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यादें:तीन बार विधायक रहे भाटिया का निधन, टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय लड़े, बिगड़ा था भाजपा का समीकरण

राजनांदगांवएक महीने पहले
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रजिंदरपाल सिंह। - Money Bhaskar
रजिंदरपाल सिंह।
  • छत्तीसगढ़ गठन के बाद डॉ. रमन कैबिनेट में बने थे परिवहन मंत्री, जनाधार ऐसा-

पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता रजिंदरपाल सिंह भाटिया (72 वर्ष) का रविवार की शाम दुखद निधन हो गया। उन्होंने अपने घर में फांसी लगा ली। स्वास्थ्यगत कारणों से परेशान होकर फांसी लगाना बताया जा रहा है। पुलिस जांच कर रही है। भाटिया जिले के कद्दावर नेताओं में से एक रहे।

अविभाजित मध्यप्रदेश में दो बार वे विधायक चुने गए। छत्तीसगढ़ गठन के बाद 2003 के विधानसभा चुनाव में खुज्जी विधानसभा सीट से जीते। सीएम रहे डॉ.रमन सिंह के कैबिनेट में उन्हें परिवहन मंत्री की जिम्मेदारी दी गई। रोचक घटना तो तब हुई जब 2013 के विस चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। तब उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उनका जनाधार साफ दिखा। परिणाम में कांग्रेस की जीत हुई। भाटिया दूसरे नंबर पर रहे।

हर सुख-दुख के आयोजन में शिरकत करते थे
भाटिया हर आयोजन में शिरकत करते थे। सुख हो या दुख, समारोह हो या फिर कोई भी आयोजन वे आम जनता के घरों तक पहुंच ही जाते थे। इसके अलावा छोटी या बड़ी जैसी भी समस्या हो, वे आम लोगों के साथ हमेशा खड़े होते और जिला मुख्यालय तक जनता की बात पहुंचाने में कभी पीछे नहीं हटे। इस वजह से क्षेत्र में उनकी काफी अच्छी पकड़ थी। उनके करीबी बताते हैं कि अविभाजित मध्यप्रदेश के समय जब वे विधायक हुआ करते तो कमांडर जीप उनके पास थी।

कुछ माह रहे मंत्री, फिर सीएसआईडीसी में चेयरमैन
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद 2003 में भाजपा की सरकार बनी। उस समय वे खुज्जी विधानसभा जीते थे। इसके बाद उन्हें परिवहन मंत्री की जिम्मेदारी मिली। बताया गया कि उस समय 13 मंत्री थे। संख्या कम करनी थी। इस वजह से दो मंत्री हटाए गए और 11 रखे गए। तब भाटिया को भी बलिदान देना पड़ा। हालांकि वे सीएसआईडीसी के चेयरमैन बने रहे। करीबियों की मानें तो 10 साल पहले ही उनकी पत्नी का निधन हो गया था। वे छुरिया में अपने भाई सतवन सिंह के साथ रहते थे।

1993 में पहली बार बने विधायक, 2003 में मंत्री
अविभाजित मध्यप्रदेश सरकार में एलबीनगर/खुज्जी विधानसभा में 1993 में निर्दलीय इमरान मेमन को 16692 वोटों से पराजित कर पहली बार विधायक बने। उन्हें 35155 वोट मिले थे। जबकि कांग्रेस उस समय तीसरे नंबर पर थी। 1998 में उन्होंने कांग्रेस के भोलाराम साहू को 4369 वोटों से पराजित किया था। भाटिया को 40488 वोट मिले थे। भोलाराम को 36119 वोट से संतोष करना पड़ा था। 2003 में वे विधायक निर्वाचित हुए और मंत्री बने।

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