पहले टाइगर के नहीं होने की बात सामने आई थी। इसके बाद ITR ने कुछ इलाकों में कैमरा लगवाया था। इन कैमरों में डेढ़ साल के दौरान अलग-अलग लोकेशन में 5 टाइगर की तस्वीर कैद हुई है। वन विभाग के अफसर बाघों को शिकारियों से बचाने के लिए इनकी लोकेशन को सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं। बीजापुर जिले के अंदरूनी गांवों में बाघों की दहाड़ सुनाई देती है।

बाघों की सुरक्षा को देखते हुए विभाग ने लोकेशन को सार्वजनिक नहीं किया है।
बाघों की सुरक्षा को देखते हुए विभाग ने लोकेशन को सार्वजनिक नहीं किया है।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में है 8 रेंज, 2 में दिखे थे टाइगर
वाइल्ड लाइफ के सीसीएफ अभय श्रीवास्तव ने बताया कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 8 रेंज हैं। टाइगर को ट्रैप करने के लिए इन इलाकों में कैमरे लगाए गए थे। इनमें से दो रेंज में लगाए गए कैमरों में अलग-अलग लोकेशन में कुछ महीनों पहले 5 बाघ की तस्वीर कैद हुई थी। फिलहाल, इसी के आधार पर 5 बाघ होने की पुष्टि हुई थी। हालांकि, शिकारियों के खतरे के कारण लोकेशन सार्वजनिक नहीं की जा सकती है।

सोमनपल्ली में ग्रामीणों ने बाघ की दहाड़ सुनी थी।
सोमनपल्ली में ग्रामीणों ने बाघ की दहाड़ सुनी थी।

सोमनपल्ली में ग्रामीणों ने सुनी थी बाघ की दहाड़
बीजापुर जिले के धुर नक्सल प्रभावित इलाके सोमनपल्ली के ग्रामीणों ने बताया कि वे कुछ दिन पहले जंगल में बांस लेने गए हुए थे। इसी बीच जंगल में 2 बाघों की दहाड़ सुनाई दी थी। दहाड़ सुनकर ग्रामीण फौरन जंगल से भाग खड़े हुए थे। ग्रामीणों के अनुसार केवल सोमनपल्ली ही नहीं इसके आसपास के क्षेत्रों में भी बाघ की दहाड़ सुनाई देती है। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में आते-जाते रहते हैं टाइगर
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से महाराष्ट्र की सीमा लगती है। दोनों राज्यों के बीच घनघोर जंगल और पहाड़ी वाला इलाका है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व के बाघ छत्तीसगढ़ से महाराष्ट्र के इलाकों में पहुंच जाते हैं। हालांकि, कुछ समय बाद वे वापस छत्तीसगढ़ लौट जाते हैं।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ का शिकार भी नहीं रुक रहा है।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ का शिकार भी नहीं रुक रहा है।

नहीं रुक रहा शिकार
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ का शिकार भी नहीं रुक रहा है। ज्यादातर बीजापुर और दंतेवाड़ा जिले के सरहदी इलाकों में बाघ का शिकार किया जाता है। शिकारी जंगल व पहाड़ी इलाके में करंट का जाल बिछाकर बाघ को फंसाने की कोशिश करते हैं। कुछ दिन पहले बाघ की खाल समेत कुछ तस्कर पकड़े भी गए थे। दंतेवाड़ा के भांसी थाना इलाके में बाघ का शिकार हुआ था।

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