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  • Parents Are Asking On What Basis It Was Decided That Schools From 1st To 5th Should Be Opened And Classes 6, 7, 9 And 11th Should Remain Closed, Are The Small Children Not At Risk?

आदेश पर असमंजस:पालक पूछ रहे- किस आधार पर तय किया कि पहली से पांचवीं के स्कूल खुलें और कक्षा 6, 7, 9 और 11वीं बंद रहें, क्या छोटे बच्चों को खतरा नहीं?

बिलासपुर2 महीने पहले
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स्कूल खोलने के लिए डीईओ एसके प्रसाद ने कंपोजिट बिल्डिंग में बैठक ली। बैठक में सभी प्राचार्यों को निर्देश देकर कहा गया कि वे कोविड मापदंडों का पालन करते हुए व्यवस्था के लिए इंतजाम रखें। किसी भी बच्चे को दबावपूर्वक न बुलाएं। बच्चों को 50 फीसदी क्षमता के साथ ही बुलाएं। - Money Bhaskar
स्कूल खोलने के लिए डीईओ एसके प्रसाद ने कंपोजिट बिल्डिंग में बैठक ली। बैठक में सभी प्राचार्यों को निर्देश देकर कहा गया कि वे कोविड मापदंडों का पालन करते हुए व्यवस्था के लिए इंतजाम रखें। किसी भी बच्चे को दबावपूर्वक न बुलाएं। बच्चों को 50 फीसदी क्षमता के साथ ही बुलाएं।
  • स्कूल खोलने को लेकर डीईओ ने ली बैठक, बच्चों को दबावपूर्वक न बुलाएं

स्कूल और कॉलेज खुलने को लेकर पालकों ने सरकार के तय किए गए बिंदुओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आदेश में ही लिखा है कि 8वीं,10वीं और 12 वीं की कक्षाएं लगेंगी जबकि अन्य कक्षाएं नहीं लगेंगी। पालक एसोसिएशन सरकार के निर्णय के विरोध में सामने आ गया है।

एसोसिएशन का कहना है कि एक ओर सरकार तीसरी लहर में बच्चों के सबसे ज्यादा प्रभावित होने की बात कहती है और दूसरी ओर पहली से पांचवी तक पालकों की सहमति से स्कूल खोलने की बात कहकर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी से पीछे हट रही है। दैनिक भास्कर ने इस मसले पर पालकों से बात की। पालकों का कहना है कि सरकार का यह बेतुका निर्णय है। जिन कक्षाओं काे लगाया जाना तय किया गया है क्या सरकार उन कक्षाओं के बच्चों केे स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी लेगी? क्या उन्हें कोरोना नहीं होगा?

सर्व स्कूल अभिभावक विद्यार्थी एवं कल्याण संघ के पवन ताम्रकार, ने इस मसले पर कहा कि कुछ कक्षाओं काे लगाने और कुछ के नहीं लगाए जाने का आधार क्या है यह सरकार को स्पष्ट करना चाहिए। अभी स्कूल शुरू करने का कोई तुक नहीं है। जब तक सभी बच्चों और सभी शिक्षकों को दोनों वैक्सीन न लग जाए तब तक स्कूल नहीं खोलना चाहिए। सरकार ने प्राइवेट स्कूल के दबाव में यह सब किया है। स्कूल खोलने के जो बिंदु तय किए गए हैं वह समझ से परे है। अभिभावक अनिल पाठक ने कहा कि पचास फीसदी बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था स्कूल या कॉलेज प्रबंधन किस तरह से करेगा।

जो कक्षाएं लगाई जाएंगी क्या उस क्लास के बच्चों को कोरोना नहीं होगा या फिर सरकार उनकी गारंटी लेगी। अभिभावक अभिषेक वर्मा ने कहा कि जब सरकार खुद मान चुकी है कि तीसरी लहर में बच्चों केे प्रभावित होने की आशंका ज्यादा है तब पहली से पांचवी तक के बच्चो की क्लास क्यों लगाई जा रही है। अभिभावक अभिजीत सरकार ने कहा कि सरकार पालकों की सहमति से स्कूल खोलने का निर्णय करने की बात कह खुद अपना बचाव कर रही है ताकि कोई घटना हो तब वह जिम्मेदारी से बच सके।

सोशल साइट पर अभिभावकों ने लिखा-बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे
अभिभावकों ने सरकार के निर्णय को कटाक्ष करते हुए सोशल साइट पर भी अपने विचार रखे हैं जो कि खूब वायरल हो रहा है। इस पर लोग अपने विचार भी रख रहें। बहुत सारे अभिभावकों ने दूसरेे अभिभावकों से स्कूल नहीं भेजने की बात भी कही है।

ऑफलाइन और ऑनलाइन में उलझे प्राचार्य बोले- मामला पेचीदा है
सरकार के 50 फीसदी छात्रों को पढ़ाने के तय किए गए बिंदु पर कालेजों में भी उहापोह की स्थिति है। प्राचार्य यह समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर वे तय किए गए बिंदुओं के आधार पर कैसे व्यवस्था संभाल पाएंगे। दरअसल 50 फीसदी क्षमता के साथ पढ़ाई और 60/ 40 के रेशियो में ऑफलाइन व ऑनलाइन पढ़ाई प्राचार्यों को भी समझ में नहीं आ रहा है।

सीएमडी कॉलेज के डाॅ. संजय सिंह कहते हैं कि हमें यह तय करना बड़ी मुश्किल हो रही है। कई बातें हैं मसलन एक ही विषय के एक दिन के चैप्टर को शिक्षक दो दिन कैसे पढ़ाएगा। हम इसेे कैसे जांच कर पाएंगे कि किस बच्चे ने पहले दिन पढ़ा है और किसे दूसरे दिन बुलाया जाएगा। इसी तरह से बिलासा गर्ल्स कॉलेज के प्राचार्य एसएल निराला ने कहा कि बच्चों को 60/ 40 के रेशियो में ऑफलाइन व आन लाइन पढ़ाना भी पेचीदा मामला है। असमंजस की स्थिति तो है।

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