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बिलासपुर में गांव से लेकर शहर तक बाढ़:बस्तियां-मोहल्ले बने टापू, कॉलोनियां जलमग्न, कई मकान गिरे, 485 लोग बेघर; प्रशासन के सारे दावे फेल

बिलासपुर3 महीने पहले
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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में बारिश और बाढ़ से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। नदी-नाले उफान पर हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में हाहाकार मचा हुआ है। शहर के कई मोहल्ले टापू बन गए हैं, कॉलोनियां जलमग्न हो गई हैं। कई कॉलोनियों में ट्रांसफार्मर डूब जाने से बिजली सप्लाई बंद है। ऐसे में कॉलोनीवासियों को अंधेरे में रतजगा करना पड़ रहा है। दैनिक भास्कर ने रविवार की रात ऐसे इलाकों का हाल जाना, देखिए रिपोर्ट...

पिछले पांच दिनों से लगातार बारिश का सिलसिला जारी है। स्थिति यह है कि नदी-नालों का पानी अब निचली बस्तियों, मोहल्लों के साथ कॉलोनियों में भर गया है। घर, स्कूल, दुकान और झुग्गी बस्तियां डूब गई हैं। शहर के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी बाढ़ की स्थिति है। अरपा और मनियारी नदी के साथ लीलागर नदी के किनारे बसे गांव में हालात खराब है। यहां SDRF की टीम ने बाढ़ में फंसे करीब 100 लोगों को निकालकर सुरक्षित जगह पहुंचाया।

पानी में तैर रहा सामान, बिस्तर में काट रहे दिन और रात।
पानी में तैर रहा सामान, बिस्तर में काट रहे दिन और रात।

सरकंडा में डूब गई बस्ती और मकान, ट्रांसफार्मर बंद
बाढ़ से सरकंडा के अशोक नगर के मेन रोड में बाढ़ का पानी आ गया है। नालियों में जलजमाव होने की वजह से पानी मुख्य मार्ग में तीन फीट ऊपर आ गया है। जिसके चलते दर्जन भर से अधिक मकान और दुकान में पानी घुस गया है। वहीं, ड्रीम लैंड स्कूल और बसोड़ मोहल्ले की झुग्गी झोपड़ियां डूब गई है। यहां रहने वाले परिवार ने दूसरे जगह आसरा लिया है। लगातार पानी में डूबने की वजह से कई मकान भी ढह गए हैं। इसी तरह चौबे कॉलोनी, जोरापारा और कपिलनगर में जलजमाव हो गया है।

किचन में पानी भर गया है, जिससे खाना बनाना भी मुश्किल हो गया है।
किचन में पानी भर गया है, जिससे खाना बनाना भी मुश्किल हो गया है।

शिवम होम्स में लगाया गेट, फिर भी नहीं रुका पानी
दैनिक भास्कर ने बाढ़ से शहर के हालात का जायजा लेने के लिए रविवार की रात शहर की कई कॉलोनियों में पहुंची। इस दौरान सरकंडा के शिवम होम्स कॉलोनी में बाढ़ का पानी रोकने के लिए लोहे का गेट लगाया गया है। कॉलोनी वालों ने बताया कि पिछले तीन दिन से कॉलोनी में पानी भरा हुआ है और यहां के लोग रतजगा कर रहे हैं। ट्रांसफार्मर भी डूबने की स्थिति में है, जिसके चलते लाइट बंद कर दी गई है। ऐसे में उन्हें अंधेरे में रात गुजारना पड़ रहा है।

घरों में घुसा बारिश का पानी।
घरों में घुसा बारिश का पानी।

इन मोहल्लों में भी ठीक नहीं है हालात
शहरी क्षेत्र में सिरगिट्टी, तिफरा, सकरी, घुरू, अमेरी, मन्नाडोल, डिपरापारा, कुंदरापारा, देवारपारा, यदुनंदन नगर, उसलापुर और सरकंडा में सबसे ज्यादा स्थिति खराब है। यहां कई मकान डूब गए हैं और यहां रहने वाले एक हजार से अधिक लोगों ने मकान छोड़ दिया है। प्रशासन का दावा है कि जिन मोहल्लों में मकान डूब गया है, वहां राहत कैंप लगाया गया है और 485 लोगों को अलग-अलग जगहों पर ठहराया गया है।

निचली बस्तियों में ढह गया मकान, देखने वाला कोई नहीं।
निचली बस्तियों में ढह गया मकान, देखने वाला कोई नहीं।

सड़क और गलियां लबालब, छह फीट भरा है पानी
दैनिक भास्कर की टीम सरकंडा के बंधवापारा, अरविंद नगर, जोरापारा सहित कई इलाकों में गई, जहां सड़क और गलियों में छह फीट पानी बह रहा था। लोगों की बाइक, कार और ऑटो तक पानी में डूब गए थे। इन हालात में लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है और कमरों में पानी होने के बावजूद लोग कुर्सी और बेड में बैठकर दिन और रात गुजार रहे हैं।

दो दिन से डुबान में आ गया है बस्ती।
दो दिन से डुबान में आ गया है बस्ती।

ग्रामीण इलाकों में ज्यादा खतरा
ग्रामीण इलाकों में बाढ़ का खतरा ज्यादा है। शहर से लगे अरपा नदी के डूबान वाले इलाकों में बाढ़ का पानी गांव तक पहुंच गया है। इसी तरह पचपेड़ी, जोंधरा, मस्तूरी के निचले गांव में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां बारिश का पानी लोगों के घरों में घुस गया है। कई कच्चे मकान ढह गए हैं। लगातार जल स्तर बढ़ता जा रहा है।

दो से तीन फीट पानी में रहने को मजबूर हैं लोग।
दो से तीन फीट पानी में रहने को मजबूर हैं लोग।

निगम का आपदा प्रबंधन बेकार
नगर निगम ने बारिश पूर्व तैयारी करने का दावा किया था, जिसमें नगर निगम प्रशासन पूरी तरह से फेल हो गया है। यही वजह है कि बारिश की शुरूआत से ही शहर की प्रमुख सड़कों और कॉलोनियों में पानी भर रहा है। वहीं, नगर निगम ने बाढ़ से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन टीम की व्यवस्था करने का दावा किया और बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना की। लेकिन, इसमें नगर निगम पूरी तरह से फेल है। सरकंडा इलाकों में कई बस्तियां डूब गई है। लेकिन, वहां के लोगों के रहने और खाने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है।

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