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18 दिन में 8 टीएमसी पानी आया:75 फीसदी भर चुका गंगरेल, हनुमान मंदिर का चूबतरा आधा डूबा

धमतरीएक महीने पहले
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यह तस्वीर 1 सितंबर की है, जब कम बारिश से गंगरेल बांध का पानी मंदिर के पीछे था। - Money Bhaskar
यह तस्वीर 1 सितंबर की है, जब कम बारिश से गंगरेल बांध का पानी मंदिर के पीछे था।
  • अंगारमाेती मंदिर के पीछे बने मंदिर में हनुमानजी के चरणों तक पानी आते ही खोले जाते हैं गेट, औसत 69.09% भरे 4 बांध

14 सितंबर को भारी बारिश से प्रदेश में दूसरे नंबर के बांध गंगरेल में सितंबर के 18 दिन में ही 8.657 टीएमसी (1 टीएमसी पानी का मतलब 28 खरब 31 करोड़ 68 लाख 46 हजार 592 लीटर) पानी आया है। यह अब तक भरे बांध का 30 प्रतिशत से ज्यादा है। अब बांध 75 फीसदी भर चुका है। अंगारमाेती मंदिर के पीछे की ओर बने हनुमानजी के मंदिर का आधा चबूतरा डूब गया है।

मंदिर में स्थापित प्रतिमा के चरणाें तक पानी पहुंचते ही गेट खाेल दिए जाते हैं। पानी का यह जलस्तर गेट खाेलने के जल स्तर के बराबर है। सितंबर में अब तक चाराें चारों बांध में 12.306 टीएमसी पानी आया हैं। गंगरेल सहित 3 बांधों में पानी का 69.09% जलभराव हो गया है।

बांध पूरा भरने पर सीढ़ियां और चबूतरा डूब जाते हैं

गंगरेल बांध में भरपूर पानी नहीं होने से खुले गेट व पानी देखने आने वाले पर्यटक भी नहीं आ रहे है। मां अंगार मोती मंदिर के ठीक पीछे 50 मीटर दूर नदी तट पर हनुमान जी का मंदिर है। गंगरेल बांध पूरा भरने पर मंदिर की सीढ़ियां और चबूतरा पानी से पूरा डूब जाता है। पानी हनुमानजी की प्रतिमा के पैरों तक पहुंचता है, तो बांध के गेट खोलने की स्थिति बन जाती है। हालांकि अभी गंगरेल बांध को भरने के लिए 8.014 टीएमसी (24.93%) पानी की और जरूरत है।

चिंता दूर, क्योंकि चारों बांधों में अब पर्याप्त पानी

गंगरेल सहित सहायक बांध मुरुमसिल्ली, सोंढूर व दुधावा में पर्याप्त पानी है। अब यदि बारिश भी नहीं होती है तो चारों बांधों के पानी से धमतरी, रायपुर नगर निगम को पीने, भिलाई स्टील प्लांट और सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी दिया जा सकता है।

ये भी जानिए

  • गंगरेल, मुरुमसिल्ली, दुधावा व सोंढूर बांध में कुल 38.124 टीएमसी पानी हैं, इनमें से 32.119 टीएमसी उपयोगी पानी है।
  • 2019 में गंगरेल 3 बार लबालब भरा, 3 बार गेट खाेलकर 21 टीएमसी पानी महानदी में छोड़ा गया था।
  • गंगरेल बांध धमतरी, रायपुर, बलौदाबाजार, बालोद को पानी देता है।
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