पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX59005.270.88 %
  • NIFTY175620.95 %
  • GOLD(MCX 10 GM)463320.4 %
  • SILVER(MCX 1 KG)602350.53 %

नियम को राज्य शासन ने सरल किया:82028 जाति प्रमाण पत्र बनाने मिसल जरूरी नहीं, निकायों व पंचायतों का अनुमोदन मान्य

बिलासपुर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तहसीलों में भटकते रहते हैं छात्र। - Money Bhaskar
जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तहसीलों में भटकते रहते हैं छात्र।
  • जाति प्रमाण पत्र बनाने के नियम को राज्य शासन ने सरल किया

स्कूली बच्चों को जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अब मिसल बंदोबस्त की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। स्थानीय निकायों व पंचायतों की सामान्य सभा से उनका अनुमोदन ही मान्य कर लिया जाएगा। यह व्यवस्था सामान्य प्रशासन विभाग ने दी है। जिसके पास मिसल उपलब्ध है वे पुरानी प्रक्रिया के तहत ही जाति प्रमाण पत्र बनवा सकते हैं उन्हें स्थानीय निकाय या पंचायत की सामान्य सभा से अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी।

जिले में मिडिल स्कूल से लेकर हायर सेकेंडरी स्कूल के बच्चों के 82028 जाति प्रमाण पत्र बनाए जाने हैं। बिलासपुर जिला ही नहीं बल्कि राज्य के अन्य जिलों में भी जाति प्रमाण बनाए जाने को लेकर यही स्थिति है। कोरोना संक्रमण के बाद से जाति प्रमाण पत्र बनाए जाने को लेकर यह पेंडेंसी और भी बढ़ी है।

सामान्य प्रशासन ने पेंडेंसी की बढ़ती समस्या और जाति प्रमाण पत्र बनाए जाने की प्रक्रिया सरल करते हुए अब नगरीय निकाय और पंचायतों की सामान्य सभा से अनुमोदन होने पर भी जाति प्रमाण पत्र को मान्य कर दिया है। बिलासपुर जिले के बीईओ अश्वनी भारद्वाज के अनुसार सबसे अधिक मस्तूरी ब्लॉक में 29787 जाति प्रमाण पत्र बनाए जाने हैं। बिल्हा बीईओ पवित्र सिंह बेदी के अनुसार 28000, बीईओ आरके अंचल के अनुसार 9000 और कोटा बीईओ संजीव शुक्ला के अनुसार 15281 जाति प्रमाण बनाए जाने हैं।

जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए अब तक की सरकारी कोशिशें
अब तक जाति प्रमाण पत्र बनाए जाने के लिए तमाम उपाय किए गए है लेकिन कोशिशें नाकाम हुई है। पहले कहा गया कि सभी स्कूलों में राजस्व अफसर जाकर शिविर के जरिए जाति प्रमाण पत्र बनाएंगे। इसके बाद कोरोना संक्रमण अवधि के दौरान निर्देश दिए गए कि बच्चों को घर पहुंचाकर जाति प्रमाण दिए जाएंगे।

तहसील में रोजाना आते हैं जाति प्रमाण पत्र बनवाने बच्चे
दो मुहानी निवासी बबीत नेताम कक्षा 11 वीं में देवरीखुर्द स्कूल में पढ़ाई करता है उसने बताया कि उसे तहसीलदार का हस्ताक्षर करवाना है इसलिए वह तहसील आया है। इसी तरह शहर के शंकरनगर स्कूल के श्याम प्रकाश ने बताया कि वह कक्षा 12 वीं में पढ़ाई करता है और वह भी तहसीलदार से हस्ताक्षर के लिए आया है। तहसील राजकुमार साहू के अनुसार छोटी कक्षाओं के लिए तहसीलदार के हस्ताक्षर की जरूरत नहीं होती है वह ग्राम सभा से ही बन जाता है। इसके बाद भी बच्चे तहसील मेंें हस्ताक्षर के लिए भटकते हैं।

अब तक ये प्रक्रिया है
आदिवासी विकास विभाग स्कूलों को जाति प्रमाण प्रमाण पत्र का फार्म भेजता है। स्कूलों में बच्चों से जाति प्रमाण पत्र फार्म भरकर अन्य दस्तावेज लगाने होते हैं। 1984 के पूर्व का होने पर पिता का दाखिला पंजी, मिसल और जमीन के दस्तावेज के साथ सभी दस्तावेजों को पटवारी से दस्तखत कराकर लोक सेवा केंद्र में आन लाइन स्केन कराना होता है। यहां से आन लाइन तहसीलदार की आईडी में दस्तावेज जाते हैं जहां से अस्थाई जाति प्रमाण जारी होता है। तहसीलदार की आईडी से एसडीएम की आईडी में जाने पर स्थाई जाति प्रमाण पत्र जारी होता है।

अब क्या होगा
शहरी इलाकों में नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत की सामान्य सभा और ग्रामीण इलाकों में ग्राम सभा में जाति प्रमाण पत्र का अनुमोदन कराने पर ही जाति प्रमाण पत्र बनाए जा सकेंगे। इसके लिए लंबी चौड़ी औपचारिकता की जरूरत नहीं होगी।

खबरें और भी हैं...