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डिजिटल रीडिंग दिवस:पणिक्कर की पुण्यतिथि "पढ़ो-बढ़ो’ थीम पर मनाई

राजिम2 महीने पहले
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कार्यक्रम में ऑनलाइन जुड़े प्राध्यापक। - Money Bhaskar
कार्यक्रम में ऑनलाइन जुड़े प्राध्यापक।

शासकीय राजीव लोचन स्नातकोत्तर महाविद्यालय राजिम में भारत सरकार के नीति आयोग, पीएन पणिक्कर फाउंडेशन केरल और शासकीय राजीव लोचन स्नातकोत्तर महाविद्यालय राजिम के संयुक्त तत्वावधान में ऑनलाइन राष्ट्रीय रीडिंग/ डिजिटल रीडिंग दिवस मनाया गया। इसकी थीम थी- \"पढ़ो और बढ़ो\"। यह दिवस पीएन पणिक्कर की पुण्यतिथि के दिन पूरे देश में मनाया जाता है। पणिक्कर केरल के थे और पुस्तकालय आंदोलन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी, साथ ही वे एक समाज सुधारक भी थे। केरल के साक्षरता आंदोलन में भी उनका अहम योगदान रहा है ।

कार्यक्रम के शुभारंभ में ग्रंथपाल लोकेश कुमार द्वारा रीडिंग के लिए प्रतिबद्ध रहने संबंधी शपथ महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को दिलाकर दिलाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत में अध्यक्षीय उद्बोधन संस्था प्रमुख डॉ. सोनिता सत्संगी द्वारा दिया गया जिसमें उन्होंने रीडिंग के महत्व को समझाया तथा पणिक्करजी के योगदान को संक्षेप में बताया। साथ ही सभी को किताब पढ़ने के लिए प्रेरित किया।

नैक प्रभारी डॉ.गोवर्धन यदु ने बताया कि 2022 में राष्ट्रीय रीडिंग दिवस एक माह तक मनाया जाएगा। मनुष्य की चिंतन मनन और कार्यक्षमता की वृद्धि पढ़ने और पढ़ाने से ही जागृत होती है| उन्होंने आगे रीडिंग के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पुस्तकों का अध्ययन करना अतिआवश्यक हो गया है। यह न केवल मनुष्य की बुद्धि को विकसित करती है बल्कि आज के प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी भी है। हमें विद्यार्थियों को शुरुआत से ही पुस्तकों का अध्ययन करने व अपने ज्ञान को विस्तृत करने के लिए उन्हें हमेशा प्रोत्साहित करते रहना चाहिए |

लोकेश कुमार ने पीएन पणिक्कर के योगदान पर विस्तार से चर्चा की तथा आगे कहा कि निश्चित रूप से पढ़ने से ही विद्यार्थियों में व्यक्तित्व का विकास होता है ,जो कि समाज को एक नई ऊंचाई तक पहुंचाता है। इस अवसर पर डॉ. संगीता झा ,प्रो. क्षमा शिल्पा चौहान ,प्रो. श्वेता खरे, , वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो.गोयल, गोपाल राव उरकुरकर, प्रो. एम. एल. वर्मा, डॉ.समीक्षा चंद्राकर, प्रो. चित्रा खोटे, प्रो. राजेश बघेल, प्रो.भानुप्रताप नायक, प्रो.आकाश बाघमारे, प्रो.देवेन्द्र देवांगन, प्रो.मुकेश कुर्रे तथा दिलीप, महिमा, लोकेश्वर, तेज आदि र्विद्यार्थी मौजूद थे।

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