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नेरली घाट दुर्घटना:बंदर की मौत के बाद ग्रामीणों ने ली जिम्मेदारी, बोले- बंदरों को खाना खिला बीमार करने वालों की खैर नहीबंदर की मौत के बाद ग्रामीणों

बचेली4 महीने पहले
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नेरली घाट की सड़क में मृत पड़ा बंदर - Money Bhaskar
नेरली घाट की सड़क में मृत पड़ा बंदर

नेरली घाट में दुर्घटना में बंदरों की मौत के बाद अब वन विभाग, पर्यावरण प्रेमी व वन्य जीव संरक्षण दल के सर्पमित्र अब स्थानीय ग्रामीणों की मदद लेंगे। खुद ग्रामीण भी निगरानी के लिए आगे आए हैं। इनकी सहायता से वानरों को भोजन सामग्री रोड पर फेंकना बंद करवाने की योजना बनाई हैं। वन परिक्षेत्र अधिकारी गयादिन वर्मा ने बताया लंबे समय से मुहिम चलाई जा रही है कि बन्दरो को इंसानी खाना नहीं दिया जाए। इंसानी खाना खाकर ये बीमार तो पड़ ही रहे हैं साथ ही सड़कों पर आने की वजह से दुर्घटना का शिकार भी होते हैं। इस स्थान पर वन विभाग ने चेतावनी बोर्ड भी लगाया है। परंतु लोग अपनी हरकतों से बाज नही आ रहे जिसका खामियाजा इन बेजुबानों को अपनी जान गंवाकर भुगतना पड़ रहा है।

समझना होगा कि बन्दरो के खाने के लिए जंगल भरे पड़े हैं। उन्हें इंसानी चटपटे खाने का प्रलोभन देकर हम उनके साथ खिलवाड़ कर रहे। वन विभाग भी अब ऐसे लोगो पर कड़ी कार्रवाई करने की योजना बनाई हैं। वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी घटना स्थल जाकर स्थानीय ग्रामीणों को एकत्र कर उन्हें दंडविधान कानूनी जानकारी देकर सहायता की अपील की। पशु प्रेमी अमित मिश्रा ने कहा कि बन्दरो को इंसानी खाना देना ये ठीक उसी प्रकार है जैसे इंसानों को जंगल मे छोड़कर बन्दरो का खाना खिलाना। जिस प्रकार हमारा शरीर उस जंगली भोजन के अनुरूप नही ढला हैं।

उसी प्रकार बन्दरो का शरीर भी इंसानी भोजन के अनुरूप नहीं है। सभी जीवों के लिए प्रकृति ने भोजन निर्धारित किया हुआ हैं। सभी से अपील है कि बन्दरो को इंसानी खाना देना बंद करे। हमे समझना होगा की बन्दरो को भोजन देकर पुण्य नहीं कमा रहे अपितु जाने अनजाने में पाप के भागीदार बन रहे हैं। इधर ग्रामीणों ने कहा कि बंदरों को खाना खिलाकर बर्बाद करने वालों की अब खैर नहीं।

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