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कार्यक्रम आयोजन:मांदर की थाप में नाचते-गाते भोजली किया विसर्जित, लोगों को बांटा प्रसाद

बाराद्वार2 महीने पहले
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घरों से तालाब तक भोजली विसर्जन करने पहुंचे ग्रामीण। - Money Bhaskar
घरों से तालाब तक भोजली विसर्जन करने पहुंचे ग्रामीण।

छत्तीसगढ का पारंपरिक त्यौहार भोजली पर्व ग्राम दुरपा, भागोडीह, मुक्ताराजा व आसपास के गांवों में हर्षोल्लास पूर्वक और धूमधाम से मनाया गया। ग्राम दुरपा में भोजली को लेकर गांव के ननकी तालाब के पास मेला जौसा माहौल दिखा। ग्रामीण अपने-अपने घरों से तालाब तक भोजली विसर्जन करने के लिए आतिशबाजी करते हुए गाजे-बाजे और मांदर के थाप में नाचते हुए भोजली को देवाला चौक, गुड़ी चैक होते हुए गांव के ननकी तालाब पहुंचे। जहां उन्होंने भोजली का विसर्जन किया। इस अवसर पर ग्राम दुरपा सरपंच धायत्री सुखीराम राठौर ने भोजली बोये हुए सभी युवती व महिलाओं में से प्रथम, द्वितीय व तृतीय आने वाले को प्रतिभागी को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। साथ ही अन्य प्रतिभागियों को भी सांत्वना पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

ग्रामीणों ने बताया कि रक्षाबंधन के दूसरे दीन से मनाने वाले यह भोजली त्यौहार का गांवों में बहुत ही महत्व होता हैं। इस दिन को छत्तीसगढ़ी फ्रेंडशीप-डे के रूप में भी क्षेत्र में मनाया जाता हैं। एक दूसरे को भोजली देकर बधाई देते हुए, मितान बनाने व एक दूसरे के कान में भोजली के पौधे को लगाकर दोस्ती को अटूट बनाने की कसमें भी ली गई। इसके अलावा आसपास के गांवों में भी भोजली त्यौहार धूमधाम से मनाया गया।

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