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नक्सली ट्रेनर, जो पुलिस का एनकाउंटर स्पेशलिस्ट बन गया:7 साल में एक करोड़ रुपए से ज्यादा के इनामी 35 नक्सलियों को किया ढेर

दंतेवाड़ा2 महीने पहलेलेखक: लोकेश शर्मा
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छत्तीसगढ़ के बस्तर में माओवादियों की एरिया कमेटी को मजबूती देने में इसी एरिया कमेटी के सचिव का बड़ा हाथ रहा है। करीब 3 हजार से ज्यादा लोगों को संगठन से जोड़ा, 50 से ज्यादा ग्रामीण युवाओं को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी। फिर साल 2013 में सरेंडर किया और 2015 में पुलिस में भर्ती हो गया। अब तक कई एनकाउंटर को लीड कर 1 करोड़ से अधिक के इनामी 35 से ज्यादा नक्सलियों को ढेर कर चुका है। दैनिक भास्कर से अपने नक्सली से TI बनने तक पूरी कहानी बयां की है, पढ़िए उसी की जुबानी....

दैनिक भास्कर से अपने नक्सली से TI बनने तक पूरी कहानी बयां की।
दैनिक भास्कर से अपने नक्सली से TI बनने तक पूरी कहानी बयां की।

मेरा जन्म बीजापुर जिले में हुआ। कक्षा पांचवीं तक वहीं पढ़ाई की, लेकिन एक दिन गणेश अन्ना ( मओवादी गणेश उइके, वर्तमान में सेंट्रल कमेटी मेंबर है।) गांव पहुंच गए। उन्होंने अपने पास बुलाया। शारीरिक फुर्ती को देखकर बाल संघम में भर्ती कर लिया। वहां से नक्सलियों के लिए काम करने की शुरुआत हुई।

इसके बाद फिर माओवाद संगठन के प्रचार-प्रसार के लिए चेतना नाट्य मंडली (CNM) में भर्ती किया गया। भाषण देने में तेज था, इसलिए फिर संगठन का हिस्सा बना लिए। 2 सप्ताह की ट्रेनिंग देकर बंदूक चलाना समेत अन्य कई तरह की बारीकियां सिखाई गईं। एक्टिविटी को देखकर साल LOS का डिप्टी कमांडर, फिर कमांडर बना दिया। यहीं से कमेटी को मजबूती देने की शुरुआत हुई थी। लोगों को माओवाद का पाठ पढ़ाने लगा था।

पैठ जमाना जरूरी था
बताया कि, जब कमांडर बनाया गया था, तो उस समय यह कमेटी बहुत कमजोर थी। नक्सलियों के लिए इस इलाके में पैठ जमाना बेहद जरूरी था। जब उसे इस कमेटी की जिम्मेदारी मिली तो करीब 200 से ज्यादा गांव के 3 हजार से अधिक लोगों को संगठन से जोड़ा था। इन्हीं में से 50 युवाओं को भर्ती कर बंदूक चलाने की ट्रेनिंग दी थी। इसके बाद एरिया कमेटी के सचिव की जिम्मेदारी दी गई।

साल 2013 में सरेंडर कर दिया था।
साल 2013 में सरेंडर कर दिया था।

बकरा खाने के लिए हुआ था विवाद
कहा कि, वो कुछ दिन के लिए अपने गांव गया था। इस बीच संगठन की एक महिला नक्सली को कमेटी का प्रभार दिया था। जब लौटा तो पता चला की बकरा खाने के लिए उसकी निचले कैडर्स की अनबन हुई थी। जब इस बात का विरोध किया तो मुझे ही गलत ठहरा दिया गया। इसके बाद विचार आया कि गांव में नक्सली पुल-पुलिया, सड़क बनने नहीं दे रहे, विकास काम में रोड़ा बन रहे, खुद के लोगों के लिए खाना तक नहीं दे रहे। तो ऐस जगह रहने से बेहतर संगठन छोड़ दूं।

नक्सलियों ने लगा दी थी जनअदालत
संगठन छोड़कर जब घर लौटा तो 1 महीने बाद गणेश उइके ने खबर भिजवाई की सब कुछ ठीक होगा। संगठन को मजबूती देने के लिए काम करो, मैं मिलने आऊंगा। कुछ महीने इंतजार के बाद जब गणेश उइके मिलने नहीं आया तो फिर से घर चला गया। 5 से 6 महीने तक परिवार के साथ रहा। फिर एक दिन एक बड़ा नक्सली लीडर गांव पहुंचा और उसने शक के आधार पर जन अदालत पर खड़ा कर दिया। जहां जान से मारने तक धमकी मिली। फिर किसी तरह से वहां से भाग निकला और सरेंडर कर दिया।

अपनी DRG टीम के साथ।
अपनी DRG टीम के साथ।

इन नक्सलियों के साथ किया है काम
सरेंडर के बाद इसने पुलिस के सामने कई बड़े खुलासे किए थे। इसके बाद इसे साल 2015 में आरक्षक के पद पर भर्ती कर लिया गया। एकाएक पिछले कुछ सालों में कई बड़ी सफलता दिलाई। साथ ही महज 6-7 सालों में लगातार प्रोमोशन पाकर आरक्षक से TI बन गया। वर्तमान में DRG प्रभारी है। साथ ही कई बड़े एनकाउंटर में शामिल होकर 35 से ज्यादा नक्सलियों को ढेर कर दिया है। इनमें 1 लाख से 10 लाख रुपए तक के इनामी माओवादी शामिल हैं।

नक्सलियों की कमर तोड़ रहा

थानेदार बनने से पहले नक्सली था तो एरिया कमेटी के चप्पे-चप्पे से वाकिफ है। हाल ही में इसी इलाके के गांव में जिस जगह कैंप स्थापित किया गया है उसका चिह्नांकन करने अफसरों से इसने चर्चा की थी। वहीं बड़े नक्सली लीडरों को खुली चेतावनी भी दी है। कहा कि, इलाके में अब सड़कें बनेंगी, अस्पताल भी बनेगा। बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल खोले जाएंगे। जिनकी सुरक्षा हम करेंगे। ने बताया कि, एरिया के कई नक्सलियों को ढेर किया गया है। अब यहां केवल 20 से 25 हथियार बंद नक्सली ही हैं। यह सभी सरेंडर कर देश की सेवा करें या फिर इन्हें यहां से खदेड़ा जाएगा।