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सुस्त तैयारी:मेडिकल कॉलेज में 960 लीटर क्षमता वाला ऑक्सीजन प्लांट तीन महीने बाद भी शुरू नहीं

रायगढ़2 महीने पहले
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इंस्टॉल किया गया ऑक्सीजन गैस प्लांट। - Money Bhaskar
इंस्टॉल किया गया ऑक्सीजन गैस प्लांट।
  • दो नए पीएसए और 12 हजार लीटर के ऑक्सीजन प्लांट लग रहे हैं जिले के अस्पतालों में

अगस्त-सितंबर में कोरोना की तीसरी लहर आने की चर्चा है। जिले में तैयारियां जोरों पर हैं लेकिन मेडिकल कॉलेज में चल रहा काम धीमा है। 3 महीने में 960 लीटर के ऑक्सीजन प्लांट को शुरू नहीं किया जा सका है। दो नए 1-1 हजार लीटर के पीएसए और एक 12 हजार लीटर का ऑक्सीजन प्लांट का काम भी अभी शुरुआती चरण में हैं। अगर कोरोना ने फिर जोर पकड़ा तो स्वास्थ्य विभाग को फिर ऑक्सीजन के लिए उद्योगों के भरोसे रहना पड़ सकता है ।

दूसरी लहर में देशभर में ऑक्सीजन की कमी से कई मौतें हुईं। जिले में हालांकि उद्योगों से पर्याप्त ऑक्सीजन सप्लाई हुई लेकिन फ्लोमीटर और दूसरे उपकरणों की कमी से जिले में भी परेशान खड़ी हुई। 200 बेड के मेडिकल कॉलेज में 3 महीने पहले 960 लीटर क्षमता वाला पीएसए (प्रेशर स्विंग एब्सॉर्प्शन) लगाया गया था। मशीन इंस्टाल की जा चुकी है लेकिन शुरू नहीं हो सकी है। अफसर बताते हैं कि एमसीबी स्विच जल गया है । एमसीबी कोई भी मामूली इलेक्ट्रिशियन लगा सकता है । एमसीएच और केजीएच में 1-1 हजार लीटर की नई पीएसए मशीन इंस्टालेशन चल रहा है। 12 हजार लीटर वाला एक लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट मेडिकल कॉलेज के नए चिकित्सालय में इंस्टाल होना है। जिसका अभी तक फाउंडेशन वर्क भी पूरा नहीं हो पाया है।

रोजाना 2.79 करोड़ लीटर तक की खपत
स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों से मिली जानकारी के मुताबिक कोरोना के पिक अप्रैल-मई में जिले में प्रतिदिन साढ़े 4 हजार बड़े सिलेंडरों की खपत हुई है। यानि कि एक दिन में ही लगभग 2 करोड़ 79 लाख लीटर तक ऑक्सीजन की खपत हो रही थी। ऐसे में ऑक्सीजन की जरूरत और मरीजों की गंभीरता को समझा जा सकता है। एमसीएच और केजीएच में ही प्रति दिन 2 हजार बड़े सिलेंडरों की खपत होती थी। ऑक्सीजन के लिक्विड प्लांट बन जाने से आम लोगों को ऑक्सीजन के लिए काफी राहत मिलेगी।

आईसीयू में प्रति मिनट मरीज को चाहिए 50-60 लीटर
सामान्य बेड पर रहने वाले मरीज को हर मिनट 10 लीटर ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती थी। वहीं वेंटिलेटर पर 25 से 30 लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट चाहिए, लेकिन कोविड मरीजों को ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इन्हें अभी हाई फ्लो नेजल ऑक्सीजन (एचएफएनओ) थेरेपी दी जाती है। इसमें एक मरीज को एक मिनट में 50 से 60 लीटर ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। 12 हजार लीटर का एक प्लांट तो अभी इंस्टाल हो रहा है। मेडिकल कॉलेज में लगा 960 लीटर वाली पीएसए मशीन अभी चालू क्यों नही है। मैं अपडेट लेकर बताता हूं।
-पीएम लुका, डीन, मेडिकल कॉलेज

इंस्टॉल कराएंगे मशीन
15 अगस्त की डेडलाइन है, तब तक काम पूरा कर लिया जाएगा । फाउंडेशन वर्क होने के बाद मशीन इंस्टॉल कर दी जाएगी। थर्ड वेब की तैयारियों के लिए है। मेडिकल कॉलेज वाला मेरे हिस्से का नहीं है, इसलिए ज्यादा जानकारी नहीं है।
-एसएन केसरी, सीएमएचओ

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