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कालाबाजारी:सरकारी आदेश में व्यापारियों पर कालाबाजारी का आरोप

गरियाबंद4 महीने पहले
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खाद्य सामग्रियों की कालाबाजारी को लेकर जिला प्रशासन ने अफसरों की ड्यूटी लगाई है, जिससे मामले ने तूल पकड़ लिया। जहां पिछले दिनों छापामार कार्रवाई की गई उसमें शिकायत झूठी निकली। इससे बौखलाए व्यापारियों को परेशान करने की नियत से अफसरों की ड्यूटी लगा दी गई है। इसकी व्यापारियों में चर्चा है।

जनसंपर्क विभाग से जारी एक प्रेसनोट सुर्खियों में है। प्रेसनोट में सीधे व्यापारियों पर जमाखोरी और कालाबाजारी का आरोप लगा दिया गया है। प्रेसनोट में दर्शाया गया है कि कोविड-19 एवं नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के संक्रमण के दौरान विभिन्न माध्यमाें से सूचना मिल रही है कि बड़े व्यापारियों एवं किराना व्यवसायियों द्वारा खाद्य सामग्रियों एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी की जा रही है तथा ज्यादा दामों में विक्रय किया जा रहा है।

इस संबंध में प्राप्त शिकायतों की जांच एवं निराकरण करने अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जबकि इस संबंध में खाद्य विभाग के अधिकारी से चर्चा करने पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब तक ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है न ही कोई जांच जारी है।भविष्य में ऐसी शिकायत न आए इसके लिए टीम गठित की गई है। वहीं व्यापारियों ने भी ऐसी शिकायत को सीरे से नकारा है। इधर प्रेसनोट जारी होने के बाद से व्यापारियों में नाराजगी है। व्यापारियों का कहना है कि अगर कही शिकायत है तो प्रशासन सीधे कार्रवाई करे लेकिन कालाबाजारी का आरोप लगाकर व्यापारियों की छवि को धूमिल करने का काम न करें। इसे व्यापारी बर्दाश्त नहीं करेंगे।

जनसंपर्क व खाद्य अधिकारी एक दूसरे पर आरोप लगा रहे

इधर मामले में जनसंपर्क विभाग और जिला खाद्य अधिकारी एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं जबकि हकीकत में देखा जाए तो दोनों विभाग ने प्रेसनोट जारी करने के पहले अपने शब्दों पर ध्यान नहीं दिया। जैसे ही प्रेसनोट मीडिया में वायरल हुआ व्यापारियों में इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई। नाम न बताने की शर्त पर कई व्यापारियों ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा बार-बार व्यापारियों के विरूध्द इस प्रकार दबाव बनाने का जो प्रयास किया जा रहा है वह उचित नहीं है। हमने प्रशासन के हर निर्देश का पालन किया है। लाॅकडाउन के समय भी व्यापारियों ने कीमत पर नियंत्रण रखा। वहीं कालाबाजारी की शिकायत को लेकर कुछ दिन पहले भी व्यापारियों ने जिला प्रशासन से चर्चा की थी। इसके बाद भी व्यापारियों पर कालाबाजारी और जमाखोरी का आरोप लगाना समझ से परे है।

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