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सेवा में कमी:लर्निंग एप व हाउसिंग बोर्ड भरेंगे जुर्माना

रायगढ़2 महीने पहले
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कोरोना लॉकडाउन के बाद अब जिला उपभोक्ता फोरम में सुनवाई शुरू हो गई है। ग्राहकों के मनमानी या सेवा में कमी के दो मामलों में फोरम ने अपना फैसला सुनाया है। ऑनलाइन ट्यूशन के नाम पर रजिस्ट्रेशन कराकर ज्यादा रुपए मांगने वाली कंपनी और हाउसिंग बोर्ड द्वारा विज्ञापन के मुताबिक घर नहीं देने पर फोरम ने ग्राहकों को हर्जाना देने के आदेश दिए हैं।

छात्र से फीस ली पर ऑनलाइन क्लास नहीं कराई
धरमजयगढ़ के स्टूडेंट युवराज कुमार भारद्वाज ने उपभोक्ता फोरम में परिवाद दायर किया था। कोरोनाकाल में एनईईटी के ऑनलाइन कोर्स के लिए वह वेदांतू इनोवेशन प्रालि के लर्निंग एप्लीकेशन वेदांतू में हिस्सा लिया था। 17 सितंबर 2020 को 9 हजार रुपए फोन-पे के माध्यम से भेजे। इसके बाद विद्यार्थी ने संस्था का एप्लीकेशन डाउनलोड कर उसमें पढ़ाई शुरू किया। एप्लीकेशन में परेशानी आने पर विद्यार्थी ने संस्था से संपर्क कर रिफंड मांगा। संस्था ने 90 हजार रुपए और भुगतान करने के लिए कहा गया। परेशानियों के कारण विद्यार्थी ऑनलाइन कोर्स नहीं कर पाया। उसने उपभोक्ता फोरम में अधिवक्ता हरीश कुमार नेताम के जरिए परिवाद दायर किया। उपभोक्ता फोरम ने छात्र के पक्ष में फैसला सुनाया। वेदांतू विद्यार्थी को 45 दिनों के भीतर 11 हजार रुपए देने का आदेश पारित किया है।

हाउसिंग बोर्ड देगा 5 लाख 6875 रुपए का हर्जाना
बोइरदादर की प्रतिमा चौहान शिक्षाकर्मी वर्ग-2 हैं। प्रतिमा ने हाउसिंग बोर्ड का एमआईजी मकान लेने के लिए 29 अक्टूबर 2015 में पंजीयन कराया था। रजिस्ट्रेशन के 2 लाख 82 हजार रुपए दिए, जबकि एमआईजी मकान की कीमत 18.75 लाख थी। शिक्षाकर्मी ने तीन किस्तों में 4.65 लाख रुपए और चौथी किस्त में 1 लाख 98 हजार रुपए दिए। उन्हें 2016 में मकान से संबंधित दस्तावेज मिले। जिसमें 835 वर्गफुट में मकान बनाने का जिक्र था। शिक्षाकर्मी ने जब पंजीयन कराया तब आवेदन में 1000 वर्गफुट पर मकान की बात कही गई थी। उन्हें 165 वर्गफुट जमीन कम दी गई। इसका विरोध करते हुए प्रतिमा ने फोरम में परिवाद पेश किया। आदेश के मुताबिक अब हाउसिंग बोर्ड को 45 दिन के भीतर 4.97 लाख रुपए बतौर हर्जाना और 10 हजार मानसिक क्षतिपूर्ति राशि देनी होगी।

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